बदलते हुए वक्त के अनुसार युद्ध के तरीके भी बदल रहे हैं. जहां ऐसे हथियार विकसित किए जा रहे हैं जिसे एक जवान सुरक्षित स्थान में बैठकर एक डिवाइस की मदद से हथियारों को कंट्रोल कर अपने टार्गेट पर हमला कर सकता है. ड्रोन एक ऐसी ही तकनीकी है जिस पर दुनिया भर के देशों की सेनाओं की निर्भरता दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है. ड्रोन हमला करने के साथ-साथ दुश्मन की निगरानी करने, जासूसी करने के काम भी आता है. विश्व की सबसे शक्तिशाली अमेरिकी सेना अमूमन आंतकी संगठनों पर हमले के लिए अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) यानि ड्रोन का इस्तेमाल करती है. इसी तर्ज पर भारतीय कंपनी रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने ऐसे कई ड्रोन्स बनाए हैं जिनका इस्तेमाल मौजूदा समय में भारतीय सेनाएं कर रही हैं.

प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) कर्नाटक में एक ऐसे ही अनमैन्ड एरियल व्हीकल (UAV) ड्रोन रुस्तम-2 का परीक्षण कर रहा था. ये परीक्षण सुबह 6 बजे चित्रदुर्ग जिले के जोडीचिकेनहल्ली इलाके में किया गया था. जहां परीक्षण के दौरान उड़ान भर रहा ड्रोन रुस्तम-2 क्रैश कर गया. रुस्तम-2 विमान को तापस BH-201 नाम दिया गया था.

 क्रैश हुआ ड्रोन रुस्तम-2, फोटो सोर्स - गूगल
क्रैश हुआ ड्रोन रुस्तम-2,फोटो सोर्स -गूगल

ये भी पढ़े : अब भारतीय सेना ‘स्वदेशी हथियारों’ से पाकिस्तान को रोकने की तैयारी कर रही है

इससे पहले 2 फरवरी 2018 को DRDO, रुस्तम-2 का एक सफल परीक्षण कर चुका है. इस परीक्षण के दौरान रुस्तम-2 ने सफलतापूर्वक उड़ान भी भरी थी. पूरी तरह स्वदेश तकनीकी से विकसित रुस्तम-2 को DRDO के एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट इस्टैब्लिशमेंट (ADE) ने HAL के साथ मिलकर बनाया है. रुस्तम-2 ड्रोन दुश्मन की निगरानी करने, जासूसी करने, दुश्मन ठिकानों की फोटो खींच कर भेजने के साथ-साथ दुश्मन पर हमला करने में भी सक्षम है.

DRDO द्वारा विकसित किया गया रुस्तम -2 , फोटो सोर्स - गूगल
DRDO द्वारा विकसित किया गया रुस्तम -2 ,फोटो सोर्स – गूगल

रुस्तम-2 के पहले सफल परीक्षण के बाद DRDO कहा था, साल 2020 तक ये रुस्तम-2 ड्रोन्स सेना में शामिल होने के लिए पूरी तरह तैयार हो जाएंगे. रुस्तम-2 को अमेरिकी ड्रोन प्रिडेटर की तर्ज पर ही बनाया गया है.

रुस्तम 2 की खासियतें

  • 9.5 मीटर लंबे रुस्तम 2 का वजन 2 टन के करीब है.
  • रुस्तम-2 के पंखे करीब 21 मीटर लंबे हैं. ये 224 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से उड़ान भर सकते हैं.
  • रुस्तम-2 सिंथेटिक अपर्चर रडार, इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस सिस्टम और सिचुएशनल अवेयरनेस पेलोड के साथ-साथ और कई तरह के पेलोड ले जाने में सक्षम है.
  • रुस्तम-2, 26 हजार फीट से लेकर 35 हजार फीट की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. एक बार में रुस्तम-2 लगभग 1000 किमी का हवाई सफर कर सकता है.
  • रुस्तम-2 पनडुब्बी से उड़ान भरने में भी सक्षम है
  • रुस्तम-2 आधुनिक कैमरे से लैस है, ये कैमरा 250 किलोमीटर तक की रेंज की सारी तस्वीरें ले सकता है.
  • रुस्तम-2 की सबसे खास बात है, इसका उड़ान के दौरान ज्यादा आवाज न करना. जिसकी वजह से रुस्तम-2 दुश्मन की नजर में आए बिना हमले को अंजाम दे सकता है.
रुस्तम -2, फोटो सोर्स - गूगल
रुस्तम -2, फोटो सोर्स – गूगल

रुस्तम-2 का नाम साइंटिस्ट रुस्तम दमानिया के नाम पर रखा गया है. रुस्तम-2 का निर्माण DRDO यूएवी के 1500 करोड़ रुपए के प्रोजेक्ट के तहत कर रहा है. भारतीय वायुसेना और थलसेना के साथ नौसेना की जरूरतों को ध्यान में रख कर रुस्तम-2 का निर्माण किया गया है.