विवादित दक्षिणी चीन सागर सिंगापुर से लेकर ताईवान की खाड़ी तक लगभग 35,00,000 वर्ग किमी में फैला हुआ है. जिसके समुद्री क्षेत्र को लेकर अक्सर दुनिया के कई देशों के बीच टकराव की स्थिति बनी रहती है. इस विवाद की सबसे बड़ी वजह चीन का आधिपत्‍य और साम्राज्‍यवादी नीति को माना जाता है. क्योकि चीन हमेशा से दक्षिणी चीन सागर के 80% समुद्री क्षेत्र को अपना हिस्सा मानता है. जो की अंतर्राष्ट्रीय क़ानूनों के मुताबिक गलत है. भारत सहित अमेरिका, जापान जैसे बड़े देश चीन के इस रवैये का विरोध करते रहे हैं. वहीं चीन के पड़ोसी देश वियतनाम, फिलीपींस, मलेशिया, ब्रुने साउथ चाइना सी के समुद्री क्षेत्र को अपना बताते हैं. जिसकी वजह से साउथ चाइना में इन देशों की नौ सेनाए आमने-सामने आ जाती हैं. बड़ी सैन्य ताकत के चलते चीन इन देशों को धमकाता रहता हैं.

चीन की दादागिरी पर लगाम लगाने लिए अमेरिका, भारत, जापान और फिलीपींस की नौसेनाओं ने दक्षिण चीन सागर में संयुक्त सैन्य अभ्यास किया.7 दिन चला संयुक्त सैनिक अभ्यास बीते बुधवार को ही समाप्त हुआ है. इस तरह का यह पहला संयुक्त नौ सेना अभ्यास है. माना जा रहा है कि ये सैन्यअभ्यास साउथ चाइना सी में बढ़ते चीन के वर्चस्व को चुनौती देने का काम करेगा.

फोटो सोर्स – गूगल

इस सयुक्त सैन्य अभ्यास में अमेरिका का विध्वंसक पोत, भारत के दो युद्धपोत, जापान का एक विमानवाहक पोत और फिलीपींस का गश्ती जहांज शामिल हुये थे. ये चारों देश अलग-अलग समय पर इसी तरह के कई सैन्य अभ्यास इस क्षेत्र में पहले भी करते रहे हैं जिस पर चीन अपनी नाराजगी जताता रहा है.

संयुक्त सैन्य अभ्यास, प्रतिकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

मुख्य रूप से इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में रणनीति बनाने, क्रॉस डेक फ्लाइंग और समुद्री सवारों का आदान प्रदान किया गया है. इस संयुक्त सैन्य अभ्यास को लेकर अमेरिकी नौ सेना के कमांडर एड्रयू जे क्लंग ने कहा-

इस समुद्री क्षेत्र में हमारे सहयोगियों, साझेदारों और मित्र देशों के साथ व्यावसायिक जुड़ाव से हमारे मौजूदा मजबूत रिश्तों को और गहरे होने के अवसर मिलते हैं‘.

एड्रयू जे क्लंग अमेरिकी विध्वंसक युद्दपोत विलियम पी लॉरेंस के कैप्टन हैं.

अमेरिकी विध्वंसक युद्दपोत विलियम पी लॉरेंस /फोटो सोर्स – गूगल

इस सैन्य अभ्यास के दौरान बीते सोमवार को अमेरिका के दो युद्दपोत दक्षिणी चीन सागर में चीन के दावे वाले द्वीप के पास से गुजरे थे. जिस पर चीन ने कड़ी आपत्ति दर्ज कराते हुये कहा था कि यह उसकी संमप्रभुता का उल्लंघन है. अमेरिकी जहाजों ने उसकी समुद्री सीमा का उल्लंघन किया है. चीन के एतराज पर जबाब देते हुये अमेरिकी नौसेना ने कहा था कि अमेरिकी नौ सेना दुनियाभर में अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र में स्वतंत्र रूप से आवाजाही कर इस तरह के अभियान करती रहती है.

अमेरिकी नौ सेना ने संयुक्त सैन्य अभ्यास में शामिल हो रहे युद्दपोतों को लेकर एक बयान जारी किया जिसमे बताया गया कि इस साझा युद्दभ्यास में भारतीय नौ सेना का विध्वंशक जहाज आईएनएस कोलकाता और टैंकर आईएनएस शक्ति, यूएस पैसिफिक बेड़े का एक गाइडेड मिसाइल विध्वंसक, जापान का विमान वाहक युद्दपोत इजुमो और फिलीपीनस का गश्ती पोत एंड्रेस बोनीफासियों शामिल हुये है.

चारों देशों की नौ सेनाओं के ऑफिसर्स/ फोटो सोर्स – गूगल

इसी बीच, इस अभ्यास को लेकर भारतीय नौसेना ने ट्वीट कर छह दिनों तक चले इस अभ्यास में शामिल हुए जंगी जहाजों की तस्वीरें पोस्ट की है.

भारत ने अंतरराष्ट्रीय जल में नेविगेशन की स्वतंत्रता का सम्मान करते हुये 1982 में बने समुद्र कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन सहित अंतर्राष्ट्रीय कानून के अनुरूप ओवरफ्लाइट करने के लिए सभी देशों की आवश्यकता को दोहराया है. कैप्टन शर्मा ने कहा, ‘चार देशों के युद्धपोतों ने दक्षिण चीन सागर में विभिन्न तरह के साझा सैन्य अभ्यास किए है’.

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