भारतीय सेना को लगातार अत्याधुनिक हथियारों और तकनीकी से लैस किया जा है. भारत अत्याधुनिक हथियारों के लिए दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने की दिशा में बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है. इसी क्रम में बीते 7 जुलाई को भारत ने स्वदेशी तकनीकी से विकसित की गई एंटी गाइडेड मिसाइल नाग के तीन सफल परीक्षण कर नया कीर्तिमान रच दिया है. सेना और रक्षा अनुसंधान और विकास सगठन (DRDO) द्वारा सयुक्त रूप से किए गए तीनों टेस्ट सफल रहें.

नाग मिसाइल, फोटो सोर्स – गूगल

डीआरडीओ के अधिकारियों ने बताया, “रविवार को तीन एंटी गाइडेड मिसाइल ‘नाग’ का परीक्षण दिन और रात दोनों समय में किया गया. सभी टेस्ट सफल रहे.”

रात में नाग मिसाइल टेस्ट करने की वजह ये थी कि डीआरडीओ के वैज्ञानिक ये देखना चाहते थे कि क्या रात के अंधेरे में नाग मिसाइल अपने टार्गेट पर सटीक निशाना लगा सकती है या नहीं. अंधेरे में भी टार्गेट पर अचूक निशाना लगाने में सक्षम नाग मिसाइल को थर्मल टार्गेट सिस्टम (TTS) तकनीकी से लैस किया गया है. अब आपको थर्मल टार्गेट सिस्टम (टीटीएस) तकनीक के बार में संझेप में जानकरी दे देते हैं.

थर्मल टार्गेट सिस्टम (TTS)

इस तकनीक की मदद से मिसाइल को रात के घने अंधेरे में भी दुश्मन टार्गेट पर निशाना लगाने में मदद मिलती है. टीटीएस की मदद से दुश्मन के ऑपरेशनल टैंक की थर्मल इमेज क्रिएट हो जाती है, जिसके बाद टार्गेट लॉक करके मिसाइल दाग दी जाती है. लांच होने के बाद मिसाइल इमेजिन इंफ्रारेड रेडार से मिसाइल लॉक्ड टार्गेट को फॉलो करते हुए हिट करती है. इस तकनीक की वजह से मिसाइल को लॉंच होने के बाद किसी भी तरह के बाहरी कमांड की ज़रूरत नहीं पड़ती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

सरकारी सूत्रों के मुताबिक ‘नाग’ मिसाइल औपचारिक रूप से सेना में शामिल होने के आखिरी चरण में है. जिन्हें सेना की मोडीफाइड बख्तरबंद वाहनों के ऊपर लगाया जाएगा. आपको बताते चले कि इससे पहले नाग मिसाइल के दो सफल परीक्षण 2017और 2018 में किए जा चुके हैं.

                                      एंटी गाइडेड मिसाइल नाग की ख़ासियत

  • लगभग 42 किलो वजनी नाग मिसाइल अपनी रेंज की बाकी मिसाइलों की तुलना में काफी हल्की है. जिसकी वजह से इसे पहाड़ी पर या दूसरी किसी जगह पर मैकेनाइज्ड इन्फेंट्री कॉम्बैट व्हीकल के जरिए ले जाना काफी आसान होता है.
  • नाग 6 फुट 3 इंच लंबी मिसाइल है. इसी के साथ मिसाइल का व्यास 190 एम एम का होता है.
  • नाग मिससाइल 4 किलोमीटर दूर से दुश्मन के टैंक को निशाना बना सकती है.
  • नाग मिसाइल 230 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से टारगेट को ध्वस्त करती है. नाग मिसाइल अपने साथ 8 किलोग्राम विस्फोटक लेकर चल सकती है.
  • नाग मिसाइल थर्मल टार्गेट सिस्टम (टीटीएस) तकनीक पर काम करती है जिसकी वजह से ये रात के अंधेरे में भी टार्गेट पर निशाना लगाकर तबाह कर सकती है.
  • नाग मिसाइल का गाइडेंस सिस्टम, एक्टिव इमेजिन इंफ्रारेड रडार सीकर पर आधारित है

बता दें कि पिछले साल ही रक्षा अधिग्रहण परिषद ने 524 करोड़ रुपये में डीआरडीओ द्वारा विकसित की गई नाग मिसाइल सिस्टम (एनएएमआईएस) की खरीद को मंजूरी दे दी थी. इस प्रणाली में मिसाइल वाहक वाहन (NAMICA) के साथ तीसरी पीढ़ी के एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल नाग शामिल हैं. तीसरी पीढ़ी की एंटी-टैंक गाइडेड नाग मिसाइलों में दिन हो या रात किसी भी वक्त दुश्मन टैंकों को नष्ट करने की क्षमता होती है.

प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, सेना के लिए थर्ड जेनरेशन गाइडेड एंटी-टैंक मिसाइल नाग का उत्पादन इस साल के अंत तक शुरू हो जाएगा. अब तक इसका ट्रायल चल रहा था

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