बदलते परिवेश के बदलते दौर में एक तरफ लोग भारतीय संस्कृति को बचाने की बता कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ पाश्चात्य संस्कृति के खाद्य पदार्थ देशभर के लोगों की जीवनशैली का हिस्सा बन चुके हैं। जिनमें सभी आयु वर्ग के लोगों में कोल्ड ड्रिंक एक न मिटने वाली पहचान बना चुकी है। अधिकांश देखा गया है कि यात्रा पर लोग पानी की जगह कोल्ड ड्रिंक खरीदना ही पसंद करते हैं लेकिन हम यह भूल जाते हैं कि कोल्ड ड्रिंक पीने में जितनी स्वादिष्ट है उसे कई ज्यादा ज़हर यह लोगों के शरीर में घोल रही है। जिस कारण हर साल लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि कोल्ड ड्रिंक क्यों और किस प्रकार इंसान की सेहत के लिए नुकसादायक है।

कोल्ड ड्रिंक कैमिकल के माध्यम से बनाया गया एक प्रकार एसिड है। जिसे स्वादिष्ट बनाने के लिए विभिन्न प्रकार के फ्लेवर डाले जाते हैं। लेकिन कोल्ड ड्रिंक हमारे पेट में जाने के बाद उसी प्रकार कार्य करती है, जिस प्रकार एसिड टाॅयलेट साफ करने के दौरान करता है। दरअसल कोल्ड ड्रिंक में डोपामाइन नामक कैमिकल डाला जाता है, जो दिमाग में भारी मात्रा में शुगर पैदा करता है।

जिस कारण लोग कोल्ड ड्रिंक पीने के आदि हो जाते हैं। लोग अक्सर सफर पर जाने के दौरान कोल्ड ड्रिंक पीते हैं। लेकिन कोल्ड ड्रिंक में भारी मात्रा में कैफीन होता है, जिस कारण शरीर में डिहाइड्रेशन होने से पानी की कमी हो जाती है। कोल्ड ड्रिंक में पाया जाने वाला फोस्फोरिक एसिड कैल्शियम को सोखने से रोकता है। जिसे पीने से दांत और हड्डियां खराब होने लगते हैं। दरअसल कोल्ड ड्रिंक हड्डियों को गलाने का कार्य करती है। कोल्ड ड्रिंक में मौजूद कैमिकल से एसिडिटी होेने के अलावा अल्सर की समस्या भी हो सकती है। ज्यादा मात्रा में कोल्ड ड्रिंक पीने में लीवर से संबंधित बीमारियों का सामना भी करना पड़ सकता है।

 विश्व भर के करोड़ों लोग कोल्ड ड्रिंक से होने वाले नुकसान के बारे में जानने के बाद भी कोल्ड ड्रिंक पीते हैं। जबकि कई लोग मानते हैं कि एक गिलास कोल्ड ड्रिंक पीने से शरीर को कोई नुकसान नहीं होता। जबकि विश्वभर में हुई कई रिसर्च में इस बात की पुष्टि हुई है कि रोजाना एक गिलास कोल्ड ड्रिंक पीने से प्रोस्टेट कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। कोल्ड ड्रिंक में हाई शुगर और कैलोरी होती है, जिससे शुगर होने का खतरा बढ़ जाता है। कोल्ड ड्रिंक में पाए जाने वाले कई कैमिकल सर्वाइकल कैंसर को भी जन्म देते हैं।

वर्ष 2015 में ब्रिटेन के एक अखबार में छपी रिसर्च के मुताबिक 350 मिली कोल्ड ड्रिंक पीते ही शरीर लगभग दस चम्मच चीनी चली जाती है। चीनी की इतनी मात्रा एक व्यक्ति के शरीर की रोजाना की जरूरत से काफी ज्यादा है। हालांकि एक साथ इतनी चीनी खाते पर इंसान बीमार हो सकता है, लेकिन कोल्ड ड्रिंक में पाए जाने वाले फोस्फोरिक एसिड के कारण, कोल्ड ड्रिंक पीते वक्त मिठास कम लगती है। कोल्ड ड्रिंक पीने के 20 मिनट बाद शरीर में ब्लड शुगर बढ़ जाता है। इससे इंसुलिन का बहाव तेजी से होने लगता है। पीने के 40 मिनट बाद शरीर कोल्ड ड्रिंक में मौजूद कैफीन पूरी तरह ग्रहण कर लेता है, इससे आंखों की पुतलियां

फैलने के साथ ही व्यक्ति अलर्ट होने लगता है। कोल्ड ड्रिंक का ज्यादा सेवन करने से व्यक्ति की बार बार नींद टूटने लगती है, साथ ही उसका ब्लड पे्रेशर भी बढ़ जाता है। 45 मिनट बाद कोल्ड ड्रिंक में मौजूद डोपामाइन कैमिकल दिमाग में मौजूद खुशी देने वाले हिस्से सक्रिय कर देता है। 60 मिनट बाद फाॅस्फोरिक एसिड के कारण शहरी में कैल्शियम, मैग्नीशियम और जिंक जैसे अन्य मिनरल हड्डियों तक नहीं पहुंच पाते और हड्डिया कमजोर होने लगती है। इसके बाद शरीर थका हुआ महसूस करता है और जरूरी पोषक तत्व शरीर के बाहर निकल जाते हैं।

आज हमे यह समझने की जरूरत है कि जीवन अमूल्य है। जिसमें सेहतमंद खाद्य पदार्थों का सेवन कर हम शरीर को स्वस्थ बना सकते हैं। लेकिन कोल्ड ड्रिंक जैसे खाद्य व पेय पदार्थ लोगों के जीवन को मौत की ओर ले जा रहे हैं। इसलिए लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कोल्ड ड्रिंक पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।

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