एक कहावत है कि इंसान के लिए इशारा काफी है। वो इशारा जो कभी बातों से, कभी भावों से तो कभी आंखों से सामने वाले को अपने मन की बात कह देता है। अक्सर एक प्रेमी अपनी प्रेमिका से इशारों ही इशारों में अपने दिल की बात कह देता हैं। लेकिन सिर्फ प्यार करने वाले ही इशारों-इशारों में अपनी बात नहीं कहते हैं, बल्कि नफरत करने वाले भी इशारों से अपने विचारों को लोगों के बीच फैला देते हैं।

नरेंद्र मोदी ने वही इशारा साध्वी प्रज्ञा के विवादित बोल पर अपना बयान देकर किया है। दरअसल, साध्वी प्रज्ञा ने पिछले दिनों शहीद हेमंत करकरे के बारे में कहा था कि करकरे को अपने कर्मों की सजा मिली। यही नहीं शहीद के बारे में साध्वी ने यह भी कहा कि करकरे हमारे श्राप से मरे हैं।

साध्वी के इस विवादित बोल के बाद भाजपा ने सफाई में कहा कि पार्टी साध्वी के विचारों से असहमत है। भाजपा ने कहा कि हमारी पार्टी शुरू से हेमंत करकरे को शहीद मानती थी, मानती है और मानती रहेगी। इस बयान के बाद जब भारतीय जनता पार्टी पर शहीदों के अपमान का आरोप लगा तो प्रधानमंत्री मोदी खुद पार्टी के बचाव में सामने आ गए।

प्रधानमंत्री मोदी ने साध्वी प्रज्ञा को टिकट देने के मामले में एक इंटरव्यू में कहा कि यह हिंदुओं को आंतकवादी बताने वालों को जवाब है।  उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने 5 हजार साल पुरानी संस्कृति जो ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ पर विश्वास करती है उस पर आतंकवाद का धब्बा लगाया। यह कांग्रेस के लिए महंगा साबित होगा।

मोदी का यह बयान देश भर में फैले लाखों भगवा समर्थकों के लिए एक इशारा था। मोदी का इतना कहना था कि अगले ही दिन उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से भाजपा नेता रंजीत बहादुर श्रीवास्तव ने सभी सीमाओं को तोड़ते हुए कहा कि अगर मुस्लिमों की नस्लों को बर्बाद करना चाहते हैं तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को वोट दें।

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इतना ही नहीं मुस्लिमों के खिलाफ भड़काऊ बयानबाजी के मामले में पानी सिर से ऊपर तब चला गया जब प्रधानमंत्री मोदी के बयान के कुछ ही देर बाद केरल के बीजेपी स्टेट प्रेसिडेंट पीएस श्रीधरन पिल्लई ने रविवार को अतींगल में भाषण के दौरान कहा कि मुस्लिम लोगों के कपड़े उतार कर पहचाना जा सकता है कि वह मुसलमान हैं या नहीं है!

इन सभी बयानों से साफ जाहिर होता है कि भाजपा 2019 लोकसभा चुनाव में वोटों का पोलराइजेशन करना चाह रही है। देश के प्रधानमंत्री भले ही संवैधानिक पद पर बैठे हों पर उन्होंने वोटबैंक की राजनीति के लिए संविधान के बिलकुल विपरीत जाकर समाज को तोड़ने वाली ताकतों को प्रोत्साहन देने का काम किया है। इसी तरह के प्रोत्साहन ने बुलंदशहर में इंस्पेक्टर सुबोध कुमार की जान ली थी। यही वो प्रोत्साहन था जिसने पहलू खां की जान ले ली थी।

इस पहले भी हमने देखा कि चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा नेता व यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को हिंदू व मुस्लिम बयानों की वजह से चुनाव आयोग द्वारा नोटिस भेजा गया। यही नहीं चुनाव आयोग ने योगी के चुनाव प्रचार पर भी कुछ दिनों के लिए रोक लगा दिया।

दरअसल, योगी ने लोकसभा चुनावों की तुलना इस्लाम में अहम शख्सियत ‘अली और हिंदू देवता ‘बजरंगबली’ के बीच मुकाबले से की थी। भाजपा नेता ने कहा था, ”अगर कांग्रेस, सपा, बसपा को अली पर विश्वास है तो हमें भी बजरंग बली पर विश्वास है।” योगी ने देवबंद में बसपा प्रमुख मायावती के उस भाषण की तरफ इशारा करते हुए यह टिप्पणी की थी जिसमें मायावती ने मुस्लिमों से सपा-बसपा गठबंधन को वोट देने की अपील की थी।

ऐसे वक्त में नेता जब वोटों के लिए इतना घटिया बयान दे रहे हों तो हमें सतर्क और जागरूक रहने की जरूरत है। हमारी जागरूकता और आपसी एकता ही नेताओं के बदजूबानी पर अंकुश लगा सकते हैं।