भारत अंतरिक्ष, विज्ञान की दुनिया में इतिहास रचने से सिर्फ दो क़दम दूर रह गया. अगर लैंडर विक्रम चाँद की सहत पर सफलता पूर्वक लैंड कर जाता तो, चन्द्रमा के दक्षिण ध्रुव पर अपना अंतरिक्षयान उतारने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन जाता. लेकिन, हमारे चंद्रयान-2 की 47 दिनों का सफर आख़िरी पलों में अधूरा रह गया. चंद्रमा की सतह से 2.1 किलोमीटर पहले लैंडर विक्रम का संपर्क लैंडर से टूट गया. इसके साथ ही 130 करोड़ो लोगों का चाँद पर पहुंचने का सपना भी टूट गया.

लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने के बाद निराश इसरो वैज्ञानिक, फोटो सोर्स - गूगल
लैंडर विक्रम से संपर्क टूटने के बाद निराश इसरो वैज्ञानिक, फोटो सोर्स – गूगल

संपर्क टूटने के 36 घंटे बाद ही चाँद के चक्कर लगा रहे चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर ने एक तस्वीर भेजी. जिसे देखकर निराश ISRO वैज्ञानिकों की उम्मीदें एक बार फिर से जाग गयी. चाँद की सतह पर तिरछे पड़े लैंडर विक्रम से संपर्क साधने की कोशिश की जाने लगी.

इसरो द्वार जारी की गयी तस्वीर , फोटो सोर्स - गूगल
इसरो द्वार जारी की गयी तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

भारत की इन कोशिशों में यूरोपियन स्पेस एजेंसी से लेकर अमेरिका की स्पेस एजेंसी नासा भी ISRO के साथ आ गए. हर जतन किए गए लेकिन, लैंडर विक्रम से संपर्क नही साधा जा सका. इसके बाद इरसों ने एक ट्वीट करके इस बात की जानकारी देते हुए देसवाशियों का शुक्रिया अदा किया.

हाल में ही ISRO (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) प्रमुख के. सिवन ने कहा, चंद्रयान-2 ने अपना 98% मिशन पूरा करने में कामयाब रहा हैं. दूसरी तरफ ISRO वैज्ञानिक चाँद की सतह पर पड़े लैंडर ‘विक्रम’ के साथ संपर्क स्थापित करने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. के. सिवन ने बताया कि चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर अपना काम ठीक से कर रहा है.

प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

मीडिया से बातचीत करते हुए इसरो प्रमुख ने कहा , ‘मिशन के तहत चंद्रयान-2 ने अपने 98% लक्ष्य हासिल कर लिये है, इसके दो कारण हैं – पहला विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रमाण. चंद्रयान-2 का ऑर्बिटर सही तरीके से काम कर रहा है. ऑर्बिटर में आठ उपकरण हैं और आठों उपकरण अपना काम ठीक तरीके से कर रहे हैं.’ ये ऑर्बिटर्स आने वाले साढ़े सात साल तक चांद से संबंधित आंकड़ें और तस्वीरें हमें भेजते रहेंगे.

प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

के. सिवन ने कहा, ‘ हम 2020 तक अपने दूसरे चंद्रमा मिशन पर ध्यान केंद्रित कर रहे है. भविष्य कि योजनाओ को लेकर चर्चायेँ जारी है. हालांकि अभी तक किसी भी योजना को अंतिम रूप नहीं दिया गया हैं. अभी हमारी प्राथमिकता अगले वर्ष तक मानव रहित मिशन पर है. इस मिशन के जरिये हम ये समझ पाएगे कि हमारे लैंडर के साथ आखिर  हुआ क्या है?’

‘मिशन के तहत चंद्रयान 2 ने अपने 98% लक्ष्यों को पूरा कर लिया है’ इसरो चीफ के इस बयान पर अब देश के कई वरिष्ठ वैज्ञानिको ने आपत्ति दर्ज करते हुए सवाल उठाये हैं.

इसरो का कमांड सेंटर हॉल, फोटो सोर्स - गूगल
इसरो का कमांड सेंटर हॉल, फोटो सोर्स – गूगल

एक वैज्ञानिक ने तो अपने सोशल मीडिया एकाउंट से एक पोस्ट डालकर इसरो प्रमुख के नेतृत्व पर सवालिया निशान लगते हुए ‘रॉकेट साइंस’ पर एक लेख लिखा है.

इसरो चेयरमैन के सलाहकार रह चुके और स्पेस एप्लीकेशन सेंटर अहमदाबाद के पूर्व निदेशक तपन मिश्रा ने अपनी फ़ेसबुक पोस्ट में इसरो चीफ के सिवन का नाम लिए बगैर लिखा है कि, नेतृत्व करने वाले लीडर्स का काम प्रोत्साहित करना होता है, प्रबंधन करना नहीं. अचानक से जब नियमों को मानने की व्यवस्था बढ़ जाए, कागजी कार्यवाहियों में बदोत्तरी होने लग जाए, बैठके पहले से ज्यादा होने लगे, बातें घुमावदार होने लगे तो ये मान लेना चाहिए कि अब आपके संस्थान में नेतृत्व मुश्किल होता जा रहा है.

सोर्स - तपन मिश्रा के फेसबूक पोस्ट से
सोर्स – तपन मिश्रा के फेसबूक पोस्ट से

वैज्ञानिक तपन ने लिखा – जब आपका स्कूटर पंक्चर हो जाता है, तब स्कूटर ठीक कराने के लिए आप एक मैकेनिक को बुलाते हैं. जो उसका पंचर बनाता हैं और स्कूटर फिर से चलने लगता है. वैसे ही जब भी किसी स्पेसक्रॉफ्ट या रॉकेट में कोई गड़बड़ी आ जाए तब आपको इस मैकेनिक को बुलाना भूलना नहीं चाहिए. स्पेस साइंस और टेक्नोलॉजी में 100 प्रतिशत भरोसा होना बेहद जरूरी है.

तपन मिश्र लिखते हैं कि, जब भी आप अंतरिक्ष में कोई मिशन भेजते हैं, उससे पहले आपको कई सुधारात्मक उपाय तैयार करके रखने होते हैं. क्योंकि अंतरिक्ष में कोई इंसान नहीं होता जो आपके स्पेसक्रॉफ्ट में आई गड़बड़ी को ठीक कर देगा. जिस मशीन को आपको अंतरिक्ष में भेजना हैं, उस मशीन को भेजने से पहले कई बार अंतरिक्ष जैसे माहौल के हिसाब से जांच-परख लेना चाहिए. अंतरिक्ष में आने वाली सभी संभावित मुसीबतों पर विचार करके उस मशीन की जांच की जानी चाहिए.

प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

भरत ठक्कर ने कहा है कि विक्रम लैंडर के मैकेनिकल डिजाइन को लेकर पोस्टमार्टम करना चाहिए. ये पता करना चाहिए कि विक्रम के मैकेनिकल डिजाइन में सुरक्षा को लेकर क्या-क्या व्यवस्था की गई थी. क्या इस पर कोई काम किया गया है?

नाम न बताने की शर्त पर एक अंतरिक्ष वैज्ञानिक ने सवाल उठाया कि, क्या लैंडर विक्रम की लैंडिंग के समय इसरो ने पांच के बजाय एक थ्रस्टर का प्रयोग किया था?

वैज्ञानिक ने बताया- एक साथ पांचों थ्रस्टर्स को ऑन कर बराबरी के स्तर पर संचालित करना थोड़ा मुश्किल होता है. हमें लाइडर में 5 थ्रस्टर्स की बजाए एक ही ताकतवर इंजन पर काम करना चाहिए था. इसरो अधिकारियों पर आरोप लगाया है. वैज्ञानिक ने कहा, इसरो उच्चाधिकारियों ने चंद्रयान-1 में काम करने वाले अनुभवी वैज्ञानिकों को किनारे कर दिया था. मतलब कि जिन वैज्ञानिकों को चंद्रयान-2 प्रोजेक्ट में शामिल ही नहीं किया उन लोगों को चंद्रयान-2 मिशन के विशेषज्ञों की टीम में शामिल किया गया.

प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स - गूगल
प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

देश के वैज्ञानिकों ने मिशन चंद्रयान-2 की सफलता पर सवाल खड़े करने हुए इसरो प्रमुख के नेतृ्त्व पर सवालिया निशान लगाए हैं. इसके अलावा लैंडर विक्रम के मैकेनिकल डिजाइन में कहाँ कमी रह गई इसकी जांच करने की मांग भी की हैं. नोबल पुरस्कार विजेता सर्जे हरोशे ने इसरो की तारीफ करते हुए कहा था, मिशन चंद्रयान-2 के जरिये भारतीय स्पेस एजेंसी इसरो के वैज्ञानिकों को काफी कुछ सीखने को मिला है, जिससे वो भविष्य के मिशन को बेहतर बना सकेगें. इस मिशन को लेकर भारतीय वैज्ञानिकों ने बहुत मेहनत की थी हालांकि आखिर में कुछ कमी रह गई.