पोथी-पन्ना

भारत में जन्मा वो लेखक जिसे बुकर प्राइज़ से लेकर फतवों तक सब मिला

यदि वो लेखक अपना रिज्यूमे तैयार करे तो उसमें 'अचीवमेंट्स' वाला सेक्शन कुछ ऐसा दिखेगा: 1981 में

जानिए सुषमा स्वराज जिस ओआईसी की बैठक में गई हैं वो आखिर है क्या ?

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज कल आबू धाबी पहुंच गई हैं. जिसको लेकर खबरों का बाज़ार काफी गर्म

नहीं रहे हिंदी साहित्य के शिखर पुरूष नामवर सिंह

हिंदी साहित्य की दुनिया के लिए बीता मंगलवार बुरा दिन साबित हुआ. साहित्य की दुनिया के बड़े

आज की कविता : ‘मेरी रुखसती के बाद भर आना मेरे पिताजी के लिए गुसलखाने में पानी’- अभिषेक कुमार

अभिषेक कुमार पेशे से फौजी है साथ में गाते भी बहुत खूब हैं. पर जब कभी ज़्यादा

आज की कविताः हमारा यार है हम में हमन को इंतजारी क्या? – कबीर

कबीर अपने आप में हिंदी साहित्य की एक परंपरा हैं. हिंदुस्तान की रूढ़ियों के चिथड़े उड़ाने का

आज की कविता : ‘मैं एक बड़ी निराशा पर जड़ा एक जंग लगा ताला हूँ’ – आशुतोष दुबे

1963 में मध्यप्रदेश के इंदौर में जन्मे आशुतोष दुबे वैसे तो कॉलेज में अंग्रेजी पढ़ाते हैं. पर

आज की कविता : ‘हम बातें करते हैं और भूल जाते हैं कि क्या बात की’ – अमित तिवारी

  अमित तिवारी पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं. पर कोडिंग के साथ-साथ व्यंग्य भी लिखते हैं. इनके

यों मैं कवि हूँ, आधुनिक हूँ, नया हूँ: काव्य-तत्व की खोज में कहाँ नहीं गया हूँ?

अज्ञेय की कविताएंं छंद मुक्त होती हैं. उन्होंने साहित्य की दुनिया में आधुनिकता की नींव रखी. उन्हें

आज की कविता में पढ़िए, ‘त्रिलोचन’ की कविता ‘चंपा काले-काले अक्षर नहीं चीन्हती’

भारत में महिलाओं की साक्षरता दर अब भी बहुत कम है. जिस देश के बच्चे पढ़-लिखे होते