डिजिटल मीडिया के समय मे सभी को व्यूज़ और रैंकिंग चाहिए। बचपन मे आपने खरगोश और कछुए वाली कहानी ज़रूर सुनी होगी। समय और नज़ाकत देखकर कछुआ खेल जाता है और खरगोश मुंह ताकता रह जाता है। कुछ ऐसी हीं हरकतें आज की मीडिया कर रही है। हाल मे भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव ज़ोरों पर है। आप एक बार बस टीवी के सामने बैठ जाइये, टीवी पर आने वाले न्यूज़ चैनल आपको सीधा युद्धक्षेत्र मे पहुंचा देंगे। यह सब खेल व्यूज़, टीआरपी और रैंकिंग का है। इसे समझने की जरूरत है। एक बड़ा समूह इसी वज़ह से टीवी से ऊबकर सोशल मीडिया की ओर भागा। लेकिन आज जो कुछ हो रहा है वह सोशल मीडिया के कंटैंट स्ट्रैटजी पर सवाल उठाता है। घटना बेहद संवेदनशील है। इसे ध्यान से समझने की ज़रूरत है।

बात क्या है?

भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले तीन चार दिनो से जंग जैसा माहौल हैं। इस बीच कल यानि कि 27 फरवरी 2019 को एक ख़बर आती है। ख़बर थी भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान का पाकिस्तानी आर्मी द्वारा गिरफ्तार किया जाना। ख़बर एक वीडियो के साथ आती है। इस वीडियो मे भारत के विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान अपना नाम, सर्विस नंबर और पद पाकिस्तानी आर्मी के ऑफिशर को बताते हुए दिखाई दे रहे हैं। यह वो जनकारियां हैं जिन्हें युद्ध के दौरान बंदी हुआ कोई सैनिक पूछताछ में बता सकता है। जिस सेना ने बंदी बनाया हो वो भी इससे अधिक कुछ और नहीं पूछ सकता।

ऐसा क्यूँ?

ऐसा इसलिए क्योंकि 1949 मे जेनेवा समझौते के तहत किसी भी प्रिजनर ऑफ वॉर से आप इससे अधिक कुछ भी नहीं पूछ सकते। इस बात को अभिनंदन बखूबी समझते होंगे। युद्ध मे कूदने से पहले भारतीय सेना ने अपने सैनिकों को उनके अधिकारों के बारे में उन्हें ज़रूर बताया होगा। जिसका उन्होंने बखूबी उपयोग भी किया। ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि पाकिस्तानी आर्मी द्वारा बेसिक सवालों के अलावा कुछ और पूछे जाने पर उन्होंने कहा –

एम आई सपोज्ड तो टेल यू दिस? मेज़र आई एम सॉरी।

उनके कहे इस वाक्य से पता चलता है कि उन्हें बखूबी पता था कि जिस परिस्थिति में उन्हें पाकिस्तान में गिरफ़्तार किया गया है वह आम परिस्थिति नहीं है। उनके पास पूरा हक़ है अपनी बात सबके सामने रखने का। पाकिस्तानी आर्मी मेज़र ने जब उनसे पूछा कि आप कौन सा जहाज़ उड़ा रहे थे तो उस पर भी उनका कुछ ऐसा ही रिएक्शन देखने को मिला- 

सॉरी मेज़र, एम नॉट सपोज्ड तो टेल यू दिस।

इसपर पाकिस्तानी आर्मी मेज़र ने भी बिना किसी प्रतिक्रिया के अगला सवाल पूछ लिया। क्योंकि यह बात उस मेज़र को भी पता थी कि उनसे बेसिक सवालों के अलावा कुछ भी ज़ोर-जबरदस्ती कर नहीं पूछा जा सकता।

गड़बड़ कहाँ हुई?

जब वीडियो आया तो सोशल मीडिया में तूफान की तरह फैल गया। हर कोई व्यूज़ और वेब रैंकिंग के लिए इस वीडियो का उपयोग करने लगा। कुछ लोगों ने एनडीटीवी के एक पुराने शो की वीडियो भी खोज निकली। लेकिन असली खेल शुरू हुआ तब जब MEA के स्पोक पर्सन रवीश कुमार ने इस बात की पुष्टि कर दी कि हमारा एक जवान ‘मिसिंग इन एक्शन’ है।

बात लगभग साफ थी कि पाकिस्तान से आने वाली वीडियो ‘मिसिंग इन एक्शन’ भारतीय विंग कमांडर अभिनंदन वर्धमान की ही है। अब सभी लग गए अपने-अपने तरीके से अभिनंदन वर्धमान के बारे में बताने में। कई न्यूज़ चैनलों ने अभिनंदन वर्धमान कौन है? इस टाइटल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया।

पहले तो सब कुछ थोड़ा-थोड़ा ही चल रहा था। फिर इस भसड़ में बड़े-बड़े मीडिया ग्रुप भी कूदने लगें। सभी अपने तरीके से व्यूज़ और वेब रैंकिंग के लिए काम करने लगें। लेकिन सबसे बड़ी गड़बड़ तब हुई, जब व्यूज़ के भूखे इन डिजिटल मीडिया चैनलों ने अपनी नैतिकता ताक पर रखते हुए जेनेवा समझौते का अपमान किया। सब के सब ‘सबसे पहले’ तस्वीर और वीडियो जारी करने मे सभी लग गए। यही नहीं कुछ डिजिटल मीडिया चैनलों ने विंग कमांडर अभिनंदन के बारे में सब कुछ विस्तार से बताना शुरू कर दिया। इन विस्तार से बताई गईं बातों मे वो सब कुछ था जो पाकिस्तान में कैद विंग कमांडर अभिनंदन वहां के आर्मी को नहीं बता रहे थे। कुल मिलाकर जो बातें अभिनंदन ने नहीं बताई वो यहाँ की मीडिया ने साफ-साफ बता दिया।

अब देखिये कि रैंकिंग का खेल कैसे चल रहा था?

आप सबसे बड़े वेब-वीडियो प्लैटफार्म यू-ट्यूब पर जाइये। वहाँ सिर्फ ‘W’ लिखिए। आपके लिखने के साथ हीं ‘WING COMMANDER ABHINANDAN’ आएगा। इसका एक उदाहरण हम आपको नीचे दे रहे हैं।

यू-ट्यूब स्क्रीन शॉट

अब देखिये इस की-वर्ड को कैसे यूज़ किया गया है ताकि खूब सारे व्यूज़ आ सकें। वीडियो में कुछ और होगा और आपको इस की-वर्ड के सहारे इस वीडियो तक पहुंचाया जाएगा। हम इसकी वीडियो भी आपको दिखा रहे हैं कि यह कैसे काम कर रहा है।

द लल्लनटॉप के यू-ट्यूब चैनल का स्क्रीनशॉट

इस तस्वीर मे देखिये कैसे पूरा टाइटल हिन्दी में है पर विंग कमांडर अभिनंदन अंग्रेज़ी में लिखा गया है।

‘Wing commander Abhinandan’ की पत्नी तन्वी मरवाह के बारे में पढ़ आप गर्व से भर जाएंगे।’ 

विंग कमांडर अभिनंदन अंग्रेज़ी मे लिखे जाने का सबसे बड़ा कारण यही है कि यू-ट्यूब सर्च में यह वीडियो रैंक करे। यह वीडियो डिजिटल मीडिया ग्रुप ‘द लल्लनटॉप’ के फेसबुक और यू-ट्यूब चैनल पर अपलोड किया गया था। अब इस वीडियो के सब-टाइटल को भी ध्यान से पढ़ें-

All you should know about the family of wing commander Abhinandan who has been captured by the pakistani forces.

यहाँ भी बेहद तरीके से विंग कमांडर अभिनंदन लिखा गया है। यही नहीं इसमे कहा गया है कि ‘वह सब कुछ जो आपको विंग कमांडर अभिनंदन के परिवार के बारे में जानना चाहिए।’  यह सब-टाइटल ही विरोधाभास से भरा हुआ था। जिस सूचना को देने से विंग कमांडर अभिनंदन बच रहे थे उसे यहाँ साफ-साफ जान लेने को लिखा गया था। इस वीडियो को बाद में दर्शकों के विरोध करने पर डिलीट कर दिया गया।

27 फरवरी को अपलोड किए गए इस वीडियो पर डिलीट किए जाने तक 185,682 व्यूज़ आ चुके थे। इस वीडियो में विंग कमांडर अभिनंदन की पत्नी और उनके परिवार के बारे में बताया गया था। इसी चैनल के वेबसाइट पर एक लिखित ख़बर में भी इस बात का जिक्र है कि अभिनंदन कहाँ से हैं?

डिजिटल मीडिया ‘द लल्लनटॉप’ के वेबसाइट का स्क्रीन शॉट

सिर्फ यही नहीं बल्कि इनके अलावा और भी कई मीडिया पोर्टल और चैनलों ने इस शर्मनाक हरकत को अंजाम दिया है। टीवी और सोशल मीडिया पर नैतिकता की दुहाई देने वाले ये चैनल नैतिकता से दूर जाते हुए दिखें। यह बेहद शर्मनाक है। एक आदमी जो वहाँ पाकिस्तानी सेना की कैद में है। वो अपने घर वापसी के लिए चिंतित है और यहाँ उसके नाम पर व्यूज़ और टीआरपी बटोरी जा रही है।

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