एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, मध्य प्रदेश में एक बुजुर्ग महिला को अपने निवास के बाहर एक शौचालय में रहने के लिए मजबूर किया गया है. इससे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह है कि उसे एक साल से अधिक समय तक शौचालय में रहने को मजबूर किया गया. रिपोर्ट के अनुसार, 70 वर्षीय महिला को उसके परिवार के सदस्यों ने एक निजी मुद्दे पर शौचालय में रहने के लिए मजबूर किया. घटना की जानकारी के बाद, अधिकारियों को मामले को सब डिविजनल मजिस्ट्रेट (एसडीएम) के पास भेजना पड़ा. महिला की उम्र 70 साल है और वह अपना सारा सामान भी उसी शौचालय में रखती है. खुद के किए खाना भी वो वहीं बनाती हैं और शौचालय के अंदर ही सोती भी हैं. कहानी सी लगने वाली यह पूरी घटना मध्य प्रदेश के सतना ज़िले की है.

प्रतिकात्मक तस्वीर फोटो सोर्स गूगल

मीडिया से बात करते हुए महिला ने बताया-

“मैं तीन बेटों की मां हूं. मेरी बहू और मुझमें हमेशा से कुछ न कुछ मुद्दों पर बहस हो जाया करती थी. मुझे बाद में घर से बाहर निकाल दिया गया. मैं अब एक साल से शौचालय में रह रही हूँ. मैं अपने लिए खाना बनाती हूं और वहीं सोती हूं.”

तहसीलदार मवेंद्र सिंह ने मीडिया को बताया कि इस मामले को एसडीएम तक पहुंचा दिया गया है और वे अभी उस महिला के लिए घर खोजने की कोशिश कर रहें है. वैसे आपको बता दें कि यह पहली घटना नहीं है जहां ऐसा कुछ हो रहा है. बूढ़े माँ बाप को वृद्धाश्रम में छोड़ना एक आम बात हो गयी है. हमारे समाज में यह बात इतनी आम हो गयी है कि लोग अगर ऐसा कुछ सुनते भी हैं तो उतना ध्यान नहीं देते और रोज़मर्रा की आम बातों की तरह ही इसे जाने देते हैं. कुछ केस तो ऐसे भी सामने आए हैं जहां माँ बाप को घर से बाहर निकाल दिया गया है, बीच सड़क पर छोड़ दिया गया है, कहीं मेले में ले जाकर छोड़ दिया गया है. इसी तरह की घटना में, 19 सितंबर, 2018 को एक बेटे और बहू ने छुट्टी पर जाने से पहले माँ, रश्मनी भट्टाचार्य को सड़क पर छोड़ दिया. पश्चिम बंगाल के बैरकपुर की रहने वाली 70 वर्षीय महिला अपने सबसे छोटे बेटे रतन के साथ रहा करती है. शहर छोड़ने से पहले दंपति ने माँ को उनके घर से बाहर निकाल दिया और उन्हें सड़क पर चावल के पैकेट और कुछ कपड़ों के साथ छोड़ दिया.

फोटो सोर्स गूगल

 ‘पूत कपूत हो सकती है पर माता कभी कूमाता नहीं होती’. ऐसी कहावत ऐसे बच्चों के ऊपर ही लिखी गयी है. जब मीडिया वालों ने उस महिला से उसके स्थिति के बारे में पूछा तब भी उसने अपने बेटे को बेटा ही कह कर संबोधित किया. ये होती है ममता और इसे कहते हैं माँ. अगर यह सेम घटना उस बेटे के साथ घटी होती तो वह तुरंत थाने में माँ बाप की शिकायत करने पहुँच जाता पर ये एक माँ ही हो सकती है जो थाने न जाकर एक साल उस शौचालय में रहना पसंद करती है ताकि उसके बेटे को कोई कष्ट न हो. यह ऐसी घटना है जिस पर किसी को कोई बात समझाया नहीं जा सकता बस येही कहूँगा कि अगर आप अपने माँ बाप के साथ बुरा कर रहे हैं तो आपकी भी वही हालत होगी. बच्चा जो घर में देखता है वही सीखता है. तो अगर आप माँ बाप का अपमान कर रहें हैं तो तैयार हो जाइये अपनी बारी के लिए.वक़्त बहुत जल्दी पलटता है.

 

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