उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर से कुछ दिन पहले एक वीडियो सामने आया था. एक पत्रकार ने उस वीडियो में दिखाया था कि सरकारी स्कूल में मिड-डे मील के नाम पर किस तरह बच्चों को नमक के साथ रोटी दी जा रही है. इनाम के तौर पर योगी सरकार ने उस पत्रकार के खिलाफ FIR दर्ज करवा दी. FIR में लिखा गया है कि पत्रकार का वीडियो जान-बूझकर इस तरीके से बनाया गया है जिससे सरकार और प्रशासन की इमेज गलत बने.

पवन जायसवाल नाम का ये पत्रकार स्थानीय अख़बार जनसंदेश टाइम्स में काम करता है. पत्रकार के मुताबिक उस स्कूल से बच्चों को नमक-चावल और नमक-रोटी देने की खबरें कई बार आ चुकी थीं. किसी ग्रामीण के कहने पर उसे पता चला कि 22 अगस्त को स्कूल में बच्चों को फिर रोटी-नमक दिया जा रहा है तो, उसने स्कूल में जाकर वीडियो शूट कर लिया।

लेकिन, योगी सरकार का कहना इससे बिल्कुल उलट है. सरकार की तरफ से दर्ज करवाई गई FIR में कहा गया है कि जिस दिन स्कूल से वीडियो शूट किया गया. उस दिन दोपहर 12 बजे तक केवल रोटी बनी थी. सब्जी बनना अभी बाकी था.

आरोपों के मुताबिक पवन जायसवाल ने गांव के प्रधान प्रतिनिधि राजकुमार पाल के साथ मिलकर रसोइये को कहा कि वो रोटियां बाँट दे. रसोइये के रोटी-नमक बाँटने की वीडियो शूट कर ली गई. वीडियो का मुख्य उद्देश्य केवल उत्तर प्रदेश राज्य और राज्य सरकार को बेइज़्ज़त करना था. पवन जायसवाल के अलावा गांव के प्रधान प्रतिनिधि राजकुमार पाल और एक अन्य अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ FIR दर्ज की गई है.

मामले का संज्ञान लेते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी ने मीडिया से कहा कि पत्रकार की गिरफ्तारी नहीं होनी चाहिए थी.

“लखनऊ पहुंचकर अपने विभाग और मिर्जापुर के पुलिस अधीक्षक से पूरी जानकारी लेकर पूरे मामले की पड़ताल की जाएगी. भ्रष्टाचार या कोई अन्य तथ्य उजागर करने पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए. मिर्जापुर में मिड-डे मील को लेकर जो घटना घटी थी, उस घटना से इसका कितना संबंध है, पुलिस अधीक्षक से रिपोर्ट मांग कर इस बारे में बता पाऊंगा. हमनें उस घटना पर विभागीय कार्रवाई की थी. अब उसमें पुलिस ने किस आधार पर पत्रकार पर कार्रवाई की है, देखना होगा. उसी मामले में या किसी और मामले में कार्रवाई हुई है, पूरी जानकारी के बाद ही बता पाऊंगा.”

पत्रकारों के खिलाफ योगी सरकार का तानाशाही रवैया दिखाने वाला यह पहला मामला नहीं है. इससे कुछ महीने पहले ही खुद को योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बताने वाली एक लड़की पर खबर चलाने के लिए नोएडा के एक न्यूज़ चैनल से दो पत्रकारों को, और एक मजाकिया ट्वीट करने के लिए दिल्ली से एक पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया था.

सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद दिल्ली के पत्रकार प्रशांत कनौजिया को रिहा किया गया था. सुप्रीम कोर्ट ने तब कहा था कि सरकार किसी नागरिक के अधिकारों का हनन नहीं कर सकती। अब देखना यह है कि क्या इस मामले में भी सुप्रीम कोर्ट को योगी जी को ये याद दिलाना पड़ेगा कि इस देश में नागरिकों के कुछ अधिकार भी होते हैं, जिन्हें आप अपने मनमुताबिक नहीं छीन सकते।

यह भी पढ़ें: गुटखे पर बैन करना सही फैसला है लेकिन, केवल एक साल के लिए ही क्यों?