पाकिस्तान के साथ हुई घटना के बाद एक बार फिर से भारत ने आतंकवाद के खिलाफ कमर कस ली है। पाकिस्तान का मामला अभी ठंढा भी नहीं हुआ है कि भारत ने एक और फैसला लेकर सभी को अचंभित कर दिया है।

पाकिस्तान में जैश-ए- मोहम्मद जैसे आतंकी संगठन को तबाह करने के बाद केंद्र सरकार ने अब अपने घर के अंदर के आतंकी संगठन को साफ करने का फैसला लिया है। ये वो संगठन हैं जोकि आतंकवाद को बढ़ावा दे रहे हैं, अब उनके खिलाफ भारत ने एक मुहिम छेड़ी है।

इस कड़ी में सरकार ने जम्मू- कश्मीर के कट्टरपंथी संगठन ‘जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर’ पर प्रतिबंध लगा दिया है। सुरक्षा को मद्देनजर रखते हुए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक हुई जिसके बाद यह फैसला लिया गया। ‘जमात-ए-इस्लाम जम्मू कश्मीर’ पर यह आरोप लगाया गया है कि यह संगठन देश में विध्वंसकारी गतिविधियों को जन्म देने और आतंकी संगठन को बढ़ावा देने का कार्य करता है।

जमात-ए-इस्लामी के बैन का विरोध करते संगठन के लोग। फोटो सोर्स: गूगल

बैन लगने के बाद सरकार ने बड़ी कार्रवाई करते हुए संगठन के नेताओं के घरों, दफ्तरों और सम्पत्तियों को सील कर दिया है। बताया जा रहा है कि पिछले चार दिनों में ‘जमात-ए-इस्लाम जम्मू कश्मीर’ के लगभग 200 से अधिक नेताओं औऱ कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया हैं।

क्या है ‘जमात-ए-इस्लाम’?

1941 में इस्लामी विचारक मौलाना अबुल मौदूदी ने ‘जमात-ए-इस्लाम’ नाम से एक इस्लामी राजनीतिक पार्टी बनाई, जिसके तीन रुप देखने को मिले या फिर यह कहें कि यह तीन भागों में बंट गया- ‘जमात-ए-इस्लाम जम्मू कश्मीर’, ‘जमात-ए-इस्लाम पाकिस्तान’ और ‘जमात-ए-इस्लाम हिन्द’। जिसमें ‘जमात-ए-इस्लाम हिन्द’ को छोड़कर बाकी दोनों पार्टीयां के आतंकी गतिविधियों में शामिल होने की खबर सामने आई हैं।

अगर सबसे पहले बात करे ‘जमात-ए-इस्लाम पाकिस्तान की तो भारत-पाक विभाजन के बाद मौलाना अबुल मौदूद पाकिस्तान चला गया जहां उसने एक राजनीतिक पार्टी बना ली और उसका नाम ‘जमात-ए-इस्लाम पाकिस्तान’ रखा। लेकिन साल 1948-1953 के बीच पार्टी दबाव में आ गई और उसपर चार बार बैन लगाया गया। इसके पीछे का कारण था कि पार्टी के द्वारा सरकार के खिलाफ कट्टरपंथी तेवर अपनाना. इस आरोप के बाद मौदूद को फांसी की सजा सुनाई गई जोकि बाद में उम्र कैद में तब्दिल कर दी गई।

वहीं दूसरी शाखा जो ‘जमात-ए-इस्लाम हिंद’ के नाम से जाना जाता है, इसकी स्थापना 1948 में हुई थी। 240 लोगों की टीम के बीच मौलाना अबुलैस नदवी को पार्टी का नेता घोषित किया गया। लखनऊ हेडक्वार्टर होने के बाद साल 1960 में इसका हैडक्वार्टर नई दिल्ली में बना दिया गया। फिर इनहोने अपने संविधान में भी बदलाव किया। इस दौरान दो बार बैन होने के बाद कई नेतांओं को पकड़कर जेल भेज दिया गया।

तीसरी और सबसे अन्तिम शाखा ‘जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर’ थी जोकि अलगाववादी और कट्टरपंथी के प्रचार-प्रसार के लिए मुख्य संगठन और आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन में रंगरूटों की भर्ती, उसके लिए रुपयों की व्यवस्था, आश्रय और साजो-सामान के संबंध में सभी प्रकार का सहयोग देता आ रहा है।

इस तरह आतंकवाद को जड़ से साफ करने का इरादा लिए भारत ने अब जमात-ए-इस्लामी जम्मू कश्मीर के नेताओं को पकड़कर जेल में डालने का सिलसिला शुरु कर दिया है। बताया जा रहा है कि कश्मिर में इसके 70 ठिकाने को अबतक सील कर दिया गया है।

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