नागार्जुन हिन्दी और मैथिली के अप्रतिम लेखक और कवि थे। अनेक भाषाओं के ज्ञाता तथा प्रगतिशील विचारधारा के साहित्यकार नागार्जुन ने हिन्दी के अतिरिक्त मैथिली संस्कृत एवं बांग्ला मौलिक रचनाएं भी कीं तथा संस्कृत, मैथिली एवं बांग्ला से अनुवाद कार्य भी किया। साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित नागार्जुन ने मैथिली में यात्री उपनाम से लिखा तथा यह उपनाम उनके मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र के साथ मिल कर एकमेक हो गया।

नागार्जुन, फोटो सोर्स- गूगल

नागार्जुन, फोटो सोर्स- गूगल

चलिए ‘आज की कविता’ में आज आपको पढ़ाते हैं, बाबा नागार्जुन की कविता,

‘यह जेएनयू’

नवल-नवेलियों का
उन्मुक्त लीला-प्रांगण
यह जेएनयू

असल में कहा जाए तो कह ही डालूँ
बड़ी अच्छी है यह जगह
बहुत ही अच्छी
और क्या कहूँ…

सोचता हूँ मैं भी ले लूँ दाखिला
‘टिब्बेटियन’ लेने पर क्यों कोई एतराज करेगा
डाक्टर विमला प्रसाद
डाक्टर नामवर…
डाक्टर मुजीब…
ये सब तो रिकमेंड करेंगे ही
तब नए सिरे से
उपनयन संस्कार होगा मेरा
छात्रावास में कमरा मिल ही जाएगा
वृत्ति की व्यवस्था तो होगी ही
शाबाश! बेटा अर्जुन नागा

सोचता ही जा रहा हूँ
आखिर क्या रखा है इसमें
दरअसल यह जगह है बड़ी शानदार
जे.एन.यू. जे.एन.यू. जे.एन.यू

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