अगर आपको याद हो, 59 चीनी ऐप को जब बंद किया गया था तो उस वक्त राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर बंद किया गया था। इसमें कई सारे ऐप्स थे। फिलहाल दो मिनट के दिमाग से टिकटॉक को निकाल कर CAM SCANNER पर टिकाइये। मालूम हो कि ये भी एक चीनी ऐप है। अगर आप जानते हैं तो ठीक है, नहीं जानते हैं तो जान लीजिए.. इसे लोग मोबाइल में कागजात को स्कैन करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। आसान प्रक्रिया है, किसी भी दस्तावेज का फोटो क्लिक किया और ऐप को ओपन किया और लगे हाथ स्कैन कर लिए।

जब चीनी ऐप बंद हुआ था तो इसमें इसका भी नाम था। आप भी सोच रहे होंगे कि यह ऐप क्या ही बिगाड़ता होगा!
खैर…मुक्तेश चंदर दिल्ली पुलिस के विशेष आयुक्त हैं और साइबर क्राइम के विशेषज्ञ भी हैं। बीबीसी में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार उन्होंने बताया है कि भले ही कोई ऐप सिर्फ बातचीत के लिए बनाया गया हो लेकिन वो फोन में मौजूद सभी जानकारियां अपने उस सर्वर को भेजता रहेगा जिस देश में उसे संचालित किया जाता है। लेकिन सवाल उठता है कि दस्तावेजों को स्कैन करने वाला ऐप आख़िर खतरा कैसे हो सकता है ? इस पर वो कहते हैं

अगर कोई अपनी छुट्टी की अर्जी या बच्चों के किताबों के पन्नों को स्कैन करता है तो उसकी एक प्रति सर्वर में अपने आप चली जाती है। मुक्तेश कहते हैं कि इससे कोई खतरा भले न हो लेकिन जैसे ही कोई सरकारी दस्तावेज़ को स्कैन करता है मिसाल के तौर पर वित्त मंत्रालय का कोई दस्तावेज़ जिसमें आगामी वित्तीय वर्ष में देश किन चीजों पर ज्यादा ज़ोर देगा – ये दस्तावेज जैसे ही स्कैन करने वाले एप पर स्कैन होता है तो उसकी एक प्रति उस देश तक भी चली जाती है जहां इसका सर्वर है। वो कहते हैं कि ये राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला है।

source: google

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अब समझ सकते हैं कि ये ऐप आपके लिए कैसे खतरनाक साबित हो सकता है। यानी आपकी जो दस्तावेज है, हो सकता है कि वो गलत कामों के लिए भी इस्तेमाल हो जाए। क्योंकि साइबर सुरक्षा के विशेषज्ञ रक्षित टंडन जो कि इंटरनेट मोबाइल असोसिएशन ऑफ़ इंडिया के साइबर मामलों के सलाहकार भी हैं, वो कहते हैं कि आप अपने मोबाइल फोन से अगर हर सोमवार को दवा मंगवाते हैं, या हर शुक्रवार को बाहर से ऑनलाइन खाना ऑर्डर करते हैं या घर के रोजमर्रा का सामान मंगवाते हैं, तो इन सारी जानकारियों की प्रोफाइलिंग होती है। रक्षित टंडन कहते हैं, “अब आपके मोबाइल पर हो रहे इस तरह के काम किसी से छुपे नहीं हैं। अब ये जानकारी बेची जाती हैं और आप देखेंगे कि सोमवार को ही दवा कंपनियों के मेसेज आपके पास आने लगेंगे जो आपको भारी डिस्काउंट का लोभ दे रहे होंगे। उसी तरह शुक्रवार को आपके पास ऑनलाइन खाने की डिलीवरी करने वाले ऑफ़र आएंगे। ये सूचनाओं का बाजार है। इसकी कीमत भी है और अच्छी खासी कीमत है।”

माने इससे आप अंदाजा लगा सकते हैं कि किस तरह से आपकी गतिविधियों पर ध्यान रखा जा सकता है। दरअसल डेटा माइनिंग और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक बड़ा व्यापार हैं जो ऐप और वेबसाइट के माध्यम से चलते हैं और ये व्यापार लोगों से सम्बंधित निजी सूचनाओं को बेचने वाला व्यापार है। यानी न सिर्फ सरकारी गतिविधियों पर बल्कि आम व्यक्ति की गतिविधियों पर भी ध्यान रखा जा सकता है। इसलिए अगर सरकार कह रही है कि ये ऐप देश के लिए और हमारी निजी सुरक्षा के लिए भी खतरनाक है तो जरूरत है कि इस पर हम और आप भी ध्यान दें।

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