खतना. एक ऐसी प्रक्रिया जिसमें पुरूषों के जननांग यानि पेनिस के अगले हिस्से की स्किन काट दी जाती है. मुस्लिम समुदाय में ये एक परंपरा मानी जाती है. लेकिन बहुत कम लोगों को इस बात की जानकारी है कि खतना जैसी दर्दनाक और अवैध प्रक्रिया लड़कियों के साथ भी की जाती है. अभी भी भारत समेत दुनिया के कई इलाकों में ऐसी प्रथा जारी है.

लेकिन इस अप्राकृतिक प्रथा के खिलाफ लंदन में एक मामला सामने आया. इस केस में कोर्ट ने 3 साल की बच्ची का खतना करने वाले शख़्स को 11 साल कैद की सज़ा सुनाई है. कोर्ट ने इस हरकत को क्रूरता की श्रेणी में रखते हुए इसे अप्राकृतिक बताया है. इसके साथ ही कोर्ट ने कहा कि ये क्रूरता बच्ची के साथ उसके घर पर ही हुई, जहां उसे सबसे ज़्यादा सुरक्षित महसूस करना चाहिए.

लंदन कोर्ट की जस्टिस फिलिपा व्हिपल ने सज़ा सुनाते हुए कहा कि ये पूरी तरह से साफ होना चाहिए कि महिलाओं का खतना भी यौन शोषण की श्रेणी में आता है.

प्रतीकात्मक तस्वीर. फोटो सोर्स – गूगल

लड़कियों के साथ इस तरह की अमानवीय परंपरा को ब्रिटेन में 30 साल पहले ही बंद किया जा चुका है.

क्या है लड़कियों का खतना?

लड़कियों के खतना करने के पीछे जो कारण बताया जाता है वो पितृसत्तात्मक समाज के चेहरे की सच्चाई उजागर करता है. इसकी वज़ह है कि लड़कियां सेक्स करते समय प्लेज़र महसूस न करें. इस क्रूर प्रथा का पालन करने वाले लोगों का मानना है कि ऐसा करने से लड़कियों के मन में सेक्स को लेकर किसी भी तरह की इच्छाएं पैदा नहीं होगी. क्योंकि हमारे समाज में सेक्स को मज़े के रूप में करने का अधिकार केवल पुरूषों के पास है.

प्रतीकात्मक तस्वीर. फोटो सोर्स – गूगल

लड़कियों के खतने पर WHO की रिपोर्टः

विश्व स्वास्थय संगठन का साफ तौर पर कहना कि महिलाओं का खतना उनके लिए बेहद खतरनाक है. इससे लड़कियों और औरतों की सेहत पर बहुत फर्क पड़ता है. खतने के समय महिलाओं के शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को हटा दिया जाता है. जिससे महिलाओं के शरीर पर बुरा असर पड़ता है. खतने की वजह से महिलाओं के शरीर में कई बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है.

भारत में भी ये प्रथा होती है. 9 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने इसके बैन को लेकर सवाल उठाए थे, जिसमें कहा गया था कि औरत का शरीर किसी धर्म का मामला कैसे हो सकता है? चीफ जस्टिसों की बेंच ने कहा. “यह धार्मिक और सामाजिक प्रथा POCSO (प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रेन फ्रॉम सेक्शुअल ऑफेंस) एक्ट के तहत आता है, जो 18 साल से कम उम्र की लड़कियों के प्राइवेट पार्ट को छूने का मामला होता है.”

प्रतीकात्मक तस्वीर. फोटो सोर्स – गूगल

जिसके बाद ये उम्मीद की गई कि पूरी दुनिया में हो रही इस कुप्रथा पर भारत में भी बैन लगाया जा सकेगा.

 

इस खबर के कुछ इनपुट्स न्यूज़18 से लिए गए हैं

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