चुनाव आयोग ने देश भर में होने वाले चुनाव की तारीख की घोषणा कर दी है। देश भर में कुल 7 चरणों में मतदान होने हैं। चुनाव ने सभी लोकसभा सीट के लिए तारीखों की घोषणा रविवार शाम को कर दी है। इसके साथ ही पिछले दिनों चुनाव आयोग ने सभी राजनीतिक दलों को सेना के नाम पर वोट बैंक की राजनीति करने से बचने का निर्देश जारी किया है। चुनाव आयोग ने साफ शब्दों में किसी भी पार्टी के नेताओं को अपने विज्ञापन में सेना या उसके किसी भी काम को इस्तेमाल करने से साफ मना कर दिया है।

दरअसल, एयर स्ट्राइक के बाद देश की सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने मुताबिक सेना के नाम पर वोट बैंक की राजनीति करने लगे थे। हर जगह नेताओं के फोटो के साथ सेना के वीर जवानों के फोटो और नाम वाले पोस्टर नजर आ रहे थे। इन पोस्टरों और पेंपलेट के जरिये सभी राजनीतिक दल के नेता अपनी पार्टी के पक्ष में मतदान के लिए गुहार लगा रहा थे। जिसके  बाद चुनाव आयोग ने यह फरमान जारी किया कि कोई भी पार्टी सेना के नाम या फोटो का इस्तेमाल करके वोट मांगने से बचें।

रक्षा मंत्रालय के सुझाव के बाद लिया गया यह फैसला

जानकारी के लिए आपको बता दें कि रक्षा मंत्रालय ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर कहा था कि सैनिकों की तस्वीरों को कई राजनीतिक पार्टियां उनके बड़े नेता और कार्यकर्ता अपने विज्ञापन में इस्तेमाल कर रहे हैं। यह उनके इलेक्शन कैंपन का हिस्सा है, जो बात सही नहीं है। इसी वजह से रक्षा मंत्रालय ने सेना पर हो रहे राजनीतिकरण पर रोक लगाने का सुझाव दिया था।

पहले भी सेना के जवान इस मामले में दे चुके हैं बयान

यह पहली बार नहीं है जब रक्षा मंत्रालय द्वारा सेना के राजनीतिकरण पर सवाल उठाया गया है। इससे पहले भी सेना के बड़े अधिकारियों द्वारा सेना के नाम पर वोटबैंक की राजनीति किए जाने पर सवाल खड़ा किया जाता रहा है। इंडियन नेवी चीफ़, एडमिरल एल. रामदास ने भी एयर स्ट्राइक के राजनीतिकरण पर इलेक्शन कमीशन को पत्र लिख कर अपनी चिंता जताई थी।

सेना और सरकार को आपस में मर्ज़ किया गया

एयर स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक भाषण में कहा, “अब यह तय हो चुका है कि हमारे सैनिक उन लोगों को मुंहतोड़ जवाब देंगे जो राष्ट्र की शांति और उन्नति के माहौल को नष्ट करने का प्रयास करेंगे।”

इसके बाद ऐसा प्रयास किया गया कि सेना और सरकार को साथ-साथ दिखाया जा सके। इसके बाद यह दिखाने का प्रयास किया गया कि मोदी सरकार सेना के साथ है जबकि सेना मोदी सरकार के साथ है। इसका अर्थ यह हुआ कि जो मोदी सरकार के साथ है वो सेना के साथ है, इसके अलावा जो मोदी सरकार के ख़िलाफ़ है वह सेना के ख़िलाफ़ है और जो सेना के ख़िलाफ़ है वो देशद्रोही है।

इसमें कोई दो राय नहीं कि एयर स्ट्राइक के बाद भाजपा सरकार ने एयर स्ट्राइक को अपने फायदे में भुना लिया है। हर चौक-चौराहे पर सेना के जवानों के नाम पर वोट मांगते पोस्टर को हर जगह देखे जा सकते हैं। लेकिन चुनाव आयोग के फरमान जारी होने और आचार संहिता लागू होने के बाद अब राजनीतिक दलों द्वारा सेना के नाम पर वोट बैंक की राजनीति कर पाना मुश्किल हो जाएगा।

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