आईसीसी यानि कि अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट परिषद् ने जिम्बाब्वे के ऊपर नियमों का उल्लंघन करने की वजह से तत्काल प्रभाव से सस्पेंड कर दिया है. लन्दन में हुई सालाना प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह फैसला लिया गया है. आईसीसी ने यहाँ भी बताया कि जिम्बाब्वे पर लिया गया ये फैसला सभी की सहमति से लिया गया है.

क्यों लिया गया ऐसा फैसला?

आईसीसी ने अपने इस फैसले के पीछे की वजह भी बतायी है. आईसीसी ने बताया कि जिम्‍बाब्‍वे क्रिकेट लोकतांत्रिक तरीके से निष्‍पक्ष चुनाव कराने का माहौल तैयार करने और क्रिकेट के प्रशासन में सरकार के दखल को दूर रखने में नाकाम रहा है. आईसीसी का यह ट्वीट देखिये:

दरअसल आईसीसी ने यह फैसला वहां के क्रिकेट बोर्ड के सरकार द्वारा निलंबित किये जाने के बाद लिया. कमाल की बात है कि यह फैसला ऐसे समय में लिया गया है जब जिम्बाब्वे और आयरलैंड के बीच वन-डे सीरीज चल रही थी. जिम्बाब्वे के अलावा दो और देशों की क्रिकेट बोर्ड को भी सस्पेंड कर दिया गया है. ये देश हैं क्रोएशिया और जाम्बिया.

अधिकारियों ने क्या कहा?

आईसीसी के चैयरमैन शशांक मनोहर का भी इस मामले पर बयान आया है. उन्होंने इस बैन को लेकर कहा है कि:

‘किसी सदस्‍य को सस्‍पेंड करने का फैसला हम हल्‍के में नहीं लेते लेकिन, हमें खेल को राजनीतिक दखलअंदाजी से दूर रखना ही होगा. जिम्‍बाब्‍वे में जो कुछ भी हुआ वह आईसीसी के संविधान का गंभीर उल्‍लंघन है और हम इसे अनदेखा नहीं कर सकते. आईसीसी चाहता है कि जिम्‍बाब्‍वे में आईसीसी के संविधान के मुताबिक क्रिकेट जारी रहे.’

बैन लगने पर क्या होगा?

अब बैन लगने के साथ ही सालाना आईसीसी की तरफ से ज़िम्बाब्वे, जाम्बिया और क्रोएशिया बोर्ड को भेजी जानी वाली रकम पर रोक लग जायेगी. इसके अलावा इन दोनों देशों के ऊपर किसी भी आईसीसी इवेंट में खेलने पर भी पाबंदी लग गयी है. बुरा तो जिम्बाब्वे के साथ हुआ है. जिम्बाब्वे को उम्मीद थी कि अगले साल होने वाले पुरुषों के टी-20 वर्ल्‍ड कप के क्‍वालिफायर में वह जगह बनाएगा. लेकिन, अब इस फैसले के बाद जिम्बाब्वे के इस सपने पर भी ग्रहण लग गया है. जिम्‍बाब्‍वे को अगले साल जनवरी में इंडिया से भी 3 मैचों की टी-20 सीरीज खेलनी थी. लेकिन जिम्‍बाब्‍वे क्रिकेट के सस्‍पेंड होने से अब यह सीरीज भी मुमकिन दिख नहीं रही है.

वैसे भी काफी समय से जिम्बाब्वे क्रिकेट के दिन अच्छे नहीं चल रहे थे. टीम के लगातार खराब प्रदर्शन की वजह से जिम्बाब्वे टीम से टेस्ट टीम का दर्ज़ा छीनने की भी आवाज़ उठाई जा रही थी.