अभी कुछ दिन पहले ही दिल्ली की दीवारों पर गौतम गंभीर का एक पोस्टर चिपका हुआ देखा गया था। काम आम आदमी पार्टी के कार्यकर्ताओं का था, ऐसा गौतम गंभीर ने आरोप लगाया था। पोस्टर में लिखा था- लापता, क्या आपने इन्हें देखा है? आखिरी बार इंदौर में जलेबी खाते हुए देखा था। पूरी दिल्ली इन्हें ढूंढ रही है। 15 नवंबर के बाद दिखने वाली इस तस्वीर की कहानी अब पुरानी हो गई है क्योंकि अब गौतम गंभीर का नाम अरुण जेटली स्टेडियम में दिख रहा है।

गंभीर का आरोप था कि यह पोस्टर AAP के कार्यकर्ताओं ने लगाया है,

गंभीर का आरोप था कि यह पोस्टर AAP के कार्यकर्ताओं ने लगाया है

मंगलवार के दिन DDCA ने गौतम गंभीर को एक सम्मान दिया। फिरोजशाह कोटला मैदान या अरुण जेटली स्टेडियम में उनके नाम पर एक स्टैंड का उद्घाटन मंगलवार को किया गया। देर आए लेकिन, दुरुस्त आए। यह कहावत इसलिए भी सटीक है क्योंकि, इसी साल भारत के कप्तान विराट कोहली के नाम पर एक स्टैंड का नाम रखा गया तो, उस वक्त यह बातें जोरों पर होने लगी कि गंभीर ने भारतीय टीम के लिए इतने दिनों तक सेवा दी फिर, उनके नाम  पर कोई स्टैंड क्यों नहीं है? अरुण जेटली स्टेडियम में मोहिंदर अमरनाथ और बिशनसिंह बेदी के नाम पर भी स्टैंड हैं जबकि, वीरेंद्र सहवाग और भारतीय महिला टीम की पूर्व कप्तान अंजुम चोपड़ा के नाम पर गेट हैं। ऐसे में गंभीर के नाम पर अगर कोई चर्चा नहीं हुई तो, यह कहीं न कहीं नाइंसाफी होती।

अपने नाम पर स्टैंड का उद्घाटन करते वक्त गंभीर ने कहा,

‘अरुण जेटली मेरे लिए पिता तुल्य थे और ‘अरुण जेटली स्टेडियम में मेरे नाम पर स्टैंड होना मेरे लिए बड़े गर्व और सौभाग्य की बात है। मैं एपेक्स काउंसिल, अपने फैन्स, दोस्तों और परिजनों का धन्यवाद देता हूँ, जिन्होंने हर कदम पर मेरा साथ दिया।’

इसी पोस्ट के बाद यूजर्स ने गंभीर को ट्रोल करना शुरु कर दिया था।

इसी पोस्ट के बाद यूजर्स ने गंभीर को ट्रोल करना शुरु कर दिया था।

गौतम गंभीर ने DDCA पर सवाल खड़े कर दिए और साथ ही रजत शर्मा पर भी। DDCA के काम करने के तरीके से गौतम गंभीर खुश नहीं दिखे। उन्होंने उत्तरी स्टैंड का नाम उनके नाम पर रखने में देरी के लिए अध्यक्ष रजत शर्मा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, मुझे लगता है कि अध्यक्ष इसका सही जवाब दे सकते हैं क्योंकि इससे पहले मुझे कहा गया था इसका अनावरण भारत बनाम ऑस्ट्रेलिया मैच (मार्च में) के दौरान किया जाएगा। इसके बाद IPL के दौरान यह काम करने के लिए कहा गया। फिर घरेलू मैच में इस काम का अंतिम रुप देने की बात कही गई लेकिन, अब जाकर आखिरकार यह स्टैंड बन गया है।

गौतम गंभीर स्टैंड, अरुण जेटली स्टेडियम, फोटो सोर्स: गूगल

गौतम गंभीर स्टैंड, अरुण जेटली स्टेडियम, फोटो सोर्स: गूगल

दिल्ली की चयनसमिति पर भी गंभीर ने सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि चयनसमिति में ऐसे लोग हैं जिन्होंने दिल्ली के लिए कभी क्रिकेट नहीं खेला। दिल्ली का हाल कर्नाटक और मुंबई जैसा ही हो गया है। जब मैं DDCA निदेशक था तो, इस मसले को उठाया था लेकिन, इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। इस बात से मैं बहुत आहत हुआ। मेरा मानना है कि दिल्ली में कई ऐसे पूर्व खिलाड़ी हैं जो दिल्ली क्रिकेट एसोसिएशन को सेवा देने में सक्षम हैं।

दिल्ली के फिरोजशाह क्रिकेट मैदान से गंभीर की कई यादें जुड़ी हुई हैं। 11 साल की उम्र में DDCA का लीग मैच, साल 2000 में अपना पहला फर्स्ट क्लास मैच हो या फिर रिटायर्ड से पहले अपना आखिरी रणजी मैच, दोनों ही दिल्ली में खेला था। यानि, दिल्ली के इस ग्राउंड से गंभीर का क्रिकेट करियर शुरु हुआ और इसी मैदान पर खत्म भी हो गया। गौतम गंभीर को जलेबी वाली फोटो पर ट्रोल करने वालों की जुबान अब जरुर बंद हो गई है क्योंकि गंभीर ने भारतीय टीम के लिए जो किया है, वह कभी भुलाया नहीं जा सकता है। भारत को दो विश्व कप जिताने में अहम योगदान  देने वाले गंभीर को अब जाकर उनकी मेहनत का प्राइज मिला है।