यूनाइटेड स्टेट के प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने भारत आने से पहले भारत को एक गिफ्ट दिया है. यूनाइटेड स्टेट ने भारत को विकासशील देशों के लिस्ट से हटा दिया है. अब भारत विकसित देशों की कैटेगरी में गिना जाने लगा है. शिव सेना इस खबर से दुखी मालूम पड़ती है, इसलिए उसने अपने अखबार ‘सामना’ के ज़रिये कहा –

“जो भी सब्सिडी और छूट भारत को मिल रही थी वो अब नहीं मिलेगी. जब भी कोई अतिथि हमारे यहाँ आता है, वह हमारे लिए तोहफे लाता है. डोनाल्ड ट्रंप ने इस रिवाज़ को तोड़ दिया है. एक तरफ भारत ट्रंप का वेलकम करने की तैयारी कर रहा है तो दूसरी ओर ट्रंप ने भारत को ही विकसित लिस्ट से हटा दिया. यह भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बहुत बूरी खबर है.”

10 फरवरी 2020 को अमेरिका ने भारत के साथ कुछ और देशों को भी विकाशील देशों के लिस्ट से हटा दिया था. सामान्यीकृत प्रणाली वरीयताएँ (GSP) अमेरिका की सबसे पुरानी तरजीही व्यापार योजना है, जिससे भारतीय निर्यातकों को शुल्क-मुक्त पहुंच मिलती थी।

‘सामना’ ने अपने एडिटोरियल में ये भी कहा कि

“अमेरिका के मुताबिक़ भारत अब विकासशील देश नहीं है बल्कि विकसित देश है. भारत अभी विकसित देशों की तुलना में काफी पीछे है. भारत शिक्षा, स्वास्थ, एम्प्लॉयमेंट, सफाई और गरीबी के मामले में काफी पीछे है.”

नरेंद्र मोदी सरकार के नेतृत्व में भारत ने अंतरराष्ट्रीय क्षेत्र में अपनी एक उच्च प्रोफाइल वाले देश की छवि पेश की है। हालांकि, यह दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है। देश में प्रति व्यक्ति आय मात्र 2,016 डॉलर के साथ प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के मामले में भारत दुनिया का 146वां देश है।

यूनाइटेड स्टेट ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव के अनुसार, साल 2018 में भारत सबसे ज्यादा प्रोफीट पाने वाला देश था जिसे 260 मिलियन डॉलर का लाभ मिला था. वर्ल्ड बैंक के अनुसार, भारत G-20 का मेंबर था, इसी वजह से इसके ऊपर से डेवलपिंग नेशन का टैग हटाके इसे डेवलप्ड नेशन घोषित कर दिया गया है.

फोटो सोर्स इकोनॉमिक्स टाइम्स

फोटो सोर्स इकोनॉमिक्स टाइम्स

भारत के अलावा ब्राज़ील, इंडोनेशिया, हॉंग कॉंग, साउथ अफ्रीका और अर्जेंटीना को भी इस लिस्ट से हटा दिया गया है. यूनाइटेड स्टेट ट्रेड एक्ट 1974 में ‘विकासशील देशों’ वाला कांसेप्ट तय हुआ था जिसके मुताबिक़ जितने भी अमीर देश हैं वो गरीब देशों के व्यपार में मदद करेंगे.

यूनाइटेड स्टेट की सरकार के मुताबिक़ विकाशील देशों के लिए एक क्राइटेरिया है जिसपर भारत अब खड़ा नहीं उतर रहा है. इसके मुताबिक़ विकासशील देशों की ग्लोबल शेयर 0.5 % से कम होनी चाहिए जबकी भारत का ग्लोबल शेयर 2.1% का है.

प्रतीकात्मक तस्वीर/फोटो सोर्स गूगल

प्रतीकात्मक तस्वीर/फोटो सोर्स गूगल

पहले ही 2018 में ट्रंप सरकार ने 50 उत्पादों को सब्सिडी की श्रेणी से हटा दिया था. उनका कहना था कि इससे उनके देश को बहुत नुकसान हो रहा है.