1 मई को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में नक्सलियों ने पुलिस की एक गाड़ी को निशाना बनाया था जिसमें पुलिस की क्विक रेस्पॉन्स टीम(QRT) के 16 जवान सवार थे. माओवादियों ने हमला करने के लिए IED बम का इस्तेमाल किया था. इस हमले में पुलिस के C-60 टीम के 15 जवान शहीद हुये थे.

इस हमले के बाद सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें खूब वायरल हो रही हैं जिसमें दावा किया जा रहा है कि माओवादी हमलों में शहीद हुये जवानों के शव कागज के गत्तों में लपेटकर रखे गए हैं.

वायरल तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

लोग इन तस्वीरों को अपने फेसबुक, ट्वीटर से शेयर कर रहे हैं और तस्वीरों के कैप्शन में मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराते हुये खूब गरिया रहे हैं. ऐसा लग रहा है जैसे चुनावी सरगर्मियों के बीच मोदी विरोधी पलटन को जैसे संजीवनी बूटी के रूप में ये तस्वीरें मिल गई हों. सोशल मीडिया पर मर चुके पेज सब ज़िंदा हो गए हैं.

ऐसे ही एक ट्वीटर हैंडल ने तस्वीरें शेयर करते हुये लिखा है , ‘ये कूड़े के डिब्बे नहीं हैं. ये गढ़चिरौली के नक्सलवादी हमले में शहीद हुये सीआरपीएफ जवानों के शव हैं. देखिये खुद को राष्ट्रवादी पार्टी मानने वाली बीजेपी सरकार हमारे सैनिकों के साथ कैसा-कैसा सलूक करती है.

लोग इन तस्वीरों को सच मान कर सोशल मीडिया पर शेयर किये जा रहे हैं और शहीद जवानों के शव गत्तों में लपेटकर रखने के लिए मोदी सरकार को कोस रहे हैं।

जब ये फोटोज सोशल मीडिया से घूमती हुई हमारे पास आई तो हमने इन वायरल तस्वीरों की जांच पड़ताल की. जांच में पाया कि ये तस्वीरें सच्ची तो हैं, पर ये 2017 की हैं. इनका महाराष्ट्र में हुए माओवादी हमले में शहीद जवानों से कोई लेना-देना नहीं है.

पहली बात तो ये कि माओवादी हमले में मारे गए जवानों की श्रद्धांजलि सभा का टीवी पर लाइव टेलीकास्ट किया गया था. शहीद हुये पुलिस जवानों को पूरे राजकीय सम्मान के साथ श्रद्धांजलि दी गयी थी. तो इसका मतलब ये हुआ कि जिस संदर्भ के साथ इन तस्वीरों को वायरल किया गया है वो झूठ है, टोटल फेक है.

वायरल तस्वीरों का सच

दरअसल वायरल हो रही तस्वीरें साल 2017 की हैं. 6 अक्टूबर 2017 को अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में भारतीय  वायुसेना का MI-17 हेलिकॉप्टर क्रैश हो गया था. इस दुर्घटना में भारतीय वायुसेना के 7 जवान शहीद हुये थे.
इस हादसे के बाद ही कागज के गत्तों में लिपटे भारतीय जवानों के शवों की फ़ोटोज़ वायरल हुई थी.

भारतीय सेना के रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल हरचरनजीत ने इस हादसे के बाद की फोटो शेयर करते हुये लिखा था, 7 भारतीय वायु सेना जवानों ने भारत माँ की सेवा में अपनी जान की बाजी लगा दी और कुछ इस हालत में उन वीर जवानों के शवों को उनके घर पहुंचाया गया.

वहीं पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह ने इन तस्वीरों को अपने ट्वीटर हैंडल पर शेयर करते हुये लिखा था, ‘तवांग में हुये हादसे में मारे गए 7 भारतीय वायु सेना के जवानों के शव कागज के गत्तों में लपेटकर घर लाये गए हैं. क्या हमें हमारे सैनिकों के साथ ऐसा सलूक करना चाहिए?

जब ये मुद्दा बहुत गरमाया तब इस मामले पर भारतीय सेना के प्रवक्ता ने सेना के आधिकारिक ट्वीटर हैंडल से स्पष्टीकरण दिया था.

ट्वीट में कहा गया, दुर्घटना की जगह से सब मारे गए जवानों के शवों को बेस तक लाने के लिए हमें स्थानीय संसाधनों का इस्तेमाल करना पड़ा. लेकिन हमने सुनिश्चित किया था कि सभी जवानों के शवों को पूरे सैन्य सम्मान के साथ उनके घर पहुंचायें.

फोटो साभार – गूगल

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