योगी आदित्यनाथ पर सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट करने के मामले में स्वतंत्र पत्रकार प्रशांत कनौजिया को शनिवार दिल्ली से गिरफ्तार कर लखनऊ ले जाया गया था. प्रशांत की पत्नी के अनुसार प्रशांत ने ट्विटर पर एक वीडियो अपलोड किया था, जिसमें एक महिला ख़ुद को योगी आदित्यनाथ की प्रेमिका बता रही थी.

इसी वीडियो के साथ प्रशांत ने योगी का ज़िक्र करते हुए एक टिप्पणी की थी. जिस कारण से उन्हें गिरफ्तार किया गया है. इस मामले में लखनऊ के हज़रतगंज थाने में एफ़आईआर दर्ज की गई है और प्रशांत कनौजिया पर आईटी एक्ट की धारा 66 और मानहानि की धारा (आईपीसी 500) लगाई गई है. अब गिरफ्तार पत्रकार की पत्नी जगीशा अरोड़ा इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी हैं.

पत्रकार प्रशांत कनौजिया( फोटो सोर्स गूगल)

मामला क्या है?

प्रशांत कनौजिया की पत्नी गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गयी है. प्रशांत की पत्नी जगीशा अरोड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में ‘हैबियस कॉरपस’ याचिका दाखिल किया है.

याचिका में कहा गया है कि प्रशांत की गिरफ्तारी गैरकानूनी है और यूपी पुलिस ने इस संबंध में ना तो FIR के बारे में जानकारी दी है और ना ही गिरफ्तारी के लिए कोई गाइडलाइन का पालन किया है. उन्हें दिल्ली में ट्रांजिट रिमांड के लिए किसी मजिस्ट्रेट के पास भी पेश नहीं किया गया.  साथ में इस बात की भी दलील दी गई है कि FIR में IPC की धारा 500 लगाई गई है जो पुलिस नहीं लगा सकती. ये धारा सिर्फ मजिस्ट्रेट ही लगा सकता है.

आपको बता दें कि कनौजिया ने एक वीडियो टि्वटर और फेसबुक पर शेयर किया था, जिसमें एक महिला मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर विभिन्न मीडिया संगठनों के संवाददाताओं से बात करती दिख रही है. महिला दावा कर रही है कि उसने मुख्यमंत्री को विवाह का प्रस्ताव भेजा है.

क्या है हैबियस कॉरपस?

हैबियस कॉरपस पेटिशन उस स्थिति में दायर की जाती है जब कभी पुलिस के द्वारा या फिर किसी प्राइवेट व्यक्ति के द्वारा किसी भी महिला या फिर पुरुष को नाजायज रूप से गैरकानूनी तरीके से बंधक बना लिया जाता है।

पत्रकार संगठनों ने गिरफ्तारी पर आपत्ति जताई है

एडिटर्स गिल्ड समेत कई पत्रकार संगठनों ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से संबंधित कथित आपत्तिजनक वीडियो के मामले में पत्रकार प्रशांत कनौजिया, इशिका सिंह और अनुज शुक्ला की गिरफ्तारी की निंदा की है. गिल्ड ने एक बयान में कहा,

‘पुलिस की कार्यवाई कठोरतापूर्ण, मनमानी और कानूनों के अधिकारवादी दुरुपयोग के समान है.’ 

बयान में कहा गया कि गिल्ड इसे प्रेस को डराने-धमकाने तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का गला घोंटने के प्रयास के तौर पर देखती है. उसने कहा, ‘महिला के दावे में जो भी सच्चाई हो, इसे सोशल मीडिया पर डालने और एक टीवी चैनल पर प्रसारित करने के खिलाफ आपराधिक मानहानि का मामला दर्ज करना कानून का खुल्लम-खुल्ला दुरुपयोग है.

समाजवादी पार्टी ने ट्वीट कर विरोध जताया

समाजवादी पार्टी ने प्रशांत के गिरफ्तारी पर विरोध जताते हुए कहा है कि “कानून व्यवस्था के मामले में फेल सरकार पत्रकारों पर अपनी हताशा निकाल रही है.”

आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर सोशल मीडिया पर ‘आपत्तिजनक टिप्पणी’ के मामले में नोएडा पुलिस ने एक टीवी न्यूज़ चैनल के हेड और संपादक को भी गिरफ्तार किया है. हालांकि, पुलिस के अनुसार यह न्यूज़ चैनल गैरकानूनी ढंग से चल रहा था. वहीं पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी को लेकर इंडियन वूमेन प्रेस कॉर्प्स, प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, साउथ एशियन वूमेन इन दि मीडिया एंड प्रेस एसोसिएशन ने भी एक संयुक्त बयान जारी करके तीनों पत्रकारों की गिरफ्तारी की निंदा की है.

Facebook Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here