पिछले कुछ दिनों से अपने बयान को लेकर सुर्खियों में रहने वाले केन्द्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी नागपुर में दिए एक बयान के बाद फिर से चर्चा का विषय बने हुए हैं। नागपुर में उन्होंने कहा जो तीन बार फेल होता है वह मंत्री बनता है। गडकरी नागपुर में एक सभा को संबोधित कर रहे थे।

नितिन गडकरी। फोटो सोर्स:- गूगल

सभा में जब उनसे पूछा गया कि राजनीति में आने के लिए किन गुणों का होना ज़रुरी है तो उन्होंने इस पर एक चुटकी लेते हुए कहा कि राजनीति में आने के लिए किसी तरह की क्वालिटी की ज़रुरत नहीं होती। अगर आप ऐसे व्यक्ति है जो कि परीक्षा में तीन बार फेल है तो फिर आप अराम से मंत्री बन सकते हैं। गडकरी के इस बयान के बाद कयास लगाया जा रहा है कि कही गडकरी का यह बयान विपक्षी पार्टी के तरफ इशारा तो नहीं कर रहा है।

महाराष्ट्र के नागपुर में उन्होंने कहा,

“जो मेरिट में आता है, वो आईएएस और आईपीएस बनता है. जो सेकेंड क्लास पास होता है, वो चीफ इंजीनियर बनता है। लेकिन जो तीन बार फेल होता है, वो मिनिस्टर बनता है। राजनीति में आने के लिए कोई क्वालिटी की ज़रूरत नहीं होती है।”

उन्होंने आगे कहा, मुझे झूठ बोलना नहीं आता है, जो कहना है वो मुंह पर कह देता हूं। कुछ लोग झूठा बोलते हैं, झूठा हंसते हैं, उनके मन में कुछ और चल रहा होता है। आम जनता दो चीजों में अंतर नहीं समझ पाती है- चतुर और चतार। मैं आप लोगों से हमेशा झूठ नहीं बोल सकता हूं।

गडकरी के इस बयान पर अगर गौर किया जाए तो जो चीजें बाहर निकल कर आती हैं उससे ये उन राजनेताओं की तरफ इशारा कर रहे थे जिन्हें सही से सभा को संबोधित करने में भी डर लगता है। इस जनसभा में उन्होंने एक अपने प्रधानमंत्री बनने की बातों को भी साफ कर दिया। दरअसल, उनसे पूछा गया कि लोकसभा चुनाव में किसी दल को स्पष्ट बहुमत ना मिलने की स्थिति में बीजेपी उन्हें प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार तौर पर देख रही है तो उन्होंने कहा कि मैं प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में बिल्कुल नहीं हूं।

प्रधानमंत्री बनने की न ही मेरी कोई मंशा है और न ही आरएसएस की मुझे उम्मीदवार बनाने की कोई महत्वाकांक्षा। मैं अपने पैशन के लिए जीना चाहता हूं क्योंकि आज जिस समाज में हम रह रहें हैं यहां जितने तरह के लोग हैं उतने तरह के नेता भी। मैंने राजनीति को करियर के रुप में नहीं चुना है। मैं अपने शुरुआती दिनों से ही राजनीति को समाजिक और आर्थिक सुधार का जरिया मानता हूं। आज कल की राजनीति को हम सही मायने में राजनीति नहीं कह सकते क्योंकि जिस तरह से अभी लोग एक-दूसरे को लेकर बयानबाजी कर रहें हैं वह किसी मायने में राजनीति शब्द को परिभाषित नहीं करता है।

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