हेमा मालिनी इन दिनों मथुरा लोकसभा क्षेत्र में अपने चुनाव प्रचार को लेकर व्यस्त हैं। हेमा मालिनी इन दिनों मथुरा में फिल्मी अंदाज में राजनीति कर रही है। यही वजह है कि कभी हेमा मालिनी खेत में जाकर गेहूं की फसल को काटने लगती है तो कभी ट्रैक्टर चलाने लगती है। विकास के मुद्दे पर चुनाव लड़ रही भाजपा उम्मीदवार से जब यह पूछा जाता है कि मथुरा में आपने क्या विकास किया? इस सवाल के जवाब में हेमा मालिनी कहती हैं कि विकास तो बहुत ज्यादा किया लेकिन याद नहीं है।

मथुरा के खेत में गेहूं काटते दिखीा हेमा मालिनी (Image Creadit: Hema Malini Fb page)

अब, एक बार फिर हेमा मालिनी ने विवादस्पद बयान दिया है। हेमा मालिनी ने कहा कि मथुरा के लोग शौचालय में शौच जाना ही नहीं चाहते हैं। हेमा ने कहा कि शौचालय को लोगों ने स्टोर रूम बना लिया है। यह बात हेमा मालिनी ने टीवी 9 के अपने इंटरव्यू में कहा है।

न्यूजलांड्री नाम की वेबसाइट के ग्राउंड रिपोर्ट से यह ज़ाहिर होता है कि हेमा मालिनी के गोद लिए गांव पैठा में दर्जनों घर ऐसे हैं जहां अब तक शौचालय नहीं बना है। जबकि जिनके घरों में शौचालय बना है वो भी इस्तेमाल करने लायक नहीं है।

हेमा मालिनी ने आदर्श ग्राम योजना के तहत तीन गांवों को गोद लिया था। इन गांवों में पैठा व रावल भी शामिल था। हेमा मालिनी के किए गए वायदों को जांचने के लिए द कच्चा चिट्ठा के रिपोर्टर ने रावल गांव जाकर हकीकत जांचने की कोशिश की तो पाया कि रावल गांव के भी कई घरों में शौचालय नहीं बना है। आज से तीन साल पहले रावल गांव को गोद लिया गया था। इसके बावजूद गांव के कई घरों में शौचालय नहीं बना है।

पूरी वीडियो यहाँ देखें-

महिलाओं का कहना है कि शौचालय नहीं बना है

रावल गांव की महिला नैनी को हेमा मालिनी के बयान के बारे में जब पता चला तो कहा कि मेरे घर शौचालय नहीं बना है। नैनी के मुताबिक हेमा मालिनी को एक महिला होने के नाते महिलाओं के दर्द को समझना चाहिए। नैनी ने आगे कहा कि महिला होकर भी शौक से बाहर शौच के लिए नहीं जाती हूं। नैनी ने बताया कि उसके घर आजतक कोई शौचालय नहीं बना है। नैनी की दो जवान बेटियाँ भी है जो आज भी शौचालय के लिए बाहर हीं जाती है। नैनी बताती है कि किसी मां को यह अच्छा नहीं लगेगा कि उसकी जवान बेटी घर से बाहर शौच करने के लिए जाए। नैनी बताती है कि यह उसकी ही मजबूरी नहीं बल्कि जिसके घर शौचालय बना है उसकी भी मजबूरी है कि वो शौच करने के लिए बाहर हीं जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि शौचालय कम पैसे में बना दिया जिसकी वजह से वह टिकाऊ नहीं है।

घर तोड़कर भी कामचलाऊ सड़कें बनी

रावल गांव की नैनी ने यह भी बताया कि जब गांव में सड़क बन रही थी तो उसके घर को तोड़ दिया गया। घर टूटने के बाद भी नैनी को इस बात का भरोसा था कि गांव की सड़कें अच्छी बनेंगी। लेकिन हालात यह है कि गांव की सड़क बनी तो जरूर लेकिन वो सड़क किसी काम की नहीं है। सड़क बनने के कुछ दिनों बाद ही ईंटें अलग होनी शुरू हो गईं। यही नहीं सड़क के किनारे नाले की व्यवस्था सही से नहीं होने की वजह से नाले का पानी सड़क पर आ जाता है। गांव वालों की मानें तो हेमा मालिनी गांव आती है तो गाड़ी से उतरती भी नहीं है। पहली बार जब हेमा मालिनी आई थी तो गांव में पैदल चली थी लेकिन अब गाड़ी से आती है और अपने आस-पास रहने वालों से बात करके निकल जाती है।

गांव में स्वास्थ्य की व्यवस्था

हेमा मालिनी के गोद लिए गांव रावल के लोगों का कहना है कि गांव में सांसद महोदय ने एक स्वास्थ्य केंद्र तो जरूर बना दिया लेकिन यहां डॉक्टर शुरूआत के कुछ दिनों तक तो आएँ लेकिन उसके बाद यहां ताला जड़ दिया गया। रावल में जब से स्वास्थ्य केंद्र बना है, ज्यादातर दिन बंद ही पड़ा रहता है। लोगों को इलाज के लिए यहां से 10 किलोमीटर दूर मथुरा ही जाना होता है।

गांव की अन्य जरूरी व्यवस्थाएं

रावल गांव में सरकारी स्कूल बना है। लेकिन गांव के स्कूल में बिजली नहीं है। बच्चों को बिजली के बगैर स्कूल में बैठकर पढ़ाई करना होता है। इसके अलावा गांव में पीने के पानी के लिए आरओ तो लगाया है लेकिन आरओ से पानी खरीदना गांव के लोगों को महंगा पड़ रहा था। इसके बाद हलांकि अब पानी की टंकी से गांव के लोगों को दिन में दो बार पानी सप्लाई दिया जाता है। गांव के लोग इससे बेहद खुश हैं। इसके अलावा गांव में 40 सोलर लाइटें लगाई गईं लेकिन कुछ दिनों बाद ही सोलर लाइटों का जलना बंद हो गया।

 

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