हर साल एडमीशन के वक़्त जब बात कट ऑफ लिस्ट पर आती है तो, दिल्ली यूनिवर्सिटी 100 प्रतिशत मार्क्स से नीचे बात नहीं करती है. लेकिन, क्या यही दिल्ली युनिवर्सिटी बराबर में छात्रों को उनका 100 प्रतिशत हक़ भी दे रही है?

एक RTI रिपोर्ट का तो कुछ और ही कहना है. दरअसल, दिल्ली युनिवर्सिटी में लॉ पढ़ रहे छात्र प्रशांत कुमार ने RTI दाखिल कर जवाब मांगा कि यूनिवर्सिटी ने छात्रों से मिले रिफंडेबल मनी का इस्तेमाल कहां किया है?

RTI से पता चला कि पिछले तीन सालों में दिल्ली युनिवर्सिटी ने छात्रों से 2.8 करोड़ रिफंडेबल फीस ली. जिनमें से 2.4 करोड़ का कुछ अता-पता ही नहीं है.

एडमीशन वक़्त छात्रों से लाइब्रेरी सिक्योरिटी एंड साइंस कॉशन मनी के नाम पर कुछ पैसा लिया जाता है. जिसे ग्रेजुएशन करने के बाद लौटा दिया जाता है. बचे हुए पैसे को वाइस-चांसलर स्टुडेंट फंड में डाल दिया जाता है और बाद में उस पैसे का इस्तेमाल गरीब छात्रों की मदद के लिए किया जाता है.

लेकिन, पिछले तीन सालों में जो 2.4 करोड़ रुपये दिल्ली युनिवर्सिटी के पास बचे हैं, उनमें से एक रुपया भी वाइस-चांसलर स्टुडेंट फंड में नहीं डाला गया. अब सवाल ये है कि अगर वो पैसा छात्रों के पास भी नहीं गया और स्टुडेंट फंड में भी नहीं तो, इतना पैसा गया कहाँ?

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यूनिवर्सिटी रिफंडेबल मनी जमा तो ऑनलाइन तरीके से कर लेती है लेकिन, वापिस करते हुए छात्रों को युनिवर्सिटी कैंपस में आना पड़ता है. RTI कार्यकर्ता प्रशांत कुमार ने युनिवर्सिटी के इस कानून पर भी सवाल उठाया। प्रशांत का कहना है कि 1500 रूपये लेने के लिए छात्र दूसरे राज्यों से युनिवर्सिटी कैसे आएंगे? युनिवर्सिटी को रिफंडेबल मनी वापिस भी ऑनलाइन तरीके से ही कर देनी चाहिए।

फोटो क्रेडिट - TOI
फोटो क्रेडिट – TOI

प्रशांत कुमार ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि उन्होंने युनिवर्सिटी के वाइस-चांसलर योगेश त्यागी से बात भी की. त्यागी ने जवाब दिया कि वो जल्द ही मामले की जाँच करेंगे।

जो पैसा वाइस-चांसलर स्टुडेंट फंड में जमा होता है, उसे चार तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है. पहला, उन छात्रों के लिए जो गरीबी रेखा से नीचे आते हैं. दूसरा, उन छात्रों के लिए जो शारीरिक रूप से विकलांग/दिव्यांग हैं. इसके अलावा कुछ जरूरतमंद छात्रों की फीस भर दी जाती है. यदि फिर भी पैसे बच जाते हैं तो, जिन छात्रों की युनिवर्सिटी में पढ़ाई के दौरान मौत हो जाती है, उनके घर वालों को फीस वापिस दे दी जाती है.

RTI में बताया गया कि साल 2016 से 2019 के बीच किसी भी गरीब छात्र, दिव्यांग छात्र को सहायता या अन्य किसी भी तरीके का मुआवजा नहीं मिला है.

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