अमूमन हर रोज़ की तरह कल भी मीडिया और अफवाहों का बाज़ार गर्म रहा। लेकिन थोड़ा ज़्यादा। वजह थी धार्मिक उन्माद, मतलब हिन्दू-मुसलमान वाला मामला। खबर आई पुरानी दिल्ली के लाल कुआं बाज़ार से। जहां कुछ असामजिक तत्वों ने एक मंदिर के भीतर घुस कर तोड़ फोड़ की। मंदिर टूटने की खबर सुनकर माहौल काफी गर्मा गया जिसे संभालने के लिए पैरामिलिट्री तैनात किये जाने की खबर आई।

पूरा मामला डिटेल में

दिन रविवार, देर रात दिल्ली के लाल कुआं बाज़ार स्थित ‘गली दुर्गा मंदिर’ में कुछ ‘घटिया लोगों’ ने वहां स्थित मंदिर में रखी मूर्तियों को तोड़ दिया। अब यह मूर्तियां किसने तोड़ी अभी ये साफ नहीं हुआ है, लेकिन जो बातें सुनने को मिल रही है उसके अनुसार इन मूर्तियों को मुसलमानों ने तोड़ा हैं।

असल में ये मामला धार्मिक विवाद का है ही नहीं। बल्कि यह मामला एक छोटी सी बात यानि बाइक पार्किंग का है।

बात शुरू होती है संजीव गुप्ता की दुकान से। एक पक्ष के मुताबिक जहां आस मोहम्मद नाम का एक व्यक्ति अपनी स्कूटर खड़ी करने आया। संजीव और उनकी पत्नी बबीता ने दुकान के पास स्कूटर खड़ा करने को लेकर विरोध जताया तो उस वक़्त वह वहां से चला गया। लेकिन बाद में आस मोहम्मद कुछ लोगों के साथ आया और मारपीट की। जबकि दूसरे पक्ष का कुछ और कहना है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

दूसरे पक्ष के कुछ लोगों में से एक 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर साकिब का कहना है कि, जब आस मोहम्मद की पिटाई कर दी गई। तो उसने और उसके परिवार के अन्य सदस्यों ने थाने पहुंचकर मामला दर्ज कराया। वहीं बीबीसी में छपी रिपोर्ट अनुसार मुस्लिम समुदाय का कहना है कि चार-पाँच हिन्दू लड़कों ने रात के क़रीब 11 बजे के आस-पास आस मोहम्मद नाम के एक युवक को बुरी तरह पीटा और इस झगड़े की शुरुआत सिर्फ बाइक की पार्किंग करने को लेकर शुरू हुई। लेकिन फिर आखिर ऐसा क्या हुआ जो सिर्फ बाइक को पार्क करने को लेकर यहां तक बात पहुंच गई।

इस पर वहां रहने वाले आकिब हसन नाम के एक व्यक्ति का कहना है कि,

“जब मोहम्मद ने अपना स्कूटर खड़ा किया तो संजीव गुप्ता ने उससे कहा कि, वो अपना स्कूटर कहीं और ले जाए, नहीं तो वो उसे आग लगा देंगे। इसके बाद दोनों का झगड़ा हो गया। जिसमें गुप्ता और कुछ अन्य लोगों ने मोहम्मद को मकान के अंदर खींचकर उसकी पिटाई कर दी”

अच्छा दोनों पक्षों के पास वीडियो भी मौजूद है। इनमें से एक वीडियो में पार्किंग विवाद को लेकर कुछ लोग एक युवक की कथित रूप से पिटाई करते दिख रहे हैं। हौज़ क़ाज़ी थाने के एसएचओ सुनील कुमार के अनुसार, रविवार देर रात ही मुस्लिम युवक को पीटने वाले अभियुक्तों में से एक को पुलिस ने हिरासत में ले लिया था। पुलिस के अनुसार अन्य अभियुक्त अभी फ़रार हैं।

अच्छा ये तो रही वो बात जिसकी वजह से झगड़ा हुआ। लेकिन फिर इस झगड़े ने हिन्दू-मुसलमान के झगड़े का रूप कैसे ले लिया। तो जैसा कि हमने ऊपर बताया दोनों पक्षों के पास वीडियो मौजूद है। तो हिन्दू पक्ष के पास जो वीडियो मौजूद है उसमे साफ़ तौर पर देखा जा सकता है कि देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ा गया है और आस-पास पथराव के भी निशान मौजूद है।

पुलिस स्थिति का काबू में कर रही है.

प्रतीकात्मक तस्वीर/ फोटो सोर्स- गूगल

इस पर स्थानीय पुलिस के अनुसार दुर्गा, शिव, राम, हनुमान समेत अन्य हिन्दू देवी देवताओं की झांकियों वाले इस मंदिर में रविवार देर रात तोड़फोड़ की गई। लेकिन आख़िर इस भीड़ ने मंदिर को क्यों नुकसान पहुंचाया? अगर ये भीड़ मुसलमानों की थी, तो उनसे एक सवाल ज़रूर पूछा जाना चाहिए कि जिस मज़हब की आड़ में उन्होंने ऐसा किया है, क्या उनका मज़हब ऐसी सिचुएशन में उन्हें ऐसी ही कोई चीज़ करने को कहता है?

हौज़ क़ाज़ी थाने के एसएचओ सुनील कुमार के अनुसार रविवार रात जिस समय पुलिस ने एक अभियुक्त को हिरासत में लिया, उसके बाद गली दुर्गा मंदिर में पथराव किया गया। यानि कि मंदिर पर हमले से पहले ही पुलिस दोनों पक्षों को थाने ले जा चुकी थी। तो फिर इस सवाल का जवाब कौन देगा कि मंदिर को क्यों निशाना बनाया गया?

यहां रहने वाले साकिब ने दावा किया कि,

“जब मोहम्मद और गुप्ता पुलिस थाने में थे। तब कुछ अज्ञात व्यक्ति मंदिर के बाहर एकत्रित हो गए और उसमें तोड़-फोड़ की। इससे क्षेत्र में तनाव पैदा हो गया।”

बात चाहे जो भी हो, लेकिन दोनों ही तरफ़ से ये नफरत का बीज बहुत बुरा और घिनौना है। नेताओं और सियासतदानों द्वारा घोला गया ये जहर अब हमारे-आपके घर तक आ पहुंचा है। बक़ौल रविश कुमार ये टीवी और नफ़रत धीरे-धीरे आपको एक मानव बम में बदल रहा है और यह एक दिन आपके घर तक आ जाएगा। हो भी कुछ ऐसा ही रहा है, ये नफ़रत आपके गली-मोहल्लों तक पहुंच चुकी है।

जिस मंदिर को नुकसान पहुंचाया गया है। वह मंदिर कई वर्ष पुराना बताया जा रहा है और यह मंदिर एक हिन्दू मोहल्ले के शुरुआती छोर पर स्थित है।

अब क्या स्थिति है?

फिलहाल लाल कुआं बाज़ार रोड पर तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है। इसलिए गली दुर्गा मंदिर के सामने उस इलाक़े की पुलिस के साथ दूसरे थानो से आई पुलिस भी तैनात है। वहीं पुलिस ने इलाके में कानून-व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए सुरक्षा और बढ़ा दी है। जिसकी वज़ह से पैरामिलिट्री भी अब इस इलाके में तैनात है।

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चांदनी चौक में तैनात पैरा-मिलिट्री फोर्स, फोटो सोर्स- गूगल

इस पूरे मामले पर मध्य दिल्ली पुलिस के उपायुक्त मंदीप सिंह रंधावा ने ट्वीट किया है।

हौज काजी में पार्किंग मुद्दे को लेकर कुछ विवाद और झगड़े के बाद अलग-अलग समुदायों के दो समूहों के बीच तनाव उत्पन्न हो गया। हमने कानूनी कार्रवाई की है और भावनाओं को शांत करने तथा सौहार्द्र के लिए सभी प्रयास किये जा रहे हैं। लोगों से सामान्य स्थिति बहाली में मदद का अनुरोध किया जाता है।

खैर, जिस मुस्लिम युवक की पिटाई की गई थी। उसे पुलिस ने अपनी निगरानी में रखा हुआ है। साथ ही उस हिन्दू परिवार से भी किसी को नहीं मिलने दिया जा रहा, जिस पर मार-पीट करने का आरोप है।

खैर, फ़िलहाल अभी एक नई अपडेट आई है। जिसके अनुसार दोनों समुदाय के लोगों ने भाईचारे का सबूत देते हुए पूरा मामला सुलझा लिया है और फिर से हर रोज़ की तरह सब कुछ नॉर्मल हो गया है। मंदिर में पूजा शुरू हो गई है और बाकी लोग भी अपने-अपने कामों पर जाने लगे हैं।

आख़िर में…

इस पूरी खबर को जानने और पढ़ने के बाद आपके ज़हन को क्या समझ आया। वो आपको बेहतर पता होगा। लेकिन यहां पर ऐसे झगड़े और नफ़रत रखने वालों से एक सवाल है कि क्या उन्हें याद नहीं साल 1992 की वो नफ़रत भरी वारदात, जिसकी सज़ा आज तक हमारा देश भुगत रहा है? क्या ऐसी नफ़रत रखने और करने वाले लोगों के पास कोई एक भी ऐसा उदाहरण है जिससे वो साबित कर सके कि इससे इंसानियत को इससे कोई फायदा पहुंचा हो।