8 मार्च को दुनिया भर में महिला दिवस मनाया जाता है। महिला दिवस से एक दिन पहले 7 मार्च को गोल्डा मेयर ने इज़राइल के प्रधानमंत्री पद की शपथ लेकर हमेशा के लिए महिला शब्द की परिभाषा को बदल दिया।

वो प्रधानमंत्री जिसे काला जूता पहनना पसंद था

इज़राइल की प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर ने 1971 में भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान भारत को गुप्त तरीके से सैनिक मदद पहुंचाई थी। गोल्डा मेयर ने खुद को कभी भी पुरूषों से कम नहीं समझा था। गोल्डा मेयर कभी नहीं चाहती थी कि उन्हें एक महिला प्रधानमंत्री के रूप में याद किया जाए। गोल्डा से जुड़े हैं, जिससे यह समझा जा सकता है कि गोल्डा की छवी पुरूषों से किसी भी तरह से कमतर नहीं थी। इज़राइल की प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर हमेशा काले जूते पहनना पसंद करती थी। ये बात अलग है कि संतकबीर नगर के जूते मारने वाले सांसद शरद त्रिपाठी के जूते का रंग भी काला ही था। लेकिन दोनों ही नेताओं में जमीन-आसमान का अंतर है। एक तरफ गोल्डा मेयर को दुनिया की राजनीतिक इतिहास में एक उदाहरण के रूप में याद किया जाता है, जबकि शरद त्रिपाठी को राजनीति पर लगे एक गहरे काले धब्बा के रूप में याद किया जाएगा।

गोल्डा मेरे मंत्रिमंडल की अकेली पुरूष थी

गोल्डा के मजबूत छवी को इस बात से समझा जा सकता है कि इज़राइल के पहले प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियों ने कहा था कि गोल्डा मेरे मंत्रिमंडल की अकेली पुरूष थी। गोल्डा मानती थी कि किसी भी शख़्स की पहचान को उसके लिंग से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। 1948 में इज़राइल के आजाद होने के बाद पहली बार 1956 में उनके देश को विदेश मंत्री गोल्डा मेयर के रूप में मिला था। गोल्डा मेयर को विरासत में राजनीति नहीं मिली थी, बल्कि गोल्डा मेयर ने अपनी मेहनत की ताकत पर विदेश मंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक के सफर को पूरा किया था। किसी देश की राजनीति में शायद ऐसा पहली बार हुआ जब किसी महिला को राजनीति से इस्तिफ़ा देने के 5 साल बाद वापस राजनीति में बुलाया गया हो। दरअसल, इज़राइल के तीसरे प्रधानमंत्री की मौत के बाद उस महिला को देश के सबसे बड़े ओहदे की जिम्मेदारी संभालने के लिए बुलाया गया।

रिचर्ड निक्सन ने अपनी आत्मकथा मे गोल्डा के बारे में क्या कहा?

जब पहली बार बतौर प्रधानमंत्री गोल्डा मेयर अमेरिका गई तो वहां के राष्ट्रपति निक्सन गोल्डा से काफी प्रभावित हो गए थे। बाद में निक्सन ने अपनी अपनी आत्मकथा ‘आर एन: द मेमोरीज़ ऑफ़ रिचर्ड निक्सन’ में लिखा था-

“मुझे अच्छी तरह से याद है जब हम दोनों ओवल ऑफ़िस की कुर्सियों पर बैठे और फ़ोटोग्राफ़र हमारी तस्वीरें लेने आए तो गोल्डा मुस्करा रही थीं और दोस्ती भरी बातें कर रही थीं। जैसे ही फ़ोटोग्राफ़र कमरे से विदा हुए, उन्होंने अपने बांए पैर के ऊपर अपना दाहिना पैर रखा, अपनी सिगरेट सुलगाई और बोलीं, ‘मिस्टर प्रेसिडेंट, अब बताइए आप उन विमानों के बारे में क्या कर रहे हैं, जिनकी हमें सख़्त ज़रूरत है? गोल्डा मेयर का व्यवहार एक पुरुष की तरह होता था और वो ये चाहती थीं कि उनके साथ भी एक पुरुष की तरह ही व्यवहार किया जाए।”

इससे पता चलता है कि गोल्डा मेयर एक मजबूत नेता और प्रशासक थी। जब 1971 युद्ध के दौरान अमेरिका पाकिस्तान की मदद कर रहा था, तब गोल्डा मेयर ने भारत को मदद करने की बात कही थी। इससे साफ हो गया था कि गोल्डा इज़राइल को किसी मुल्क से कमतर नहीं समझतीं थी। यही नहीं हर फैसला अपने मन के मुताबिक करती थी।

हर एक आतंकी को चुन-चुन के मारो, चाहें वो किसी भी देश मे क्यूँ न हो

इसके अलावा गोल्डी मेयर ने इज़राइल को वैश्विक स्तर पर एक ऐतिहासिक पहचान दिलाने का काम किया। 1972 में जब म्यूनिख़ ओलंपिक में अरब चरमपंथियों ने ओलंपिक गांव में घुस कर 11 इज़राइली खिलाड़ियों को मार डाला तो गोल्डा ने मोसाद के एजेंटों को आदेश दिया कि इस अपराध को अंजाम देने वाले हर व्यक्ति को, चाहे वो दुनिया के किसा भी कोने में क्यों न हो, चुन-चुन कर मारा जाए। इस ऑपरेशन को ‘रैथ ऑफ गॉड‘ का नाम दिया गया था। आज भी जब भारत या दूसरे देशों में अपने मुल्क के दुश्मनों से बदला लेने की बात होती है, तो गोल्डा के ‘रैथ ऑफ गॉड‘ वाले फैसले का जिक्र किया जाता है।

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