तेलंगाना से आए दिन की खबरें वहाँ की कानून व्यवस्था के ढीलेपन को दर्शा रही है। दो दिन पहले की खबर है जहां वन विभाग की महिला पुलिस अफसर पर भीड़, बरस पड़ती है। कारण पता चलने पर मालूम हुआ कि वहाँ के लोग नहीं चाहते हैं कि किसी भी तरह के पौधे उनकी ज़मीनों पर लगाएँ जाये।

 क्या है खबर?

बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार, दो दिन पहले तेलंगाना के कागजगंज कस्बे में वन-विभाग से कुछ पुलिस अधिकारी वहाँ पौधे लगाने की मुहिम के सिलसिले में गए थे। लेकिन वहाँ की गुस्साई भीड़ उन अधिकारियों पर इस कदर हावी हो गयी कि उन्हीं में से एक वन विभाग की रेंज पुलिस अफसर को भीड़ ने बेरहमी से पीट डाला। ANI द्वारा जारी वीडियो  में ये साफ-साफ देखा जा सकता है कि किस तरह भीड़ ने ट्रैक्टर पर चढ़ी महिला अधिकारी को बेरहमी से पीटा है। रविवार को वहाँ के स्थानीय लोग वन विभाग के पौधे लगाने की मुहिम का विरोध कर रहे थे। इस भीड़ का नेतृत्व कर रहे थे टीआरएस पार्टी (तेलंगाना राष्ट्र समिति) के विधायक के भाई कोनेरू कृष्णा।

वीडियो वायरल होने पर प्रशासन एक्शन में आ गई और कोनेरु के साथ 16 लोगों को पकड़ा गया। इस मामले में दो पुलिस अफ़सरों को भी सस्पेंड किया गया है जो उस टाइम वहाँ पर मौजूद होने के बाद भी उस महिला अफ़सर को बचाने में नाकाम रहे।

सरकार द्वारा चलाई  जा रही योजना ‘कालेश्वरम प्रोजेक्ट’ एक सिंचाई योजना है जिसे पिछले हफ्ते ही शुरू किया गया था।लेकिन वहाँ के स्थानीय निवासी उस ज़मीन पर सरकार की यह योजना नहीं चाहते थे। इसलिए जब विभाग की महिला अधिकारी, पुलिस और वन सुरक्षाकर्मियों के साथ वहां पहुंची तो उन पर हमला कर दिया गया।

घटना के सामने आने पर ‘तेलंगाना राष्ट्र समिति’ के अध्यक्ष ने इस मामले पर अपना गुस्सा ज़ाहिर करते हुए ट्वीट किया –

मैं कोनेरु कृष्ण के अत्याचारपूर्ण व्यवहार की कड़ी निंदा करता हूं जिन्होंने एक वन अधिकारी पर हमला किया जो अपना काम कर रही था।

इसी तरह की एक और खबर जो भद्राद्री कोठागुदम जिला तेलंगाना की है, जहां वन-विभाग के दो कर्मियों को भीड़ ने अपनी चपेट में ले लिया। इस जिले के लोगों ने सोमवार रात में वन-विभाग के अधिकारियों को हद से ज़्यादा पीटा, क्योंकि ये लोग उस ज़मीन पर सरकार की सिंचाई योजना का काम करने के लिए वहाँ गए थे और जैसे ही गाँव के लोगों को पता चला तो उन्होंने बुरी तरह से उन लड़कों को रॉड और डंडों से पीट दिया।

वन विभाग कर्मियों के चोट के निशान, फोटो सोर्स- ANI

भीड़ का कानून से न डरना क्यों बढ़ता जा रहा है?

इन दोनों खबरों में दो बात देखने को मिली। पहली ये कि घटना के समय पुलिस अधिकारी के होने के बाद भी वहाँ के लोगों ने कानून हाथ में लिया। दूसरा ये कि, ऐसे किसी भी महिला अधिकारी पर एक साथ भीड़ का हावी हो जाना और मार पीट करना पुरुषवादी सोच को दर्शाता है। सबसे अहम बात ये है कि इस भीड़ को भड़काने का काम जब कोई राजनीतिक चेहरा करता है तब ऐसे लोग कानून को दबा देते हैं।

आज भीड़ इस तरह कानून हाथ में ले रही है मानो पुलिस-प्रशासन का कोई डर ही नहीं रह गया है। समाज में बैठे चंद गुंडे ही लोगों को भड़का कर ऐसे मामलों को अंजाम देते हैं। हालत इतनी खस्ता हो चुकी है कि समय रहते अगर इन मामलों पर एक्शन नही लिया गया तो बहुत जल्द बाकि बचा विश्वास भी कानून पर से खत्म हो चुका होगा।

सरकार क्या कर रही है ऐसे मुद्दों पर?

जब सरकार के मुलाजिमों पर इस तरह के खटिया खड़ी कर देने वाले मामले सामने आते हैं तब ऐसा लगता है कि पुलिस जैसी मजबूत कड़ी जो समाज में अपना एक अस्तित्व रखती है उनके साथ मार-पीट का मामला आए तो बंदा सोचने पर मजबूर हो जाता है कि क्यों प्रशासन सचेत नहीं हो पा रही है? आखिर किसने भीड़ को हक़ दिया किसी भी महिला पुलिस अधिकारी या फिर किसी भी अधिकारी को मारने का? ऐसे में ज़रूरी हो जाता है कि सरकार इस तरह के मामलो में कड़े-से-कड़े कदम उठाए। ताकि जिस तरह पहले लोग पुलिस पर विश्वास करते थे, उनकी इज्ज़त करते थे और किसी जुर्म को करने से पहले कानून का जो डर हुआ करता था उसका वैसा हो जाना बेहद ज़रूरी है। तभी इस तरह की भीड़ का पैदा होना बंद हो पाएगा।

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