इस धरा ने हमें महान शासकों का पूरा जखीरा दिया है। इतिहास के किसी भी तारीख को खंगालो तो देश के बहादुरों के किस्से आपको मिल ही जायेंगे। आज की तारीख भी एक महान राजा, एक महान शासक को याद करने की तारीख है। जिसके हौसले अकबर की विशालकाय सेना भी पस्त नहीं कर पाई। हम बात कर रहे हैं महाराणा प्रताप की।

महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई 1550 को राजस्थान के कुंभलगढ़ किले में हुआ था और 19 जनवरी 1597 को उनका निधन हुआ था।

महाराणा प्रताप के बारे में कहा जाता था कि वे अपने हाथों में दो तलवारें लेकर चलते थे। जिसमें से एक तलवार वो खुद अपने लिये और दूसरी तलवार निहत्थे दुश्मन को देने के लिये होती थी। जितने किस्से उनके हैं, उतने ही किस्से उनके घोड़े चेतक के हैं। आज उनके कुछ किस्से हम आपको बताएँगे।

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महाराणा प्रताप। फोटो सोर्स: गूगल

साहसी प्रताप

  • महाराणा प्रताप का जन्म 9 मई, 1540 को मेवाड़ (राजस्थान) में हुआ था। महाराणा प्रताप मेवाड़ के राजा उदयसिंह के पुत्र थे।
  • जब पूरे हिन्दुस्तान में अकबर का साम्राज्य स्थापित हो रहा था। तब 16वीं शताब्दी में महाराणा अकेले ऐसे राजा थे जिन्होंने अकबर के खिलाफ खड़े होने का साहस किया था। वे जीवन भर संघर्ष करते रहे लेकिन कभी भी स्वंय को अकबर के हवाले नहीं किया।
  • महाराणा प्रताप का कद साढ़े सात फुट एंव उनका वजन 110 किलोग्राम था। उनके सुरक्षा कवच का वजन 72 किलोग्राम और भाले का वजन 80 किलो था।
  • कवच, भाला, ढ़ाल और तलवार को मिलाकर कुल वजन 200 किलोग्राम हो जाता था। महाराणा प्रताप 200 किलोग्राम से भी ज्यादा वजन उठाकर युद्ध लड़ते थे। महाराणा प्रताप का कवच, तलवार उदयपुर राजघराने के संग्रहालय में सुरक्षित रखे हुए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो सोर्स: गूगल

न झुकने वाला प्रताप

अकबर ने प्रताप के सामने प्रस्ताव रखा था कि अगर महाराणा प्रताप उनकी सियासत को स्वीकार करते हैं तो आधे हिंदुस्तान की सत्ता उनको दे देंगे। मगर महाराणा प्रताप ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। अकबर कभी महाराणा प्रताप को नहीं पकड़ पाया।

प्रताप के घोड़े का नाम चेतक था। चेतक बहुत ही समझदार और वीर घोड़ा था। जिसने अपनी जान दांव पर लगाकर 26 फुट गहरे नाले को पारकर महाराणा प्रताप की रक्षा की थी। हल्दीघाटी में आज भी चेतक का मंदिर बना हुआ है।

वो विनाशकारी लड़ाई

महाराणा प्रताप और अकबर की सेना के बीच साल 1576 में हल्दीघाटी का युद्ध हुआ था। युद्ध में महाराणा प्रताप की सेना में सिर्फ 20000 सैनिक थे। अकबर की सेना महाराणा प्रताप से बहुत ज्यादा बड़ी थी। अकबर के सैनिकों की संख्या 85000 बताई जाती है।
महाराणा और चेतक। फोटो सोर्स: गूगल
इतनी बड़ी सेना के बावजूद अकबर की विशाल सेना को महाराणा प्रताप की छोटी सी सेना ने भरपूर टक्कर दिया था। प्रताप मातृभूमि के सम्मान के लिए संघर्ष करते रहे। हल्दीघाटी का वो युद्ध कितना भयंकर था इसका इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि युद्ध के 300 वर्षों बाद भी वहां पर काफी तलवारें मिलती रहीं।

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