तब की बात

व्हाट्सएप और फेसबुकिया ग्रुप पढ़ कर अगर नेहरू को गयासुद्दीन ग़ाज़ी समझने लगे हो, तो मालिक सही जगह पधारे हो। नेहरू-गाँधी की कुंडली के साथ-साथ पूरे इतिहास का पोथी-पन्ना यहीं मिलेगा।

टाइम मशीन होती तो आपको पीछे ही ले जाते। चूँकि वो तो है नहीं, इसलिए इतिहासकारों की किताबों का हवाला देते हुए करेंगे ‘तब की बात’।

बर्थडे स्पेशल:- प्यार को समझाती हुई सुखदेव के नाम भगत सिंह की चिट्ठी

भगत सिंह और सुखदेव की मित्रता अजीब और दुर्लभ थी। कई मामलों पर उनके विचार बिल्कुल

वो टैगोर जिन्होंने देश प्रेम का विस्तार विश्व प्रेम के रूप में होना ही मानवता समझा

रविन्द्रनाथ टैगोर, भारत की आजादी की इबारत से लेकर उसके आजादी के राष्ट्र गान तक लिखने वाले

  • जब फील्ड माॅर्शल मानेकशाॅ ने इंदिरा गांधी को बोला, आई एम आलवेज रेडी ‘स्वीटी’

जब फील्ड माॅर्शल मानेकशाॅ ने इंदिरा गांधी को बोला, आई एम आलवेज रेडी ‘स्वीटी’

हमेशा हंसने वाले, बड़ी-बड़ी मूंछों वाले और किसी से भी न डरने वाले भारत के पहले फील्ड

शहीद भगत सिंह के साथी सुखदेव के बारे में वो बातें जो शायद आपको नहीं पता होगी

आजादी की लड़ाई में लाखों लोगों ने अपने प्राणों की आहुति दी। ऐसे जाबांज़ी और साहसी

  • रंजन गोगोई से आज नेहरु का वो फैसला भी याद आ गया जिससे कांग्रेस भी नाराज थी

रंजन गोगोई से आज नेहरु का वो फैसला भी याद आ गया जिससे कांग्रेस भी नाराज थी

साल 1958 में भारतीय जीवन बीमा निगम यानि LIC में देश का पहला वित्तीय घाटा हुआ था।