पिछले कुछ दशकों से भारत लगातार संयुक्त राष्ट्र संघ में स्थाई सदस्य बनने की कोशिश में लगा हुआ है. फिलहाल संयुक्त राष्ट्र के पाँच देशों को स्थायी सदस्यता प्राप्त है. इन देशों में अमेरिका, फ्रांस, रूस, चीन और ब्रिटेन शामिल हैं.अमेरिका रूस और फ्रांस जैसे देश ज़्यादातर मौको पर भारत को छठे देश के रूप में स्थाई सदस्यता देने का समर्थन करते रहे है. लेकिन चीन हमेशा से भारत को यूएन में शामिल किए जाने का विरोध करता आया है.

एशिया महाद्वीप के देशों में चीन ही एक ऐसा देश है जो UN काउंसिल का परमानेंट मेंबर है. चीन जानता है कि अगर भारत UN काउंसिल का स्थाई सदस्य बन जाता है तो अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति में भारत का कद उसके बराबर हो जाएगा. फिर पाकिस्तान का साथ देने से पहले चीन को कई बार सोचना पड़ जाएगा. साथ ही दुनिया में भारत का दबदबा और ताकत दोनों बढ़ेगी.

फ्रांस ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र संघ में भारत को स्थाई सदस्यता देने का समर्थन करते हुये कहा है कि-

फ्रांस का मानना है कि अब सुरक्षा परिषद का विस्तार होना चाहिए. सुरक्षा परिषद का विस्तार इसके सुधार की दिशा का पहला महत्वपूर्ण हिस्सा है.

UN फोटो सोर्स – गूगल

शुक्रवार को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में फ्रांस के स्थाई प्रतिनिधि फ्रांस्वा डेल्ट्रे ने कहा कि

हमें भारत, जर्मनी, ब्राज़ील ,जापान जैसे उभरते देशो को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थाई सदस्यों के तौर पर शामिल करने की जरूरत है. जिससे वे अपने मौजूदा हालात को दुनिया के सामने अच्छे ढंग से रख सकेंगे. इन सदस्यों को संयुक्त राष्ट्र की महत्तवपूर्ण संस्था में शामिल कराना फ्रांस की रणनीतिक प्राथमिकताओ में शामिल हैं.

गौरतलब है कि फ्रांस ने मार्च महीने में संयुक्त राष्ट्र परिषद की अध्यक्षता संभाली है.

जी-4 देश

आपको बता दे कि बड़े भौगोलिक क्षेत्रफल और उभरती हुयी मजबूत अर्थव्यवस्था के रूप में दुनिया में पहचान रखने वाले 4 ताकतर देश जर्मनी, जापान, भारत और ब्राजील को संयुक्त राष्ट्र में जी-4 देश कहा जाता है.

G-4 COUNTRY फोटो सौर्स – गूगल

इन देशों के बारे में कहा जाता है कि बदलती हुई दुनिया और मौजूदा स्थिति के अनुसार इन देशों को सयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता दी जानी चाहिए. ये देश सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्य बनने के जायज हकदार हैं. इनके शामिल होने से संयुक्त राष्ट्र संघ का असर भी बढे़गा और इससे सुरक्षा परिषद का विस्तार भी होगा.

वहीं काफी समय से ये मांग की जा रही है कि अब संयुक्त राष्ट्र संघ में सुधारों का समय आ चुका है.संयुक्त राष्ट्र अपना 60 फीसदी से ज्यादा काम अकेले अफ्रीकी महाद्वीप में कर रहा है लेकिन अफ्रीका से कोई भी देश स्थायी सदस्य नहीं है.

भारत का मानना है कि सयुक्त राष्ट्र की महत्त्वपूर्ण संस्था में वह एक स्थायी सदस्य के तौर पर उचित जगह का हकदार है. वहीं भारत संयुक्त राष्ट्र में सुरक्षा परिषद के लंबे समय से लंबित पड़े सुधारों के लिए दवाब देने वाले देशो में सबसे आगे रहता है.