राब्ता

राब्ता: किसी गुमनाम की किसी गुमनाम के लिए एक चिट्ठी प्यार भरी।

खैर, खून, खाँसी, खुसी, बैर, प्रीति, मदपान।रहिमन दाबे न दबै, जानत सकल जहान॥ प्रेम को छुपाना बहुत

राब्ता: पढ़िए चेहरे पर मुस्कान ला देने वाला एक पति का अपनी पत्नी को लिखा गया ख़त

रिश्तों का ताना-बाना खूबसूरत होता है. बहुत-सी यादें होती हैं, बहुत-से किस्से होते हैं और बहुत-से अहसास

2018-12-31T15:12:56+05:30December 31st, 2018|राब्ता|0 Comments