6 सितंबर भारतीय इतिहास में दर्ज होने वाला दिन, यह इतिहास में अमर तो जरुर हो गया लेकिन, साथ ही थोड़ी सी कसक इस बात की रह गई कि लैंडिग से ठीक पहले हमारा लैंडर विक्रम से संपर्क टूट गया। इस वजह से मिशन चंद्रयान-2 अधूरा रह गया। लेकिन, इन सब के बावजूद पूरा विश्व भारत के वैज्ञानिकों की तारीफें कर रहा है। ऐसे में शायद यह बात पाकिस्तान को नहीं पच पा रही है। पाकिस्तान के कई मंत्रियों ने चंद्रयान को लेकर ट्वीट किया है। जिसमें पाकिस्तान के विज्ञान और तकनीकी मंत्री फवाद हुसैन के साथ-साथ पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता आसिफ गफूर का भी  नाम शामिल है।

फवाद चौधरी, पाकिस्तानी विज्ञान और तकनीकी मंत्री, फोटो सोर्स: गूगल
फवाद चौधरी, पाकिस्तानी विज्ञान और तकनीकी मंत्री, फोटो सोर्स: गूगल

कल रात पूरा भारत जाग रहा था। सभी इस ऐतिहासिक पल को देखने की प्रतीक्षा कर रहे थे लेकिन, इसके साथ जग रहे थे पाकिस्तानी मंत्री फवाद हुसैन। वो भी केवल इसलिए ताकि ट्वीट-ट्वीट का खेल खेल सकें। फवाद ने ट्विटर पर जो भसड़ मचाई है उससे तो यही लग रहा है कि उनका विज्ञान और तकनीकी मंत्री होना पाकिस्तान के लिए नहीं बल्कि साइंस के लिए सबसे बड़ा अन्याय है। फवाद ने पहले एक ट्वीट किया जिसमें उन्होंने लिखा-

जो काम आता नहीं पंगा नहीं लेते न डियर एंडिया!

यहां ध्यान दीजिएगा इंडिया शब्द तो जनाब की डिक्शनरी में है ही नहीं, फिलहाल एंडिया से काम चला रहे हैं। पहले ट्वीट देखिए फिर इनका गुणगान आगे करेंगे।

चौधरी फवाद हुसैन रात भर जाग कर यही सोच रहे थे कि कब लैंडिग फेल हो और कब हम ट्विटर पर अपनी छोटी सोच का प्रदर्शन करें। हिंदी में एक शब्द है खाली होना जिसका अपभ्रंश शब्द होता है खलिहर। ऐसा लगता है कि पाकिस्तान की डिक्शनरी में यह शब्द नहीं है। पहले तो उन्होंने अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया लेकिन, जब किसी तरह का कोई मजेदार जवाब नहीं मिला तो वो भारतीय यूजर्स के ट्वीट को रिट्वीट करने में लग गए। इससे पता चलता है कि साहब खलिहरपंती की हद पार कर चुके थे। आप भी उनका यह ट्वीट देख लीजिए।

 सबसे मजेदार बात फवाद को उनके ही देश के लोगों ने ट्रोल कर दिया। सुलेमान ललवानी ने लिखा-

पाकिस्तान की तरफ से माफी। फवाद का ट्वीट दुर्भावना से ग्रस्त है।

एक अन्‍य पाकिस्‍तानी सैयद बिलावल कमाल ने लिखा,

फवाद चौधरी हमारे लिए शर्मिंदगी की वजह न बनें। कम से कम भारत ने चांद पर उतरने का प्रयास किया। हमें किसी भी देश के वैज्ञानिक प्रयास की प्रशंसा करनी चाहिए और उससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

फवाद का जब ट्विटर हैंडल को खंगाला गया तो जनाब ने जो वहा रायता फैला रखा है, वह सबको पता है। पिछले 15 घंटों में उन्होंने कुल 8 ट्वीट्स किए हैं। ध्यान दीजिएगा यहां उनके द्वारा रिट्वीट करने की बात बिल्कुल नहीं हो रही है। साहब ने रात भर जागकर भारतीय यूजर्स का इंटरटेनमेंट तो किया ही है, ऐसा लग रहा है कि इनकी नींद ही उड़ गई है क्योंकि रात भर ट्विटर पर बकैती करने के बाद सुबह-सुबह भी शुरु हो गए। सुबह में उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा-

डियर एंडिया! चन्द्रयान जैसे पागल मिशन पर पैसा बर्बाद करने के बजाय या एलओसी के पार सिर्फ चाय के लिए अभिनंदन जैसे बेवकूफों को भेजने से अच्छा है कि अपने देश की गरीबी पर ध्यान दें।

उनके इस ट्वीट पर हंसी भी आती है और उनकी दशा पर दया भी। बेचारे सर्जिकल स्ट्राइक से अभी तक उभर नहीं पाए हैं और बात कर रहे हैं भारत की गरीबी की। पाकिस्तान सचिवालय की दशा तो इस कदर खराब है कि उसके पिछले दो महीनों का बिजली बिल जो सिर्फ 35 लाख रुपये है, नहीं भरा गया है जिससे बिजली काटे जाने की भी खबर आ रही थी। अब ऐसे में अगर कोई इस तरह का बयान दे तो यह हैरान कर देने वाली ही बात होगी।

कहते हैं जिनके घर शीशे के बने होते हैं वो दूसरों के घरों में पत्थर नहीं मारा करते। पाकिस्तान को इससे क्या फर्क पड़ता है। फवाद हुसैन तो वो शख्स हैं जिन्होंने कुछ दिन पहले यहां तक कह दिया था ‘हबल स्पेस’ टेलिस्कोप को स्पेस में पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी सुपारको ने भेजा था. जबकि ये काम असल में नासा ने किया था। आज से 24 साल पहले।

पाकिस्तान चाहे जो कुछ भी कहे लेकिन, भारतीय वैज्ञानिकों का गुणगान आज पूरा देश कर रहा है। रुस ने भी इसरो और पीएम मोदी को बधाई दी है। ऐसे में जब पूरा देश भारतीय वैज्ञानिकों के साथ खड़ा है तो क्या फर्क पड़ता है पाकिस्तान के भौंकने का। ‘हाथी चले बाज़ार, कुत्ते भौंके हज़ार’ ये तो बचपन से हम सुनते आ रहे हैं। और अब बारी है इस पर अमल करने की। लेट देम बार्क।

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