तब की बात

व्हाट्सएप और फेसबुकिया ग्रुप पढ़ कर अगर नेहरू को गयासुद्दीन ग़ाज़ी समझने लगे हो, तो मालिक सही जगह पधारे हो। नेहरू-गाँधी की कुंडली के साथ-साथ पूरे इतिहास का पोथी-पन्ना यहीं मिलेगा।

टाइम मशीन होती तो आपको पीछे ही ले जाते। चूँकि वो तो है नहीं, इसलिए इतिहासकारों की किताबों का हवाला देते हुए करेंगे ‘तब की बात’।

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सावित्रीबाई फुले दो-दो साड़ियां पहनकर घर से बाहर क्यों निकलती थीं

आपको याद हैं आपके पहले शिक्षक? नहीं होंगे। ये याद रखना इतना ज़रूरी भी नहीं मगर ज़रूरी

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साोनिया गांधी, जिन्हें आज भारतीय राजनीति का पुरोधा माना जाता है। आज भी वह राजनीति में उतनी

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साल 1982, तारीख थी 11 जनवरी। जगह, बडाला का अंबेडकर कॉलेज। छह पुलिसवालों की टीम में से

  • रानी लक्ष्मीबाई के जन्मदिन पर उनकी रानी से मदार्नी बनने की कहानी

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हम सबने अपने बचपन में सुभद्रा कुमारी चौहान की एक कविता जरूर पढ़ी होगी। ‘खूब लड़ी