100 अंकों के पेपर में किसी को 111 नंबर मिल सकता है? यह सुनने में भले ही अजीब लगता हो… लेकिन ये बात सौ फीसदी सही है। आइये आपको बताते हैं कि किसी सरकारी परीक्षा में हिस्सा लेने वाले स्टुडेंट के पेपर में पूछे जाने वाले कुल अंकों से ज्यादा अंक कैसे आ सकते हैं?

दरअसल, पिछले दिनों रेलवे भर्ती बोर्ड के ग्रुप-डी परीक्षा का रिजल्ट आने के बाद मार्किंग सिस्टम को लेकर रेलवे परीक्षा बोर्ड पर कई सवाल उठ रहे थे। कुल 100 अंकों में 100 से ज्यादा अंक आने पर स्क्रीनशॉट्स के साथ फोटो वायरल हो रहे थे। इन वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट्स में 109, 111 से लेकर 134 नंबर के स्क्रीनशॉट्स भी थे। इसके बाद रेलवे ने इस मामले में सफाई दी और पूरे मामले को अच्छे से समझाया।

रेलवे परीक्षा में मार्किंग पैटर्न

बोर्ड ने इस मामले में सफाई दी है

रेलवे परीक्षा बोर्ड ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे स्क्रीनशॉट्स के हवाले से बताया कि किसी स्टुडेंट को 100 में से 111 नंबर मिलना कोई नई बात नहीं है। दरअसल, रेलवे बोर्ड की इस परीक्षा में नॉर्मलाइज़ेशन की वज़ह से नंबर 100 से ज्यादा भी हो सकते हैं।

यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि रेलवे बोर्ड पर सवाल खड़ा कर रहे लोगों का कहना था कि 100 से ज्यादा नंबर मिलना कोई नई बात नहीं है। लेकिन नई बात यह है कि किसी छात्र को नॉर्मलाइजेशन के बाद भी 134 या इससे अधिक अंक कैसे मिल सकते हैं? रेलवे बोर्ड ने अपनी सफाई में कहा है कि किसी भी छात्र को 126 अंक से अधिक नहीं दिए गए हैं।

रेलवे परीक्षा बोर्ड द्वारा दी गई सफाई का स्क्रीनशॉट

तो क्या 100 अंको के सवाल पूछे जाने पर 111 मिल सकते हैं?

हां, रेलवे बोर्ड के मुताबिक 100 अंको की परीक्षा में आपको 111 अंक मिल सकते हैं। यह आज से नहीं बल्कि पिछले 19 सालों से अंक दिए जाने के इस प्रक्रिया और नियमों का इस्तेमाल हो रहा है।

नॉर्मलाइजेशन फॉर्मुला के मुताबिक किसी छात्र ने एक कठिन पेपर हल किया और उसे 100 में से 90 नंबर मिले जबकि किसी दूसरे छात्र ने सरल पेपर को हल किया और उसे भी 90 अंक परीक्षा में दिए जाते हैं। ऐसे में दोनों ही छात्रों का आकलन नॉर्मलाइजेशन के नियम से होता है।

इस बात को आप समझना चाहते हैं तो ऐसे समझिए कि यदि किसी X स्टूडेंट को परीक्षा में 80 अंक मिले, तो इसका अर्थ हुआ कि उस छात्र का रॉ स्कोर 80 है।

अब दूसरी बात इस पर निर्भर करती है कि छात्र ने किस शिफ्ट में परीक्षा दी है और उस शिफ्ट में पूछे गए सवाल कितने आसान हैं? इसके बाद उस शिफ्ट के सबसे ज्य़ादा अंक और उस शिफ्ट के टॉपर के नंबर को देखा जाता है। इसके बाद दूसरी शिफ्ट में बैठे उम्मीदवारों के ऐवरेज नंबर को भी देखा जाता है।

इसके बाद पेपर की कठिनाई के साथ-साथ उम्मीदवार के रॉ-स्कोर को देखा जाता है। इन्हीं सभी चीजों के आधार पर नॉर्मलाइज़्ड स्कोर निकाला जाता है। जो स्क्रीनशॉट्स वायरल हो रहे हैं, ये इसी पैटर्न के आधार पर दिए गए नंबरों पर अधारित हैं।

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