अंतरिक्ष में होने वाली लड़ाइयों, जंगों को अभी तक हमने सिर्फ थियेटर में बैठकर पर्दे पर हालीवुड फिल्मों में देखा है. जमीन पर बैठा एक सनकी मनुष्य बटन दबाता है और अंतरिक्ष से एक खतरनाक हथियार तेजी से जमीन पर आकर एक शहर से टकराता है और पलक झपकते पूरे के पूरे शहर तबाह हो जाते हैं. कई फिल्मों में हमने अमेरिकी सैनिको को लड़ाकू विमानों से अंतरिक्ष में एलियनों की फौज से लड़ते देखा है. तब ये सब देख कर मजा आता था पर कहीं न कहीं ये ख्याल मन में आता था कि सच में ऐसा कभी कुछ हो सकता है क्या? पर हाँ, अब लगता है कि ये सब मुमकिन है. ऐसी भयावह लड़ाईयां भी हो सकती हैं और ऐसे खतरनाक हथियार भी बनाए जा सकते हैं.

हॉलीवुड मूवी की एक प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

असल बात ये है –

हमारी भारतीय सेनाएं तीनों स्तर (धरती, जल और आकाश) में अपने दुश्मनों के छक्के छुड़ाने में सक्षम तो थी ही, पर अब सेनाओं को भविष्य संभावित अंतरिक्ष-युद्ध में भी अजेय बनाने की तैयारी चल रही है. अमेरिका के बाद अब भारत ने भी स्पेस वॉर किए लिए अपनी रक्षा मशीनरी को शक्तिशाली बनाने का काम शुरू कर दिया है.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

स्पेस वॉर के लिए सेना को सशक्त बनाने के इसी क्रम में अब केंद्र की मोदी सरकार ने अंतरिक्ष में होने वाले संभावित युद्ध के लिए आर्म फोर्सेस को तैयार करने के लिए नई एजेंसी के गठन को मंजूरी दी है. इस नई एजेंसी का नाम डिफेंस स्पेस रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (DSRO) रखा गया है. यह एजेंसी स्पेस वॉर की स्थिति में भारत के रक्षा तंत्र के लिए जरूरी उच्चतम तकनीक का विकास करेगी. इसके साथ ही अत्याधुनिक हथियार प्रणालियों से सेना को सशक्त और मजबूत बनाने का काम करेगी.

रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा मामलों पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली कैबिनेट कमेटी(CCS) ने रक्षा अंतरिक्ष अनुसंधान एजेंसी (DSRO) के गठन को मंजूरी दे दी है. इस नई एजेंसी को अंतरिक्ष युद्ध हथियार प्रणालियों और प्रौद्योगिकियों को विकसित करने का काम सौंपा गया है.

मंत्रालय के सूत्रों ने बताया है कि सरकार में यह फैसला हाल ही में लिया गया था. DSRO में एक जॉइंट सेक्रेटरी स्तर का एक वैज्ञानिक मनोनीत किया है जिनके नेतृत्व में अब इस एजेंसी ने अपना आकार लेना शुरू कर दिया है.

कैसे काम करेगी DSRO

इस एजेंसी में वैज्ञानिकों की एक पूरी टीम शामिल होगी, जो सेना के तीनों अंगों के उच्च अधिकारियों के संगठन के साथ मिल कर काम करेगी. इसके साथ ही DSRO का दूसरा मुख्य काम ये होगा कि वो भारतीय रक्षा अंतरिक्ष एजेंसी (DSA) को अनुसंधान एवं विकास कार्यो में सहयोग देगी.

DSA भी एक तरह की स्पेस रक्षा एजेंसी है जिसमें सेना के तीनों अंगों के अधिकारी शामिल होते हैं. DSA का गठन भी अंतरिक्ष युद्ध के लिए किया गया था.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

दरअसल स्पेस वॉर के लिये खुद को तैयार कर रहे देशों की रेस में भारत समेत दुनिया के कई बड़े देश शामिल हैं. सबसे पहले अमेरिका, स्पेस वॉर के संभावित खतरे को भांपते हुए अपनी एक खास स्पेस आर्मी बनाने पर काम कर रहा है. अपने इस खास मिशन की घोषणा करते हुए अमेरिका ने कहा था कि वह 2020 तक स्पेस में होने वाली जंग के लिए सबसे शक्तिशाली फोर्स तैयार कर लेगा.

दुनिया के बड़े जानकारों का मानना है कि अमेरिका ने दुनिया को एक नए जंग के मैदान ‘अंतरिक्ष’ की तरफ मोड़ दिया है. जिसके बाद अंतरिक्ष दुनिया के लिए एक नया अखाड़ा बन जाएगा. जहां सारे देश खुद को सर्वशक्तिमान बनाने की जद्दोजहद में लग जाएंगे. जानकारों का मानना है कि अमेरिका के इस ऐलान के बाद उसके प्रतिद्वंदी चीन, रशिया जल्दी ही इस दिशा में आगे बढ़ेंगे.

प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स- गूगल

स्पेस वॉर की इस रेस में अब भारत भी शामिल हो गया है. क्योंकि भारत हमेशा से चीन को अपने लिए एक खतरे के रूप में देखता आया है. आपको बता दें इस साल मार्च में भारत ने मिशन शक्ति के तहत एक एंटी सैटेलाइट टेस्ट का सफल परीक्षण किया था. इस परीक्षण के जरिये भारत ने चीन समेत दुनिया के सामने अपनी अंतरिक्ष सैटेलाइट को मार गिराने की क्षमता का प्रदर्शन किया था.

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