21 मई 1991, तमिलनाडु का श्रीपेरंबदूर। जहां देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी रैली करने आने वाले था। पूरा मैदान लोगों से खचाखच भरा हुआ था। जनता अपने प्रिय नेता को देखना चाहती थी, उन्हें छूना चाहती थी। राजीव गांधी आये तो भीड़ को दूर किया जाने लगा। तभी राजीव गांधी की आवाज आई, प्लीज उनको आने दीजिए पुलिस ने अपनी पकड़ ढीली कर दी। भीड़ राजीव गांधी के पास आई और माला पहनाने लगी। उन्हीं में से हरे सलवार सूट और चेहरे पर बड़ा चश्मा लगाये एक लड़की भी थी, उस लड़की ने राजीव गांधी को फूलों की माला पहनाई।

राजीव गांधी जनता के बीच आकर खुश थे, वे मुस्कुरा रहे थे, मुस्कुराती हुई तस्वीर कैमरे में कैद हो गई और वो तस्वीर राजीव गांधी की आखिरी जिंदा तस्वीर बन गई। क्योंकि अगले ही पल वो लड़की राजीव गांधी के पैर छूने के लिए झुकी, राजीव गांधी उसे उठाने के लिए नीचे झुके। तभी एक जोर का धमाका हुआ, जिसने सब कुछ बिखेर दिया। जब सब कुछ साफ हुआ तो देश ने अपना एक नेता खो दिया। तब की बात में आज कहानी, राजीव गांधी की हत्या की।

राजीव् गांधी की जीवित अवस्था की अंतिम तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

वो ऐसा दौर था जब श्रीलंका जंग का मैदान बन गया था। ऐसी विषम परिस्थति में श्रीलंका सरकार का साथ दे रही थी भारत सरकार, जिसके मुखिया राजीव गांधी थे। राजीव गांधी कभी श्रीलंका सरकार से बात करते तो कभी लिट्टे प्रमुख प्रभाकरन से। एक किस्सा सुनिये ऐसी ही एक मुलाकात का, वो मुलाकात 1987 में हुई थी। बैठक की जगह नई दिल्ली 10 जनपथ, देश के प्रधानमंत्री का घर। उस बैठक में मौजूद थे प्रधानमंत्री राजीव गांधी। मीटिंग हो रही थी लिट्टे के कमांडर वी प्रभाकरन के साथ।  उस मीटिंग में श्रीलंका और भारत के बीच शांति समझौते पर बात बन गई, प्रभाकरन राजी नहीं थे लेकिन दबाव के कारण हां कर दी। राजीव गांधी ने प्रभाकरन को विश्वास में लेने के लिए उपहार दिया, एक बुलेट प्रूफ जैकेट। जिसे राजीव गांधी के बेटे राहुल गांधी ने प्रभाकरन के कंधे पर रखा था। राजीव मुस्कुराकर बोले, प्रभाकरन अपना ख्याल रखना। प्रभाकरन ने अपना ख्याल तो बखूबी रखा लेकिन उसी प्रभाकरन ने राजीव गांधी की हत्या की साजिश रची।

12 मार्च 1991

राजीव गांधी की हत्या की तारीख से 9 दिन पहले 12 मार्च 1991 को मद्रास से 40 किलोमीटर दूर त्रिवेल्लूर में एक रैली हुई। इस रैली को संबोधित करने आ रहे थे पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह और साथ में तमिलनाडु के मुख्यमंत्री करूणानिधि। यहां पर लिट्टे के दस्ते ने वैसा ही कुछ किया जैसा वो 21 मई 1991 को राजीव गांधी के साथ करने वाले थे। लेकिन ये सिर्फ एक डेमो था, प्रैक्टिस जैसा। वो देखना चाहते थे कि मंच के पास, रैली के नेता के पास सिक्युरिटी कैसी रहती है? नेता के पास पहुंचा जा सकता है या नहीं।

फोटो सोर्स- गूगल

इस रैली में जब वी.पी. सिंह पहुंचे तो एक लड़की ने उनके पैर छुए। इस लड़की का नाम था धनु। इसी लड़की ने 21 मई 1991 को राजीव गांधी के पैर छुए और जब राजीव गांधी उसे उठाने के लिए नीचे झुके तो बम फट गया। लेकिन इतनी बड़ी साजिश को एक अकेली लड़की अंजाम नहीं दे सकती। इस लड़की के साथ पांच लोगों का एक पूरा दस्ता था। जिसमें धनु के साथ उसका बैकअप भी थी सुधा, नलिनी, मुरूगरन और शिवसरन। 21 मई 1991 को धमाका हुआ और राजीव गांधी मारे गए। पर तब अगर राजीव गांधी वहां बच भी जाते तो दिल्ली में उनकी हत्या करने की साजिश रची गई थी। दिल्ली के मोतीबाग में एक लड़की को तैनात किया गया था। नाम था अथीरा, जिसे राजीव गांधी की हत्या के बाद तुरंत संदेश भेजा गया- दिल्ली छोड़ दो। पर जब वो दिल्ली छोड़ रही थी तभी सुरक्षा एजेंसी ने उसको दबोच लिया। साजिश में धनु के साथ शामिल उसके बाकि साथियों ने तमिलनाडु में पुलिस के पहुंचने से पहले ही सायनाइड चाट कर आत्महत्या कर ली थी।

21 मई, 1991

अब उस दिन की ओर आते हैं जब वो भयानक धमाका हुआ था। रात के 8 बजे थे, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता चन्द्रशेखर मद्रास के गुइंदी हवाई अड्डे पर राजीव गांधी का इंतजार कर रहे थे। राजीव गांधी जब विशाखापत्तनम से चेन्नई जाने के लिए तैयार हुए तो विमान के पायलट कैप्टन चंदोग ने पाया कि विमान की संचार व्यवस्था सही नहीं है। राजीव गांधी ने उस रैली में न जाने का फैसला किया और गेस्ट हाउस की ओर निकल गये। जब राजीव गांधी रास्ते में ही थे तभी एक पुलिस वाला मोटर साइकिल से आया और बताया कि आपका प्लेन अब जाने के लिए पूरी तरह ठीक हो गया है।

फोटो सोर्स- गूगल

मद्रास के लिए राजीव गांधी के प्लेन ने साढ़े छः बजे उड़ान भरी। राजीव गांधी पायलट थे और वे खुद प्लेन उड़ा रहे थे।  प्लेन ठीक 8 बजकर 20 मिनट पर मद्रास पहुंचा। वहां से राजीव एक गाड़ी में श्रीपेरंबदूर के लिए रवाना हो गये। वहां उनको एक बहुत बड़ी रैली को संबोधित करना था। लगभग 10 बजे राजीव गांधी श्रीपेरंबदूर पहुंचे। जहां धनु, मानव बम बनकर तैयार थी। राजीव गांधी के आने से पहले उस जगह की सिक्युरिटी इंचार्ज अनसुइया को हरे सलवार वाली इस लड़की पर कुछ संदेह हुआ। जो बार-बार आगे आने की कोशिश कर रही थी। अनसुइया ने राजीव गांधी के आने से पहले उसे कुछ पीछे धकेल दिया। राजीव पहुंचे और रैली ग्राउंड की ओर बढ़ने लगे। वो 30 साल की लड़की जिसके हाथ में चंदन की माला थी वो आगे बढ़ने लगी। अनसुइया पीछे धकेलने लगीं तभी पीछे से राजीव गांधी की आवाज आई, प्लीज उनको आने दो।

उस समय राजीव गांधी के सम्मान में मंच से एक गीत गाया जा रहा था। मानव बम धनु ने राजीव गांधी को माला पहनाई और पैर छूने के लिए नीचे झुकी। राजीव गांधी उसे उठाने के लिए नीचे झुके तभी एक धमाका हुआ। वरिष्ठ पत्रकार नीना गोपाल किसी से बात कर रही थीं। नीना गोपाल वो शख्स हैं जो राजीव गांधी के साथ एंबेस्डकर कार में बैठकर श्रीपेरंबदूर पहुंची थीं। नीना बताती हैं, मैं उस समय कुछ दूर खड़े होकर किसी से बात कर रही थी मैंने उस दिन साड़ी पहनी हुई थी। तभी बहरा कर देने वाला एक धमाका हुआ, कुछ देर बाद मैंने देखा मेरी पूरी साड़ी पर खून के छींटे थे।

फोटो सोर्स- गूगल

मैं उस ओर बढ़ी जहां राजीव गांधी खड़े थे। चारो तरफ लाशें ही लाशें ही थीं, लोग चीख रहे थे। जब धुंआ छंटा तो राजीव गांधी की तलाश हुई। जयंती नटराजन उस घटना के बारे में बताती हैं, मैं चारों तरफ देख रही थी इस आशा में कि वहां राजीव गांधी न हो। जयंती की नजर प्रदीप गुप्ता पर गई, उनके बगल में एक औंधा शरीर पड़ा हुआ था। जयंती की मुंह से बस इतना ही निकला, ओह माॅय गाॅड ये तो राजीव गांधी हैं। कुछ ही देर में राजीव गांधी का शरीर मिला जो पूरी तरह से खून से लथपथ था। राजीव गांधी को उनकी घड़ी से पहचान लिया गया। उस धमाके ने बहुत कुछ छीन लिया था एक पति, एक पिता और एक नेता। उस धमाके में राजीव गांधी के अलावा 14 और लोगों की भी मौत हुई थी।

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