रक्षा मंत्रालय देश की राजधानी दिल्ली को सुरक्षित रखने के लिए एक ऐसा अभेद्द सुरक्षा कवच बनाने की तैयारी कर रहा है जिसे दुश्मन द्वारा किसी भी तरीके से भेदा न जा सके. इसके लिए रक्षा मंत्रालय ने एक सुरक्षा प्लान तैयार किया है. जिसके तहत राजधानी दिल्ली को पांच लेयर की सुरक्षा कवच से लैस किया जाएगा. पाँच लेयर के सुरक्षा कवच से दिल्ली एक अभेद्द किले की तरह होगी जो हर परिस्थिति में किसी भी तरह के हवाई हमले से सुरक्षित रहेगी.

पिछले कई सालों से भारत सरकार, रक्षा मंत्रालय के साथ मिलकर राजधानी दिल्ली को सुरक्षित रखने के लिए एक फुल प्रूफ प्लान बनाने पर काम कर रहे थे. माना जाता है कि युद्ध के हालातों में सेना द्वारा सबसे पहले दुश्मन देशों की राजधानियों को ही निशाना बनाया जाता है ताकि, सारी सैन्य मशीनरी को एक झटके में ठप्प किया जा सके. चीन और पाकिस्तान जैसे देशों से घिरे होने के कारण दिल्ली को सुरक्षित रखना भारत के लिए और भी जरूरी हो जाता है.

कहा तो यहाँ तक जा रहा है कि दिल्ली की सुरक्षा में तैनात होनी वाली यह प्रणाली विश्व की सबसे बेहतरीन सुरक्षा प्रणालियों में से एक होगी. जो राजधानी को दुश्मनों के लड़ाकू विमान, मिसाइलों या ड्रोन हमले से सुरक्षा प्रदान करेगा.

राजधानी दिल्ली को अभेद्द बनाने के लिए लगातार रूस, इज़रायल और अमेरिका जैसे देशों के साथ मिल कर इस दिशा में काम कर रहा है. साल 2018 के अक्टूबर महीने में भारत ने रूस से एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम का सौदा किया था. वहीं भारतीय रक्षा अनुसंधान डीआरडीओ भी इज़रायल के साथ मिलकर बराक-8 एयर मिसाइल सिस्टम पर काम कर रहा है. इसी क्रम में अब भारत, अमेरिका से नैशनल अडवांस्ड सरफेस टु एयर मिसाइल सिस्टम- II (NASAMS-II) खरीदने जा रहा है.

NASAMS-2 भारत-अमेरिका समझौता

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि अमेरिका के अपने विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम (जिसकी लगभग 1 बिलियन डॉलर की लागत है) के तहत NASAMS-2 की बिक्री के लिए ‘स्वीकृति का पत्र’ का अंतिम सौदा जुलाई-अगस्त तक भारत को भेजने की संभावना है.

एडवांस्ड सरफेस टु एयर मिसाइल सिस्टम- NASAMS-II , फोटो सोर्स – गूगल

रक्षा मंत्रालय के आधिकारिक सूत्रों के अनुसार,

‘इस मिसाइलों की तैनाती के लिए दिल्ली के आसपास की लोकेशन फाइनल कर ली गयी थी. जिसके लिए जमीन अधिग्रहण की स्वीकृति रक्षा मंत्रालय ने पहले ही दे दी थी. इसके बाद ही भारत ने NASAMS 2 सौदे के लिए अमेरिका को औपचारिक पत्र जारी किया था.’

सूत्रों के मुताबिक अमेरिका की तरफ से स्वीकृति पत्र आ जाने के बाद ये समझौता फ़ाइनल हो जाएगा. जिसके बाद आने वाले दो से चार सालों के अंदर NASAMS-2 मिसाइलों की डिलीवरी भारत को कर दी जाएगी.

NASAMS-2 मिसाइल सिस्टम

NASAMS-2 मिसाइल सिस्टम छोटे हमलों से बचाव करने में बहुत कारगर साबित होता है. NASAMS-2 सुरक्षा प्रणाली बड़ी-बड़ी इमारतों और शहर के बीच से छुप कर किए जाने वाले हमलों को बेअसर करने में सक्षम है. ये सुरक्षा प्रणाली  स्टिंगर्स, गन सिस्टम और AMRAAM जैसी घातक मिसाइलों से लैस हैं. NASAMS-2 को विशेष रूप से दिल्ली को मिसाइल हमले से सुरक्षित रखने के लिए खरीदा जा रहा है.

अमेरिका का सरफेस टु एयर मिसाइल सिस्टम NASAMS-II, फोटो सोर्स – गूगल

आपको बताते चलें कि इससे पहले भारत, रूस के साथ लगभग 40,000 करोड़ रुपये की डील कर चुका है. इस डील के तहत एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की पांच स्क्वॉड्रन 2010 से 2023 के बीच भारत को मिलेंगे. भारत ने रूस के साथ एस-400 मिसाइलों का समझौता अमरीकी प्रतिबन्ध कानून CAATSA के खिलाफ जाकर किया था. जिसके बाद भारत को कुछ समय के लिए अमेरिका की नाराजगी भी झेलनी पड़ी थी. क्योंकि अमेरिका अपना एयर डिफेंस सिस्टम THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) भारत को बेचना चाहता था. जिसके लिए अमेरिका अभी भी भारत पर दबाव बना रहा है. हालांकि, भारत ने अब तक अमेरिका की THAAD (टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस) सुरक्षा प्रणाली को खरीदने में कोई रुचि नहीं दिखाई है.

अमेरिकी THAAD की रूसी एस-400 के साथ तुलना करने पर एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि अमेरिकी मिसाइल THAAD, रूसी एस-400 से तुलना करने योग्य नहीं है. रूसी एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम हमारी सभी आवश्यकताओं को पूरा करता है. एस-400 मिसाइल प्रणाली 380 किमी की सीमा के अंदर आने वाले किसी भी लड़ाकू विमान, जासूसी विमान, मिसाइल और ड्रोन का पता लगाकर, उन्हें नष्ट करने में पूरी तरह से सक्षम है.

कुछ ऐसी होगी दिल्ली की पाँच लेयर वाली अभेद्द सुरक्षा प्रणाली 

 1- राजधानी का सबसे बाहरी सुरक्षा की पहला कवच बनेगी पृथ्वी मिसाइल

राजधानी दिल्ली की सुरक्षा में सबसे पहले एडवांस्ड एयर डिफेंस (एएडी) और पृथ्वी एयर डिफेंस इंटरसेप्टर (पीएडी) मिसाइलों की तैनाती की जाएगी. ये दोनों मिलकर 80 से 100 किमी की दूरी तक आसमान से आने वाली दुश्मन मिसाइलों को बेअसर करेगी.

फोटो सोर्स- गूगल

2- दिल्ली का दूसरा सुरक्षा कवच बनेगा रूस का S-400 मिसाइस सिस्टम

एस-400 मिसाइल सिस्टम की रेंज 120 से 380 किमी तक है. जो 380 किमी की सीमा के अंदर आने वाले किसी भी दुश्मन मिसाइल, विमान, ड्रोन को इंटरसेप्ट कर हवा में ही मार गिराने में सक्षम है.

रूस का एस – 400 , फोटो सोर्स – गूगल

3- तीसरे लेयर की सुरक्षा में तैनात होगी बराक-8 मिसाइल सिस्टम

बराक-8 मिसाइल सिस्टम को विकसित करने में DRDO इजरायल के साथ मिलकर काम कर रहा है. इज़रायली बराक-8 मिसाइल सिस्टम एक मध्यम और लंबी दूरी का एंटी एयर मिसाइल सिस्टम होगा. जो 70 से 100 किमी के अंदर होने वाले दुश्मनों की हर दुस्साहस को हवा में ही दफना देगा.

बराक – 8 , फोटो सोर्स – गूगल
4- आकाश मिसाइल सिस्टम करेगा दिल्ली के आसमान की निगेहबानी

देश में निर्मित आकाश डिफेंस मिसाइल सिस्टम की रेंज 25 किमी है.

भारत का ‘आकाश एयर डिफेंस सिस्टम’ , फोटो सोर्स – गूगल

5- अमेरिकी NASAMS-2 मिसाइल सिस्टम के हाथ में होगी दिल्ली की भीतरी सुरक्षा

दिल्ली की सुरक्षा कवच में सबसे भीतरी परत NASAMS-2 मिसाइल सिस्टम की होगी. ये एक तरह का स्टिंगर मिसाइल सिस्टम है, जिसमें सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल, बंदूक प्रणाली के साथ-साथ M-120C-7 AMRAAM मिसाइलों का एक सयुक्त संयोजन होगा. NASAMS-2 मिसाइल सिस्टम तीन-आयामी सेंटिनल रेडार नेटवर्क प्रणाली पर आधारित होता है. यह नेटवर्क प्रणाली इमारतों के बीच से दुशमन टारगेट को ढूंढकर मार गिराने में सक्षम है.

NASAMS-2, फोटो सोर्स – गूगल

बताया जा रहा है कि NASAMS-2 मिसाइल सिस्टम राजधानी दिल्ली को अमेरिका में हुये 9/11 जैसे हवाई हमलों से बचाने में पूरी तरह सक्षम है.

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