बाहदुर शाह ज़फर के वंशज चाहते हैं, भगवान राम के दर्शन करना. दरअसल, मुग़ल साम्राज्य के अंतिम शासक बहादुर शाह जफर के वंशज याकूब हबीबुद्दीन तूसी ने अयोध्या में राम मंदिर के निर्माण की इच्छा जताई है. वह चाहते हैं कि राम मंदिर का निर्माण हो और अगर ऐसा हुआ तो, दर्शन करने भी तो आयेंगे ही ना. बस इसी वजह से हमने कहा कि वह प्रभु श्री राम के दर्शन करना चाहते हैं. एक और बात जान लीजिये कि सिर्फ हबीबुद्दीन ही नहीं बल्कि, उनका पूरा परिवार चाहता है कि रामलला का मंदिर बने.

याकूब हबीबुद्दीन तूसी ने कहा कि अगर राम मंदिर बनता है तो मंदिर निर्माण में पहली ईंट उनके परिवार वाले रखना चाहेंगे. कट्टर हिन्दुओं के लिए एक और खुशखबरी है. वो ये है कि उन्होंने यह भी ऐलान किया है कि मंदिर की नींव के लिए वह एक सोने का खंभा भी दान करेंगे. सोने पे सुहागा वाली बात ये है कि विवादित जन्मभूमि के मामले में याकूब हबीबुद्दीन तूसी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी दायर की थी, जिसमें उन्होंने कोर्ट से खुद को अयोध्या राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद केस का पक्षकार बनाने की मांग की थी. फिलहाल उनकी इस याचिका को कोर्ट ने स्वीकार नहीं किया है.

याकूब हबीबुद्दीन तूसी /फोटो सोर्स-गूगल

तूसी ने अपने पूर्वजों का इतिहास बताते हुए कहा कि 1529 में बाबर ने मस्जिद का निर्माण इसलिए किया था ताकि उनके सैनिक वहां नमाज़ पढ़ सकें. उन्होंने इस बहस में पड़ने से खुद को दूर कर लिया कि वहां पहले मंदिर था या नहीं. उन्होंने हिन्दुओं का पक्ष रखते हुए कहा कि अगर हिन्दू उस स्थान को रामजन्मभूमि मानते हैं तो मैं एक सच्चे मुसलमान के नाते उनकी भावनाओं का सम्मान करूँगा.

लो, बस और क्या चाहिए? यही तो हैं अच्छे दिन

मीडिया से बात करते हुए उन्होंने बताया कि राम मंदिर को लेकर विवाद चल रहा है लेकिन, मालिकाना हक़ के कागजात अभी किसी भी पक्ष के पास नहीं है. ऐसी स्थिति में वह मुग़ल वंश के वंशज होने के नाते अपनी मांग रखना चाहते हैं. वह चाहते हैं कि कोर्ट उनका पक्ष केवल एक बार के लिए सुन ले. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भले ही उनके पास ज़मीन के कागज़ात नही हैं लेकिन, मुग़ल वंश के वंशज होने के नाते वह ज़मीन के मालिकाना हक के अधिकारी कहे जा सकते हैं. इसके अलावा उन्होंने यह भी कहा कि अगर यह ज़मीन उन्हें मिलती है तो वह इसे मंदिर निर्माण के लिए दान करेंगे. अब यह तो भविष्य में ही पता चलेगा कि ऐसा हो भी पाता है या याक़ूब भाई लास्ट में यू-टर्न ले लेंगे.

यह पूरा विवाद 2.77 एकड़ जमीन का है. सुप्रीम कोर्ट बीते कई सालों से इस मामले पर सुनवाई कर रहा है. अब देखना होगा कि इस मामले का इस बार भी नतीजा कुछ निकलता है या याकूब हबीबुद्दीन साहब को नतीजों के इंतज़ार में ईंट को तिजोरी और सोने के खंभे को बैंक के लॉकर में रखना पड़ता है. भगवान राम जल्दी अपने घर का फैसला करवाएँ.