अच्छे दिन आ चुके हैं. नहीं मजाक नहीं कर रहे हैं सही में आ चुके हैं. अब 7 साल की लड़की को भी अपनी मांग पूरी करवाने के लिए संसद भवन के बाहर प्लेकार्ड लेकर खड़ा होना पड़ रहा है. अच्छे दिन सही में आ चुके हैं.

अब आप सोच में पड़े होंगे कि आखिर 7 साल की बच्ची की ऐसी क्या मांग है जो वह सड़क पर उतर पड़ी?

मांग बहुत बड़ी है. इतनी बड़ी की अकेले प्रधानमंत्री भी उसकी मांग को पूरा नहीं कर सकते. आज ग्लोबल वार्मिंग से पूरा विश्व चिंतित है. ग्लोबल वार्मिंग को कम करने के लिए जिस रफ़्तार से काम होना चाहिए था उस रफ़्तार से हो नहीं रहा है. वायु प्रदूषण, सूखा और इस तरह की समस्या से भारत जिस तेजी से जूझ रहा है वो वक़्त दूर नहीं जब भारत भी जलवायु परिवर्तन की समस्या से खुद को घिरा हुआ पायेगा. 7 साल की लिकिप्रिया कंगुजम संसद के बाहर प्लेकार्ड लेकर खड़ी है. वह अपनी समस्या की ओर प्रधानमंत्री का ध्यान आकर्षित करना चाहती हैं. उसके प्लेकार्ड पर इंग्लिश में लिखा है –

डियर पीएम और एमपी जलवायु परिवर्तन का कानून पास कीजिए और हमारा भविष्य बचाइए.

साथ ही लिकिप्रिया की अपील करते हुए कहते है कि –

“मैं प्रधानमंत्री और सभी सांसदों से आग्रह कर रही हूँ कि वह जलवायु परिवर्तन पर जल्द ध्यान दें. समुद्र का लेवल दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है , धरती का तापमान बढ़ता जा रहा है. अब हमें इस पर कोई न कोई कदम उठाना ही होगा.”

आज के भारत में अगर एक दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली बच्ची के पास इतनी समझ है तो भारत तरक्की की राह पर है. पर यह समझ हर एक भारतीय में होना ज़रूरी है. हम अपने देश को प्रगति की राह पर क्यों ले जा रहे हैं; अगर देश बचेगा ही नहीं? कोई भी काम हम अपना फ्यूचर सोच कर करते हैं पर अगर फ्यूचर में रहने की जगह ही न हो तो इतना काम करके क्या फायदा? दूसरी कक्षा में पढ़ने वाली लिकिप्रिया मणिपुर की रहने वाली है.

लिकिप्रिया जलवायु परिवर्तन जैसी समस्या की ओर सरकार का ध्यान खींचने वाली अकेली नहीं है. ग्रेटा थंबर्ग में एक बच्ची और है जिसने ऐसा ही कुछ किया था. 2018 के अगस्त में उसने स्वीडिश पार्लियामेंट के सामने प्रोटेस्ट करना शुरू कर दिया था. उस वक़्त से वह सुर्ख़ियों में आई थी और तब से वह पूरी दुनिया के लीडर्स से अपील कर रही हैं इस ओर कुछ काम करने के लिए.

लिकिप्रिया कंगुजम, फोटो सोर्स- गूगल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उसने एक मैसेज भी लिखा है –

“इस बात को गंभीरता से लीजिये वरना आने वाले वक़्त में आपको कोई गंभीरता से नहीं लेगा.”

ग्रेटा थंबर्ग ने भारत पर सबसे अधिक ग्रीन हाउस गैस रिलीज़ करने का आरोप लगाया है. इसकी वजह उसने भारत की बड़ी जनसंख्या और कोयले को बताया है.

ये मुद्दा ऐसा बड़ा मुद्दा है जो बीच-बीच में उठता है. लोग इस पर बातें करते हैं, टीवी चैनल्स में चर्चा भी होती है. क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए यह भी हमें पता है. पर दिन के अंत में हम सब चादर तान के सो जाते हैं. बस अब जागने का इंतज़ार है पर शायद जब तक हमारे जान पर नहीं बन कर आएगी तब तक हम नहीं जागने वाले.

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