ख़बर पॉज़िटिव और शानदार है। साथ ही हैरान करने वाली भी। ऐसा इसलिए कह रहा हूं क्योंकि काम तो अच्छा हुआ है लेकिन, जिसने किया है उसके किए को हज़म करना मुश्किल है। असल में इस अच्छे काम को करने वाला एक सरकारी कर्मचारी है और वो भी एक डीएम। अब आप ही बताइए एक सरकारी नौकर वो भी डीएम जैसे बड़े पद का मालिक, भला कोई अच्छा काम कैसे कर सकता है? क्योंकि समाज की मानसिकता अनुसार तो सरकारी कर्मचारी बना ही जाता है जनता पर ज़ुल्म करने के लिए, परेशान करने के लिए, अपना काम भले ही ईमानदारी से न हो लेकिन दूसरों को कानून और रूल का ईमानदारी से पाठ पढ़ाएंगे। लेकिन इसके उलट उमरिया में पोस्टेड डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर स्वरोचिष सोमवंशी ने जानिए क्या किया है…

क्या हुआ है?

मध्य-प्रदेश के एक डीएम ख़बरों में छाए हुए हैं। इन्होंने इंसानियत का काम किया है। मुद्दा ये है कि इन दिनों सूरज देवता के प्रकोप से कोई अछूता नहीं। चाहे वह देश के किसी भी राज्य या जगह का हाल हो। जहां एक ओर गर्मी ने सारे रिकॉर्ड तोड़ रखे हैं, वहीं देश के कुछ चुनिन्दा डीएम आजकल नौकरशाही रिवाज के बिल्कुल उलट लगता है सच में जनता की सेवा जुटे हुए है। इसी गर्मी के दिनों में भी लोग काम के लिए डीएम ऑफिस आते-जाते हैं, जिसमें लोगों को बड़ी परेशानी होती थी। वहीं उमरिया के पोषण पुनर्वास केंद्र (NRC) भी मानो आग से तप रहा था। इस एनआरसी के बारे में जान लीजिए। एनआरसी वो जगह है जहां शारीरिक रूप से कमजोर और पोषण की कमी से जूझ रहे नवजात बच्चों का इलाज़ हो रहा है। इन सभी को गर्मी से परेशान और खास कर कुपोषित बच्चों को इस गर्मी में और बीमार होने का डर डीएम साहब को सताने लगा। इसलिए उन्होंने पहले तो यहाँ एसी लगाने का ऑर्डर जारी किया। लेकिन जब इन्हें खुद एहसास हो गया कि सरकारी काम कितनी स्पीड से होता है। तो इन्होंने एक नायाब तरीक़ा निकाला। डीएम स्वरोचिष सोमवंशी ने किया ये कि अपने ही ऑफिस का एसी निकलवाकर एनआरसी में लगवा दिया। वाह! ये हुई न बात।

अब इस उत्तम फैसले से हुआ ये कि एनआरसी में इलाज़ हो रहे कुपोषित बच्चों और उनके साथ उनके परिजनों को भी सहूलियत हो गई। उमरिया के डीएम के इस कदम की काफी सराहना हो रही है और होना भी चाहिए आख़िर काम ही ऐसा किया है इन्होंने। चलिये अब इस पर डीएम साहब के विचार जान लेते हुए जो उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा-

“ये हालात को देखते हुए लिया गया फैसला था। NRC बिल्डिंग के अंदर भी काफी गर्मी थी। ऐसे में बच्चों की परेशानी को देखते हुए हम पहले से ही एसी के इंतजाम में जुटे थे लेकिन इसे फौरन बिल्डिंग में लगाना था। ब्लॉक में कुल 4 NRC हैं और हमने चारों में एसी लगवा दिए हैं”

इन डीएम साहब के बारे में एक और चीज़ जान लीजिए कि यह युवा कलेक्टर अपनी कार की भी एसी नहीं चला रहे हैं। इसके जरिए वह बताना चाहते हैं कि यदि आम जनता गर्मी सह सकती है तो वह उससे अलग नहीं हैं। अगर सच में इन डीएम की यही सोच है तब तो देश के अफसरशाही रवैये में बदलाव की उम्मीद की जा सकती है और कहते भी तो है कि ‘हर कोई एक जैसा नहीं होता’। तो अपवाद ही सही लेकिन ऐसे अफसर आज भी मौजूद है जिसे जानने के बाद अच्छा लगता है।

ख़ैर, अब ये तो पक्का है कि अब यहां भर्ती महिलाओं और बच्चों को इस फैसले से काफी राहत मिलने वाली है। चलिए अब आपको ऐसे ही एक और डीएम से मिलवाते है।

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डीएम मन्नान अख़्तर पुलिस के उच्च अधिकारियों के साथ/,फोटो सोर्स- गूगल

ये जनाब देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश के जालौन के डीएम है। नाम इनका मन्नान अख्तर है। इन्हें सरकार की ओर से सम्मानित भी किया गया है। क्योंकि इन्होंने जो किया है वो कबीले तारीफ़ है। असल में इन्होंने किया ये है कि बुंदेलखंड में सूखे की समस्या से निबटने के लिए ज़िले के ज्यादातर चेक डैम मनरेगा के ज़रिए रिपेयर करवा लिए है। जिससे सूखे का वो इलाज हो गया है जो करोड़ों के पैकेज से भी मुमकिन नहीं था। आख़िर में हम बस यही कह सकते हैं कि देश को आगे ले जाने में हमे इन दोनों जैसे और अधिकारियों की ज़रूरत है। न कि भ्रष्ट और अपराधों मे लिप्त नेताओं की। जो कहने को जो भी कहे लेकिन देश का नहीं सिर्फ अपना ही विकास करते है।

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