अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस वक्त भारत को किस नजर से देखा जा रहा है इसका अंदाजा सभी को है । लेकिन इसके बावजूद कभी-कभी भारत को किनारे करने की जरूर कोशिश की गई है। यह कोशिश जब भी होती है तो भारत के साथ एक देश हमेशा से खड़ा रहता है। वह देश भारत का सबसे जिगरी दोस्तों में से एक है और उस देश का नाम है मालदीव। मालदीव पर कभी भी आंख बंद करके भरोसा किया जा सकता है। चाहे कश्‍मीर का मुद्दा हो या फिर हिंद महासागर के विवाद, मालदीव की आवाज भारत के पक्ष में ही उठी है। ताजा घटना ऑर्गनाइजेशन ऑफ इस्‍लामिक कॉर्पोरेशन (OIC) का है।

जहां इस्‍लामोफोबिया को आधार बनाकर भारत को किनारे करने की साजिश रची गई थी। इन सबके पीछे भारत का सबसे बड़ा दुश्मन देश पाकिस्‍तान का हाथ था। लेकिन पाकिसतान के लिए बड़े अफसोस कि बात है कि उसने भारत को फंसाने के लिए जो पैंतरा चला था, उसे मालदीव ने फेल कर दिया। मालदीव ने सिर्फ इतना ही कहा कि इसके लिए किसी एक देश को दोष देना ठीक नहीं।

मालदीव IOC के अंदर ऐसे किसी ऐक्शन का समर्थन नहीं करेगा जिसमें भारत को निशाना बनाया जाएगा। मालदीव के जवाब के बाद पाकिस्तान की उम्मीदों पर पानी फिर गया लेकिन यह पहला ऐसा मामला नहीं है जब मालदीव ने पाकिस्तानी मंसूबों को भारत के खिलाफ कामयाब नहीं होने दिया है बल्कि इससे पहले जब कश्मीर का मामला चल रहा था तो मालदीव का बयान आया कि यह भारत का अंदरूनी मसला है और हम इसमें कोई हस्तक्षेप नहीं करेंगे।

जैसा कि सबको पता है कि कश्मीर मुद्दे को लेकर पाकिस्‍तान इंटरनेशनल लेवल पर हाईलाइट करने की कोशिश करता रहा लेकिन, मालदीव ने इसका लगातार विरोध किया है। पिछले साल मालदीव में साउथ एशियन स्‍पीकर्स समिट हुई थी। इसमें पाकिस्‍तानी प्रतिनिधि ने कश्‍मीर का मुद्दा उठाने की कोशिश तो मालदीव के स्‍पीकर मोहम्‍मद नाशीद ने उन्‍हें बुरी तरह फटकार लगा दिया था। पाकिस्‍तान की कश्‍मीर से जुड़ी हर बात को कार्यवाही से बाहर करते हुए उन्‍होंने कहा था कि

“कश्‍मीर भारत का आंतरिक मामला है। मालदीव की कश्‍मीर पर पोजिशन 1947 से यही है।”

यही नहीं कुछ ऐसा ही हालात तब भी हुआ जब पाकिस्तान और इस्लामिक देशों ने, भारत सरकार द्वारा संविधान के अनुच्‍छेद 370 को खत्‍म करने का फैसला किया तो उसका विरोध किया। इस्‍लामिक देशों की ओर से कड़े शब्‍दों के इसकी आलोचना की गई। बावजूद इसके तब भी मालदीव पूरी तरह से भारत के साथ खड़ा था। मालदीव की सरकार ने एक आधिकारिक बयान में कहा था,

“भारत सरकार ने भारतीय संविधान के अनुच्‍छेद 370 के तहत जो फैसला किया है, उसे मालदीव एक आंतरिक मामला मानता है।” इसमें कहा गया था कि “हम मानते हैं कि हर संप्रभु देश को अपनी जरूरत के हिसाब से कानून में परिवर्तन का अधिकार है।”

चलिए अब एक और घटना भी जान लीजिए जब मालदीव भारत के साथ कंधे से कंधे मिलाकर खड़ा रहा। यह मामला था हिंद महासागर में स्थिरता को लेकर।
हिंद महासागर में शांति और स्थिरता को लेकर भी दोनों देशों की राय एक है। इस मसले पर मालदीव के विदेश मंत्री को इसी साल जनवरी में यह कहते हुए सुना गया था,

“हमारे भारत से बेहतरीन रिश्‍ते हैं। दिल्‍ली ने पिछले साल कई प्रोजेक्‍ट्स के लिए पैसा दिया था। आर्टिकल 370 पर भारत का समर्थन करने वाला भारत पहला देश था।”

2018 में यानी दो साल पहले, मालदीव के राष्‍ट्रपति इब्राहिम मोहम्‍मद सोलिह भारत दौरे पर आए थे। शपथ लेने के 15 दिन के भीतर उन्‍होंने नई दिल्‍ली के लिए उड़ान भरी थी। तीन दिन के अपने दौरे में उन्‍होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर कई प्रोजेक्‍ट्स के लिए मदद मांगी थी। भारत ने उन्‍हें पूरी मदद का भरोसा दिया था।

मालदीव जैसे दोस्‍त की मदद करने में भारत भी पीछे नहीं रहा। पिछले महीने, कोरोना वायरस से जूझ रहे मालदीव के लिए भारत ने ‘ऑपरेशन संजीवनी’ चलाया था। 18 घंटे के इस ऑपरेशन के जरिए भारतीय वायुसेना ने नई दिल्‍ली, मुंबई, चेन्‍नई और मदुरै से 6.2 टन जरूरी दवाएं और अस्‍पताल की चीजें मालदीव को भेजी थीं।

मालदीव के विदेश मंत्री अब्‍दुल्‍ला शहिद ने भारत को तब ‘दोस्‍त और पार्टनर’ करार दिया था। उन्‍होंने खासकर पीएम नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस जयशंकर का शुक्रिया अदा किया था। इस तरह से देखा जाए तो भारत को मालदीव जैसा बेहतर दोस्त मिला है। हर बार भारत का साथ दिया और थोड़ा भी इस बात की भनक तक नहीं लगने दिया कि आखिर क्यों भारत के साथ हमेशा ही वह खड़ा रहता है।