जैसा हम सभी जानते हैं कि, जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हट चुका है। आर्टिकल के हटने की देर नहीं थी कि बहुत से लोगों ने कश्मीर में ज़मीन लेने की बात तक कहने शुरु कर दिए थे। फिर चाहे वो किसी भी पार्टी के नेता हों या फिर गैर-कश्मीरी क्यों न हो। इन सब मामलों के बीच कुछ नेता ऐसे भी थे जिन्होंने कश्मीर में ज़मीन लेने या फिर वहां की लड़की को बहू बनाने जैसी साफ-सुथरी सोच को भी प्रस्तुत किया था।

भले ही जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हट गई हो, लेकिन वहां जमीन खरीदने में फंस सकता पेंच
कश्मीर घाटी की तस्वीर,फोटो सोर्स:गूगल

क्यों टूटा ज़मीन लेने का ख़्वाब?

इस समय घाटी में आर्टिकल 370 के हटने के बाद जो माहौल है, उससे वहाँ के हालात के बिगड़ने की आशंका बनी हुई है। वहाँ के माहौल को खराब करने में नेताओं के बयान पूरा-पूरा आग में घी डालने वाला काम कर रहा है।

इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए, सरकार ने घाटी में ज़मीन लेने का सपना देख रहे दूसरे राज्यों के लोगों को झटका दे दिया। दरअसल घाटी के लोग चाहते हैं कि वहाँ पर किसी दूसरे राज्य के लोगों को इतनी आसानी से ज़मीन न दी जाए। क्योंकि इससे वहाँ के स्थानीय लोगों के लिए कई मुश्किलें खड़ी हो सकती है। इसीलिए कश्मीर में ज़मीन लेने जैसे मामलों पर फिलहाल के लिए रोक लगा दी गयी है।

इस पूरे मामले को जम्मू-कश्मीर के पूर्व उप-मुख्यमंत्री रह चुके निर्मल सिंह ने विस्तार से समझाया। निर्मल सिंह ने घाटी के लोगों की परेशानियों को समझते हुए, केंद्र सरकार के सामने उनकी सारी दिक्कतों को रखा और डोमिसाइल प्रावधान को लाने की बात कही है। अगर इस बात को सरल भाषा में समझें तो, डोमिसाइल के आने से नया केंद्र शासित प्रदेश बने कश्मीर और वहां के लोगों के हितों को बचाया जा सकेगा। इसलिए कोई भी बाहर का आदमी इतनी आसानी से वहाँ ज़मीन नहीं खरीद पाएगा।

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निर्मल सिंह की तस्वीर,फोटो सोर्स:गूगल

क्या है डोमिसाइल और इसके प्रावधान?

सीधे-सीधे इस शब्द को समझें तो इसका मतलब होता है कि, कोई भी बाहर का आदमी उस जगह को तब तक नहीं ले सकता है जब तक उसे सरकार मंजूरी न दे दे। यानी, कोई भी वहाँ जमीन खरीदना चाहता है तो सबसे पहले उसे वहा की नागरिकता लेनी पड़ेगी और नागरिकता लेने के लिए उसे वहां कम से कम पांच साल का समय गुजारना पड़ेगा। कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने के बाद सरकार इस प्रावधान को लाने की पूरी कोशिश में लगी हुई है। जिससे कश्मीरियों के साथ किसी भी तरह की ना-इंसाफ़ी न हो सके।

जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर बीजेपी के नेता निर्मल सिंह ने कहा कि,

उनकी पार्टी के स्थानीय लोगों ने पहले ही यह सुझाव केंद्र सरकार को दे दिया है। लेकिन इस मामले पर कुछ लोग ऐसे हैं जो अफवाह फैला रहे हैं कि, अनुच्छेद 370 के ख़त्म होने के बाद जम्मू-कश्मीर के नागरिकों की जमीन और रोजगार छीन लिए जाएंगे। इस तरह की अफवाह का विरोध होना बहुत ज़रूरी है।

बाहर के लोगों के लिए ज़मीन लेना होगा मुश्किल

जब से आर्टिकल 370 कश्मीर से हटाया गया है, तब से न जाने लोगों को क्यों लगने लगा है कि, पूरा-का-पूरा कश्मीर उन्हीं का हो गया है। जबकि हर कोई जानता है कि, सरकार द्वारा लिए गए इस फैसले का मकसद था घाटी के लोगों को एक स्वतंत्र माहौल देना और वो लोग भी बिना किसी दहशत के रह सके। इन्हीं सब मुद्दों को देखते हुए सरकार ने ये कदम उठाया, जो अब तक पहले की सरकार के लिए सिर्फ अजेंडा हुआ करता था।  

लेकिन हमारे देश के लोगों की विडम्बना रही है कि, जब कुछ अच्छा होने लगे या हो जाये तो, दिमागी रूप से बीमार ये लोग खुद को कहीं का राजा समझने लग जाते हैं। ऐसा नहीं है कि कोई भी कश्मीर के हालातों के बारे में जानता नहीं होगा। कुछ लोगों का कहना था कि, ‘कश्मीर के माहौल का बदलना बहुत ज़रूरी हैं, जिस तरह से आतंकवाद वहाँ फैल रखा है उसके खत्म होने की बेहद ज़रूरत है’ लेकिन, यहाँ सवाल ये उठता है कि, क्या वाकई में ये लोग कश्मीर के हालातों को लेकर संवेदनशील हैं? क्योंकि, अगर होते तो आज सरकार के इस कदम पर एकता के साथ खड़े रहते नाकि कश्मीर में ज़मीन खरीदने की राग-अलापते।

जम्मू-कश्मीर में ज़मीन खरीदने का सपना देख रहे लोगों पर बीजेपी ने हंटर चला दिया है
प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स:गूगल

यहाँ सिर्फ कश्मीर ऐसा राज्य नहीं है जहां ज़मीन खरीदना मुश्किल है। बल्कि देश में ऐसे कई राज्य है जहां पर ज़मीन खरीदना उतना ही मुश्किल है जितना की कश्मीर में। इतनी छोटी-सी बात इन समझदार लोगों को समझ ही नही आती। यही कारण है कि आज देश में जहां इस मामले को लेकर सिर्फ खुशियाँ बननी चाहिए थी वहीं इसकी जगह ऊटपटांग दलीलें ज़्यादा दी जा रही हैं।

खैर, हर बार हम सिर्फ सुनते और समझते हैं लेकिन, इन सब बातों को व्यवहार में नहीं लाते। इस समय जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित राज्य बन गया है। अब यहाँ भी रोजगार की संभावनाएं बढ़ेंगी। साथ ही सरकारी नौकरी में सिर्फ 6% लोग ही हैं। जिनमें 90% लोग कश्मीर के निवासी हैं। सरकार के इस कदम से घाटी का माहौल तो बदलेगा ही साथ में रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। वहाँ की युवा को एक नई दिशा मिलेगी, जिससे वो अपना भविष्य बना पाएंगे।

समस्या कहाँ आ रही है?

ऊपर बताई बातों में अगर आपने गौर किया हो तो, इतना समझ गए होंगे कि कुछ चुनिन्दा लोगों की वजह से पूरे घाटी का माहौल खराब होने के घेरे में है। दरअसल, आर्टिकल 370 के हटाए जाने से जम्मू-कश्मीर में उस तरीके का उत्साह देखने को नहीं मिला। जिसकी उम्मीद की जा रही थी। इस मामले पर निर्मल सिंह का कहना है कि,

आर्टिकल 370 हटने के बाद विपक्ष को एक मुद्दा मिल गया है। साथ में एक नई बहस भी शुरू कर दी है कि, बाहर के लोग घाटी के स्थानीय लोगों की जमीनों और सरकारी नौकरियों पर कब्जा कर लेंगे।

अब आप समझ ही गए होंगे कि, क्यों कश्मीर को लेकर रजीनीति का माहौल बना हुआ है। अभी भी कुछ ठीक हुआ नहीं है लेकिन, सरकार बार-बार जताने की कोशिश कर रही है कि घाटी में सबकुछ ठीक है।