बात मेरठ के दो मोहल्लों (प्रह्लाद नगर और इस्लामाबाद ) की है। जहां पिछले कुछ समय से हिन्दू पलायन की बातें बड़ी ज़ोर-शोर से चल रही हैं। प्रह्लाद नगर, मेरठ शहर के बीचो-बीच स्थित एक मोहल्ला, जहां पिछले एक हफ़्ते से हिंदुओं के ‘पलायन’ को लेकर चर्चा हो रही है। इस पलायन के पीछे की वजह मुस्लिम समुदाय का डर बताया जा रहा है क्योंकि इलाक़े में मुस्लिम आबादी काफ़ी बढ़ गई है।

दरअसल मेरठ मेें अचानक से पिछले हफ्ते स्थानीय नेताओं से लेकर सोशल मीडिया तक ये बहस होने लगी कि यहां के स्थानीय और पुश्तैनी हिन्दू लोग छेड़खानी, गुंडागर्दी, चोरी, छिनैती जैसी अराजक परिस्थितियों के कारण अपना घर बेच कर जा रहे हैं।

ये जितनी भी परेशानियों का ज़िक्र ऊपर किया गया है, सुनने में ये परेशानियाँ बहुत जानी-पहचानी लगती हैं। जो हम रोज़ अपने चारों ओर देखते हैं। फिर इसको धर्म से जोड़ देना और ये कहना कि हिन्दू इन परेशानियों का शिकार हो रहे हैं, कितना हद तक सही है?

क्योंकि हमारे देश का कड़वा सच तो यही है कि अगर हिन्दू परेशानी में है तो वो मुसलमान की वजह से और अगर मुसलमान तकलीफ में है तो वो हिन्दू की वजह से। लेकिन सच तो ये है कि हम एक घटिया तर्क से बने हुए समाज में रह रहे हैं और देश की कानून व्यवस्था की तरह ही हम अपनी सोच को भी लंगड़ा बना चुके हैं। शायद तभी आजकल सब कुछ धर्म के इर्द-गिर्द ही घूमता नज़र आता है।

गरीबी, शिक्षा, बलात्कार, सरकारी सुविधाओं का लाचार होना, चोरी, हत्या जैसी परेशानियों से तो मानो हम कब के ऊब गए हैं और अब धर्म की ठेकेदारी करने पर उतर गए हैं।

दरअसल मेरठ में तमाम मकानों के बाहर ‘मकान बिकाऊ है’ जैसे इश्तिहार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं। हिन्दू संगठनों और बीजेपी के कई नेता भी इस मामले में चिंता जताते हुए बयान देने लगे। मामले की शिकायत ‘नमो ऐप’ के ज़रिए प्रधानमंत्री कार्यालय तक भी की गई।

मकानों के बाहर लटकते बोर्ड, फोटो सोर्स: गूगल

अब यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जब सहारनपुर पहुंचे तो उनसे भी इस पलायन के बारे में सवाल पूछा गया। सीएम ने अपने जवाब में कहा कि, ‘कोई पलायन नहीं है। हमारे रहते भला कौन हिन्दू पलायन कर सकता है।’
दिलचस्प बात ये है कि योगी आदित्यनाथ के इस बयान के बाद ‘पलायन’ शब्द जैसे यहां की फ़िजां से ग़ायब ही हो गया। लोग अराजकता, छेड़खानी, ट्रैफ़िक समस्या, मकान बेचने जैसी तमाम बातें अब भी कर रहे हैं लेकिन यह कहने को कोई तैयार नहीं है कि यहां से कोई ‘पलायन’ हुआ है।

वो लोग भी नहीं जिन्होंने इस मुद्दे को कुछ दिन पहले ही ज़ोर-शोर से उठाया था। यहां तक कि ‘मकान बिकाऊ है’ वाले इश्तेहार भी कई जगह से मिटा दिये गए हैं। अब सवाल ये है कि यह कड़वाहट जो धर्म के नाम पर इस इलाके में फैल रही है यह कहीं किसी और की फैलाई हुई गंध तो नहीं हैं? मीडिया से हुई कुछ स्थानीय लोगों की बातचीत तो यही इशारा करती है।

इस्लामाबाद के मुस्लिम निवासी, फोटो सोर्स: गूगल

चूकी मामला गंभीर होने की वजह से मेरठ के दो मोहल्ले इस्लामाबाद और प्रहलादनगर के बीच पुलिस बैरिकेडिंग कर दी गयी है। दोनों मोहल्लों के बीच गाते लगवाने की बात भी चल रही है। अब इस बात पर इस्लामाबाद में रहने वाले साठ साल के अब्दुल सलाम कहते हैं कि:

“गेट क्यों, हम तो कह रहे हैं कि दीवार ही खड़ी कर दो। जब रिश्तों में ही दीवारें खड़ी की जा रही हैं तो ज़मीन पर भी खड़ी कर दो। बचपन से हम लोग यहां रह रहे हैं। हिन्दुओं-मुसलमानों की तीसरी पीढ़ी है, सब साथ रहे हैं। कभी कोई आपसी विवाद हुआ हो तो बताइए। इसे आप पुलिस थाने में जाकर पता कर सकते हैं। कोई बताए कि मुसलमानों के डर से किसी ने घर बेचा हो। सिर्फ़ राजनीति कर रहे हैं कुछ लोग और कुछ नहीं।”

वहीं हार्डवेयर की दुकान चलाने वाले दीपक सिरोही का घर भी प्रह्लाद नगर में था। वे अपना मकान कुछ साल पहले बेच दिए और मेरठ के ही एक पॉश इलाक़े में नया मकान बनवाया।

दीपक सिरोही ने मीडिया से हुई बातचीत में बताया कि:

“परिवार बड़ा होता गया, मकान छोटा पड़ने लगा। लेकिन ये भी सही बात है कि पिछले कुछ दिनों से यहां अराजकता भी बढ़ रही है। पुलिस केस वगैरह इसलिए नहीं होते कि अराजकता फैलाने वालों को तो कोई पकड़ नहीं पाता और मोहल्ले के लोगों के बीच ऐसी कोई बड़ी घटना कभी हुई नहीं। छोटी-मोटी घटनाएं आपस में सुलझ ही जाती हैं।”

एक और स्थानीय निवासी दिनेश कुमार कहते हैं कि:

“लोगों ने अपनी सहूलियत से मकान बेचे हैं। परिवार बड़े हो गए और ये इलाक़ा सँकरा है ही। बाहर जाकर नई कॉलोनियों में लोगों ने ज़मीन ख़रीदी और मकान बनवाए। मुसलमानों को बेचने के पीछे सिर्फ़ ये वजह है कि उन्होंने ज़्यादा पैसे दिए। हिन्दुओं ने ज़्यादा पैसे दिए होते तो मकान उन्हीं को बेचा जाता।”

दिनेश आगे बताते हैं कि छेड़छाड़ और अराजकता की बात तो सच है लेकिन:

“ऐसा मुसलमान लड़के ही करते हैं, ये कहना ठीक नहीं है। हां, स्टंट करने वाले और ग़लत हरकतें करने वाले तमाम लड़के इस्लामाबाद की ओर से ही आते हैं।”

बीबीसी हिन्दी की एक रिपोर्ट में बताया गया कि इन मोहल्लों का जायजा लेते वक़्त एक बात सामने आई। मेरठ के पटेल नगर इलाक़े में रहने वाले अशोक जॉली कहते हैं कि “हिन्दुओं के मोहल्लों में कब्ज़ा करने के पीछे लंबे समय से एक सोची समझी साज़िश रची जा रही है। पहले कोई एक मुसलमान महंगे दाम पर ज़मीन ख़रीदेगा। फिर हिन्दू वहां से पलायन शुरू कर देते हैं। फिर पलायन कर रहे हिंदुओं के मकानों को धीरे-धीरे मुस्लिम खरीदने लगते हैं।”

इलाके की एक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

प्रह्लाद नगर में हिन्दू समुदाय के लोगों ने एक समिति भी बनाई थी जो हिन्दुओं के मकान ख़रीदती थी। लेकिन स्थानीय लोगों के मुताबिक, धीरे-धीरे यह समिति ही भ्रष्टाचार का ज़रिया बन गई।
एक और नागरिक ने बताया कि “समाज के नाम पर हिन्दुओं की ज़मीनें तो ख़रीद लीं और बाद में ख़ुद ही महंगे दामों पर मुसलमानों को बेच दिया।”

इस समिति के बारे में जानने की कोशिश की गई लेकिन समिति के सदस्य और अधिकारी बातचीत को तैयार नहीं हुए।
अब ये सब पढ़ कर तो साफ समझ आता है कि ये सब धर्म के नाम पर बंटवारा करने की एक गंदी राजनीति है जो आज कल हमारे देश में काफी ट्रेंड कर रही है। अफसोस की बात ये है कि हिन्दू और मुस्लिम इलाकों के बीच गेट लगा देना क्या चोरी, बलात्कार, हत्या जैसी समस्याओं का समाधान है?

 

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