अगर आप सोचते हैं कि कोई पार्टी उसमें मौजूद नेताओं की वजह से चलती है तो आप गलत हैं. अगर आप सोचते हैं कि सत्ता में कोई पार्टी विकास और अपने पूरे किए वादों की वजह से आती है तब भी आप गलत है. हमारा देश नौकरशाहों की वजह से चलता है और आज के दौर में अगर कोई पार्टी सत्ता में आती है तो उसका श्रेय पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ-साथ आईटी विभाग के लोगों को भी जाता है. ये कहानी है दीपक दास की.

दीपक दास फोटो सोर्स गूगल

दीपक ने बताया की उसे सोशल मीडिया की ट्रेनिंग बीजेपी की आईटी सेल ने कोलकाता में दिया था. दीपक ने यह भी बताया-

“मैंने हावड़ा में पार्टी अध्यक्ष अमित शाह की अध्यक्षता वाले एक सत्र में भाग लिया था. उस सत्र में हमें आईटी योद्धा कहा गया था.”

कूचबिहार के 36 वर्षीय दीपक दास एक ऐसे मंझे हुए खिलाड़ी हैं जिनपर इस वक़्त बहुत प्रेशर है. कूचबिहार में बीजेपी अगर जीतती है तो इनका बहुत बड़ा योगदान होगा क्योंकि पूरे कूचबिहार के बीजेपी का आईटी विभाग इन्होने ही संभाल रखा है.

“मैं पार्टी का जिला आईटी सेल संयोजक हूं. मैं पार्टी के 1114 व्हाट्सएप ग्रुप का ऐडमिन हूँ और पार्टी के फेसबुक पेज का भी प्रबन्धक हूं. इसके साथ ही पार्टी का ट्वीटर भी मैं ही मैनेज करता हूँ.” – दास ने बताया

 

उनका कहना है कि उनके जैसे और भी कर्मठ व्यक्ति हैं जिनके बदौलत वह लोगों तक पहुँचते हैं जहां कई बार सरकार भी नहीं पहुँचती पर सोशल मीडिया के जरिये वो उन तक पहुँचते है. कई ऐसी जगहें भी है जहां सोशल मीडिया एक खुफिया हथियार का काम करता है और लोगों को सरकार द्वारा किए गए विकास कार्यों के बारे में बताता है.

दास ने बताया-

“मैं व्हाट्सएप पर 229 ग्रुप का ऐडमिन हूँ एक नंबर से जबकि दूसरे नंबर से 885 दूसरे ग्रुप का संचालन करता हूँ. सभी ग्रुप में कम से कम 30 लोग जुड़े हैं और अधिकतर संख्या 250 की है. ये संख्या हर दिन बदलती रहती है जब कुछ लोग ग्रुप छोड़ कर जाते हैं और कुछ लोग ग्रुप में वापस से जुडते हैं. मैं सुबह के 6 बजे से व्यस्त रहता हूँ.जिस दिन पाकिस्तान में एयर स्ट्राइक हुआ था उस दिन हमलोग 24 घंटे काम किए थे.”

दीपक दास की शादी हो चुकी है और उनकी एक 5 साल की बेटी भी है.

“शुरुआत में हमे एक घर से दूसरे घर तक जाना होता था और सरकार के द्वारा किए गए काम और उनके योजनाओं के बारे में बताना पड़ता था. इस दौरान हमे सभी परिवार वालों से उनका स्मार्टफोन का नंबर मिल गया. पार्टी के नेशनल ऑनलाइन मेम्बरशिप कैम्पेन के जरिये भी हमे काफी लोगों का नंबर मिला.”

 

दीपका कक्षा 12वी तक की पढ़ाई किए हैं. आर्थिक तंगी के कारण वह आगे की पढ़ाई नहीं कर पाये. 2014 में वह बीजेपी से जुड़े जब मोदी जी ने उन्हें ब्लॉक का जनरल सेक्रेटरी बनाया. 2015 में सरकार ने मुझे 10000 का एक स्मर्ट्फोन दिलाया उसके बाद से मैं सोशल मीडिया पर पार्टी का प्रचार करना शुरू कर दिया. पार्टी मुझे कहीं भी आने जाने का खर्च देती है.

कूचबिहार में उनके अंदर 40 लोग और काम करते हैं जिनके पास स्मार्टफोन है और डीएसएलआर कैमरा है. ये दोनों चीज़ें उन्होने भाड़े पर ले रखा है. उनका कहना है कि उनके पास बाइक है पर वह उसे इसलिए नहीं चलाते हैं क्योंकि उन्हे अपना हाथ हर वक़्त फ्री रखना होता है क्योंकि पार्टी की तरफ से कभी भी मैसेज आ सकता है जिसे वह लाइक करके शेयर करते हैं. ये काम तत्काल होना ज़रूरी होता है जिसके लिए वह ज़्यादातर समय फोन पर आँखें टिका कर रखते हैं.

फोटो सोर्स गूगल

दीपक ने यह भी स्वीकारा है कि फ़ेक अकाउंट का इस्तेमाल किया जाता है. उन्होने यह भी कहा कि वे और उनके साथ काम करने वाले लोगों का आधिकारिक अकाउंट है और वह फ़ेक अकाउंट का इस्तेमाल नहीं करते हैं. कुछ लोग ऐसे भी है जो अपने अकाउंट से बीजेपी के लिए कुछ भी बोलने में कतराते हैं. कुछ ऐसे लोग भी हैं जो तृणमूल के आईटी सेल से जुड़े हुए हैं और वहाँ की खबर दीपक तक पहुंचाते हैं.

“हमारा नेटवर्क हर जगह फैला हुआ है. हमारे तक विरोधी पार्टियों की फोटो और खबरें पहुँच जाती है जब भी वो कोई स्कैंडल में फंसते हैं. अभी कुछ दिन पहले ही एक विरोधी लीडर का फोटो हमारे पास आया था जो कि आपत्तिजनक स्थिति में पाये गए थे जिस फोटो को हमने वायरल किया.”

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