पिछले कुछ सालों से भारत ने स्पेस प्रोग्राम में बहुत तेजी से तरक्की की है. स्पेस प्रोग्राम के अंतर्गत विकसित की जा रही तकनीक में भारत प्रमुख रूप से स्पेस सुरक्षा पर ज़ोर दे रहा है. भारत अंतरिक्ष में मौजूद अपनी सैटेलाइट संपत्ति की सुरक्षा को सुनिश्चित करना चाहता है. क्योंकि दबी जुबान में ही सही पर आज दुनिया के हर देश का मानना हैं कि भविष्य में देशों के बीच स्पेस वॉर (अन्तरिक्ष युद्ध) की संभावनाओं को नकारा नहीं जा सकता है.

स्पेस वॉर की संभावनाओं को देखते हुये आज के समय में हर बड़ा देश अपनी अंतरिक्ष तकनीक को विकसित करने में लगा हुआ है. जिसमें भारत बहुत तेजी से विकास कर रहा है. बीते मार्च भारत की अंतरिक्ष एजेंसी ISRO ने मिशन शक्ति के तहत एंटी सैटेलाइट मिसाइल A-SAT सफल परीक्षण करके दुनिया को चौंका दिया था. अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत दुनिया का ऐसा चौथा देश बन गया है. जिसके पास अंतरिक्ष में घूम रहे एंटी सैटेलाइट (A-SAT) को मार गिराने की क्षमता है.

इसी क्रम में अब भारत ने स्पेस तकनीक विकास में अगला कदम उठाया है. हाल ही में भारत ने ट्राई सर्विस डिफेंस स्पेस एजेंसी की शुरुआत की है. जिसके तहत भारत पहली बार ‘अंतरिक्ष युद्धाभ्यास’ करने की योजना बना रहा है. भारत ने अपने इस महात्वाकांक्षी मिशन को ‘IndSpaceEx’ नाम दिया है. इस मिशन के तहत भारत अगले महीने अंतरिक्ष में युद्धाभ्यास करने जा रहा है.

फोटो सोर्स- गूगल

बताया जा रहा है कि यह युद्धाभ्यास मूल रूप से टेबल टॉप वॉर गेम पर आधारित होगा. अपने तरीके के इस नए युद्धाभ्यास में पहली बार सेना और भारतीय वैज्ञानिक संयुक्त रूप से हिस्सा लेंगे.

भारतीय वैज्ञानिक और सेना का साझा सैन्य अभ्यास भारत की उस गंभीरता को दर्शाता है, जिसमें भारत अंतरिक्ष संपत्ति पर भविष्य में चीन जैसे पड़ोसी देशों से होने वाले संभावित खतरों से मुकाबला करने की लिए जरूरी तकनीकी के विकास पर विचार कर रहा है.

IndSpaceEx प्रोग्राम

एक वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने इस अंतरिक्ष सैन्य अभ्यास के बारे जानकारी देते हुये कहा कि, ‘अंतरिक्ष प्रतिस्पर्धा की वजह से अंतरीक्ष का सैन्यीकरण हो रहा है. जुलाई के आखिर में रक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित किए जाने वाले अंतरिक्ष सैन्य अभ्यास का मुख्य उद्देश्य आवश्यक अंतरिक्ष और काउंटर-स्पेस क्षमताओं का आकलन कर स्पेस में भारत की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.’

प्रतीकात्मक तस्वीर , फोटो सोर्स – गूगल

वहीं एक अन्य अधिकारी ने बताया, ‘भारत को अंतरिक्ष में अपने प्रतिस्पर्धी देशों की गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है. उन्होंने बताया कि भारत को अपनी संचार व्यवस्था उन्नत बनाने, दुश्मन देश से आने वाली मिसाइल की पूर्व चेतावनी देने और दुश्मनों के ठिकानों पर सटीक निशाना लगाने में मददगार उपकरणों की आवश्यकता है. इससे हमारे सशस्त्र बलों पर विश्वसनीयता बढ़ेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा भी मजबूत होगी. ऐसे में IndSpaceEx जैसे मिशन की शुरुआत भारत को अंतरिक्ष में रणनीतिक चुनौतियों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा, जिन्हें संभालने की आवश्यकता है.’

भारत के लिए क्यों जरूरी है IndSpaceEx प्रोग्राम

एशिया के दो बड़े ताकतवर देश चीन और भारत, इनके बीच एशिया के बॉस बनने को लेकर जो प्रतिस्पर्धा चल रही वो किसी से छिपी नहीं है. हालांकि इस दौड़ में चीन, भारत से कहीं आगे है लेकिन दुनिया ये भी मानती है कि चीन की बढ़ती हुई ताकत को कोई चुनौती दे सकता है तो वो सिर्फ भारत ही है.

दूसरी तरफ भारत भी इस बात को अच्छे से समझता है. जिस कारण चीन को हर स्तर पर टक्कर देने के लिए भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमताओं का विस्तार कर रहा है. इसके साथ ही भारत अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा को पुख्ता करने के लिए हर संभव कदम उठा रहा है.

चीन ने जनवरी 2007 में अपने एक उपग्रह पर A-SAT मिसाइल का सफल परीक्षण किया था. जिसके बाद चीन गतिज (प्रत्यक्ष चढ़ाई मिसाइलों, सह-कक्षीय मार उपग्रहों) और गैर-गतिज के रूप में अंतरिक्ष में सैन्य क्षमताओं से लैस हो गया था. अब तक चीन के 100 से अधिक सैटेलाइट अंतरिक्ष में भेज चुका है जो संचार, नेविगेशन, पृथ्वी अवलोकन और सैन्य सुरक्षा में चीन की मदद करते हैं.

दूसरी तरफ तीन दिन पहले ही चीन ने अमेरिका के वर्चस्व को चुनौती देते हुये अपने महत्वाकांक्षी मिशन के तहत समंदर में अपने एक जहाज से 7 सैटेलाइट लॉन्च किए है.

वहीं भारत की बात करे तो भारत लंबे समय से मजबूती से अंतरिक्ष कार्यक्रमों को अंजाम दे रहा है. इसी कार्यक्रम के तहत काउंटर-स्पेस क्षमता विकसित करने की दिशा में 27 मार्च को भारत ने पहला कदम उठाया था. मिशन शक्ति के तहत भारत ने 19 टन की कम वजनी इंटरसेप्टर मिसाइल से पृथ्वी से 283 किमी की ऊंचाई पर लो अर्थ ऑर्बिट में स्थित 740 किलोग्राम की MICROSET-R उपग्रह को मार गिराया था.

Facebook Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here