ये ख़बर पढ़कर नाइंटीज़ के दौर में पैदा हुये तमाम लोग नॉस्टेलजिया से घिर जाएँगे. नब्बे के दशक का बचपन. जब हाथों में स्मार्ट फोन नहीं हुआ करते थे और न ही फोन में फ्रंट कैमरे. दूरदर्शन का वो युग जब बच्चों को टीवी देखने की मनाही होती थी. जब सुपर हीरोज के नाम पर हमारे पास ले-देकर सिर्फ शक्तिमान ही हुआ करता था. मारवल के सुपर हीरोज कम से कम हम तो नहीं ही पहुंचे थे. तब सिर्फ चाचा-चौधरी, बिल्लू, पिंकी जैसी कॉमिक बुक्स का ही सहारा होता था.

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उसी 90 के दशक में बच्चों के लिए मासिक पत्रिकाओं का भी ज़ोर था. ‘चंदामामा’ बच्चों के लिए प्रकाशित होने वाली सबसे पुरानी पत्रिका ‘थी.’ जी, हाँ थी. खबर है कि चंदामामा पत्रिका को पूरी तरह से बंद कर दिया गया है. न सिर्फ पत्रिका को बंद किया गया है. बल्कि पत्रिका पर मालिकाना हक रखने वाली कंपनी जियोडेसिक लिमिटेड पर धोखाधड़ी के आरोप है. जिसके चलते कंपनी को नीलाम करने की घोषणा कर दी गई है.

1947 में बी. नागी रेड्डी और उनके दोस्त चक्रपाणि ने मिलकर तमिल और तेलुगू भाषा में ‘अंबुलिमामा’ नाम की एक पत्रिका का संपादन शुरू किया था. पत्रिका में बच्चों के लिये ज्ञानवर्धक दंतकथाएँ और सचित्र कहानियां प्रकाशित की जाती थीं. बाद में इस पत्रिका के विस्तार में ‘विक्रम-बेताल’ तक की कहानियों को शामिल कर लिया गया था. कहानी कहने की अपनी खास शैली की वजह से यह पत्रिका बच्चों में काफी पसंद की जा रही थी. जिसके चलते पत्रिका को हिन्दी, अंग्रेजी, सिंधी, संस्कृत सहित कुल 13 भाषाओं में प्रकाशित किया जाने लगा. जिसमें पत्रिका का हिन्दी नाम ‘चंदामामा’ रखा गया.

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कुछ समय बाद देश में डिजिटल युग की शुरुआत हुई और पत्रिका का डिजिटल संस्कारण लाने की पहल की गई. साल 2007 में चंदामामा पत्रिका को मुंबई की जियोडेसिक लिमिटेड ने खरीद लिया और इसके डिजिटल प्रकाशन की ज़िम्मेदारी लेने की बात कही थी. पर कंपनी की कोशिश सफल नहीं हो सकी. कारण, कंपनी पर धोखाधड़ी और गबन का आरोप लगा हुआ था.

इंडियन एक्सप्रेस में छपी ख़बर के अनुसार बताया जा रहा है कि, कंपनी द्वारा बैंक का बकाया न चुकाए जाने के चलते 11 जनवरी को मुंबई हाई कोर्ट ने जियोडेसिक कंपनी को उसकी सहायक कंपनियों समेत नीलाम करने का आदेश दे दिया है. जिसमें चंदामामा पत्रिका भी शामिल है. चंदामामा की कुल कीमत 25 करोड़ रुपये आँकी गई है. कंपनी ने भी कोर्ट के इस फैसले पर कोई आपत्ति नहीं जताई है. बल्कि कंपनी के डायरेक्टर्स ने खुद कंपनी की सभी संपत्तियों के बिक्री के लिए ‘बिना शर्त’ सहमति दे दी है. जियोडेसिक कंपनी पर कुल मिलाकर करीब 812 करोड़ रुपये की कर चोरी और गबन का आरोप है.

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हालांकि चंदामामा पत्रिका का प्रकाशन 2013 के बाद से ही बंद था. पिछले चार सालों से पत्रिका से जुड़े करीब 6000 चित्र, कहानी सीरीज के 30 से ज्यादा काल्पनिक पात्र व विक्रम बेताल के कई एपिसोड्स समेत दस्तावेज़ एक गोदाम में सीज पड़े हुये है.