भारत की तीनों सेनाओं को अत्याधुनिक बनाने की दिशा में भारत सरकार बहुत तेजी से काम रही है. केंद्र की मोदी सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं में सबसे ऊपर राष्ट्रीय सुरक्षा को रखा है. सैन्य उपकरणों और अत्याधुनिक हथियारों की खरीद के लिए अमेरिका, भारत के सबसे भरोसेमंद पार्टनर के रूप में सामने आया है. पिछले कुछ महीनों की बात करें तो भारत, अमेरिका से चिनूक हेलिकॉप्टर से लेकर खतरनाक अपाचे हेलिकॉप्टर खरीद चुका है.

अमेरिका से भारतीय सेना को मिलने वाला पहला अपाचे हेलिकॉप्टर, फोटो सोर्स – गूगल

भारत-अमेरिका के रिश्तों में बढ़ते आपसी भरोसे का एक और उदाहरण देखने को मिला है. केंद्र की मोदी सरकार ने अपने दूसरे कार्यकाल के शुरुआत में ही अमेरिका के साथ करीब 10 बिलियन अमेरिकी डॉलर (करीब छह खरब रुपये) की रक्षा डील करने जा रही है. भारत, अमेरिका के साथ यह रक्षा सौदा अमेरिका के विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत करने जा रहा है. इस सौदे के तहत भारत अमेरिका से लॉन्ग रेंज मेरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट पी-8आई खरीदेगा. इससे पहले भी भारत अमेरिका से इस एयरक्राफ्ट का पुराना वर्जन खरीद चुका है.

पी-8 आई एयरक्राफ्ट के अलावा इस सौदे में नेवल मल्टी-रोल एमएच 60 रोमियो हेलिकॉप्टर, नेशनल एडवांस सर्फ़ेस टू एयर मिसाइल सिस्टम-2 और अपाचे हेलिकॉप्टर जैसे अत्याधुनिक हथियार शामिल हैं. जो आने वाले 2 से 3 सालों में भारत को मिलेंगे.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भारत ने इस रक्षा सौदे की दिशा में पहला कदम बढ़ा भी दिया है. पिछले हफ्ते ही आठ लॉन्ग रेंज मेरिटाइम पेट्रोल एयरक्राफ्ट पी-8 आई की खरीद पर अमेरिका द्वारा अंतिम मुहर लगा दी गई थी. अमेरिका इन विमानों की डिलिवरी आने वाले अगस्त महीने तक भारत को कर देगा.

मोदी-ट्रम्प मुलाक़ात की एक प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स – गूगल

अमेरिका के विदेशी सैन्य बिक्री कार्यक्रम के तहत होने वाली इस सैन्य डील की अगुवायी खुद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह करेंगे. इसके लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (डीएसी) का गठन किया गया है. इस परिषद कमेटी का अध्यक्ष रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को बनाया गया है. जानकारी के अनुसार इस सौदे की दिशा में इस परिषद ने काम करना भी शुरू कर दिया है.

रक्षा सूत्रों के अनुसार, ‘रक्षा मंत्रालय की एक समीति पिछले हफ्ते ही इस सौदे की मंजूरी दे चुकी है. अब इसे अगस्त में आखिरी मंजूरी के लिए अधिग्रहण परिषद (डीएसी) के पास भेजा जाएगा.’

6 खरब की डील में भारत को अमेरिका से मिलने वाले मुख्य हथियार

सबसे पहले बात करते है एयरक्राफ्ट पी आई 8 की खूबियों की जो इस सैन्य डील के तहत सबसे पहले भारत को मिलने वाले हैं.

पी 8 आई एयरक्राफ्ट, फोटो सोर्स – गूगल

ये विमान सेंसर, हारपून ब्लॉक-2 मिसाइल, एमके-54 लाइट टॉरपीड और रॉकेट जैसी नई तकनीक से लैस है. पी आई 8 विमान सबमरीन को डिटेक्ट करके उसे खत्म करने की क्षमता रखता है. सेना से मिली एक जानकारी के अनुसार भारतीय नौसेना ले लिए एक दर्जन से ज्यादा पी-8आई विमान खरीदे जाएंगे.

इसके अलावा इस रक्षा सौदे के तहत भारत को अमेरिका से 24 नेवल मल्टी-रोल एमएच60 रोमियो हेलीकॉप्टर (2.6 बिलियन डॉलर) मिलेगें जो खासतौर पर दिल्ली की सुरक्षा के लिए खरीदे जा रहे है.

अमेरिकी नौसेना का मल्टी-रोल एमएच60 रोमियो हेलीकॉप्टर, फोटो सोर्स – गूगल

इसके अलावा खबर है इस डील के तहत नेशनल एडवांस सर्वेस टू एयर मिसाइल सिस्टम-2 (लगभग एक बिलियन डॉलर) और छह अपाचे हेलीकॉप्टर (930 मिलियन डॉलर) खरीदे जाने को लेकर भारत अमेरिका के बीच सहमति बन गई है. नेशनल एडवांस सर्वेस टू एयर मिसाइल सिस्टम-2 को राजधानी की सुरक्षा मे तैनात कर दिल्ली को अभेद्द बनाया जाएगा.

नेशनल एडवांस सर्वेस टू एयर मिसाइल सिस्टम-2, फोटो सोर्स – गूगल

इस सैन्य डील के तहत भारत 2.5 अरब डॉलर की लागत से अमेरिका से 30 सशस्त्र सी गार्जियन (प्रीडेटर-बी) ड्रोन की खरीदने जा रहा है. जो भारतीय नौसेना और वायुसेना को दिए जाएंगे.

अमेरिकी गार्जियन ड्रोन, फोटो सोर्स – गूगल

भारत-अमेरिका के बीच बनते बिगड़ते रिश्तों की बीच जहां एक तरफ भारत-अमेरिका के साथ बड़े-बड़े सैन्य समझौते कर रहा है वहीं दूसरी तरफ आज कल भारत और अमेरिका के व्यापार और इमिग्रेशन पर कई तरह के तनाव की खबरें आ रही हैं. यही नहीं इससे पहले अमेरिका भारत संबधों में तल्खी आई जब भारत ने 2018 में रूस के साथ एस-400 ट्रायम्फ मिसाइल खरीदने का सौदा किया था. तब ये माना जा रहा था कि ये रूस के साथ ये सैन्य डील भारत और अमेरिका के बीच दरार की वजह बन सकती है. लेकिन दोनों देशो ने समझदारी दिखते हुये अब सारे मसले सुलझा लिये लिए है. इसी का नतीजा है कि आने वाले मंगलवार को अमेरिका के विदेश सचिव माइक पॉम्पियो भारत आ रहे हैं.