आपने एक कहावत तो सुनी ही होगी, ‘हाथी के दांत खाने के अलग और दिखाने के अलग होते हैं।’ किसी भी राजनीतिक दल के लिए विजय माल्या और नीरव मोदी का मामला कुछ इसी तरह का है। भाजपा हो या फिर कांग्रेस हर पार्टी भ्रष्टाचार के खिलाफ़ खुलकर सार्वजनिक मंचों पर बोलती रही है। लेकिन इन दोनों ही पार्टियों ने भ्रष्टाचार को रोकने के लिए कोई बेहतर कदम नहीं उठाए। एक तरफ जब कांग्रेस सत्ता में थी तो नीरव मोदी करोड़ों रूपए की लूट करने में सफल रहे और सरकार को इसकी भनक तक नहीं लगी। वहीं दूसरी तरफ केंद्र में भाजपा की सरकार बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि भगोड़े लुटेरों को वापस देश लाया जा सकेगा। लेकिन पिछले पांच सालों में मोदी सरकार को इस मामले में भी कोई सफलता हाथ नहीं लगी।

अब एनडीटीवी और सत्याग्रह के हवाले से एक रिपोर्ट सामने आई है। इस रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि ब्रिटेन की सरकार की तरफ से नीरव मोदी के खि-लाफ़ कार्रवाई के लिए भारत सरकार के सामने कई बार पेशकश की गई थी। लेकिन इसके बावजूद भारत सरकार ने नीरव मोदी के खिलाफ़ कार्रवाई के लिए कोई उत्सुकता नहीं दिखाई है। ब्रिटेन ने यह भी कहा कि इस मामले में भारत की मदद के लिए ब्रिटेन अपनी एक टीम भारत भेज सकता है। ब्रिटेन से भारत आने वाली टीम भारत सरकार के साथ मिलकर कार्रवाई को आगे बढ़ाने की दिशा में विचार करेगा। लेकिन भारत ने ब्रिटेन की इस पेशकश पर किसी तरह का जवाब देना उचित नहीं समझा।

इन सूत्रों से मिली ख़बर.

ख़बर के मुताबिक लंदन स्थित गंभीर अपराध कार्यालय (SFO) से पता चला है कि फरवरी 2018 में ब्रिटेन ने म्युचुअल लीगल असिस्टेंट ट्रीटी के तहत पहली बार भारत सरकार को अलर्ट भेजा। भारत को यह अलर्ट उस समय भेजा गया जब देश में नीरव मोदी और उनके परिवार के लोगों पर अपराधिक मामले दर्ज हो गए थे।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ नीरव मोदी, फोटो सोर्स – गूगल

भारत सरकार ने भले ही दावा किया हो कि सरकार ने सबसे पहले नीरव मोदी पर सख़्त कार्रवाई की है, लेकिन सच यह है कि इस मामले में सरकार ने कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखाई है। यही वज़ह है कि ब्रिटेन सरकार के SFO ने इस मामले में भारत सरकार से किसी भी तरह के कागजात मंगाने बंद कर दिये है।

भ्रष्टाचारी आखिर ब्रिटेन ही क्यों जाते हैं.

जानकारी के लिए आपको बता दें कि भगोड़े लोगों को ब्रिटेन में पनाह लेना बहुत आसान है। ब्रिटेन में ऐसा कोई भी व्यक्ति रह सकता है जो अपने देश में धर्म, नस्ल, जाति, राष्ट्रीयता, मत या अन्य किसी भी वज़ह से खतरा महसूस करता हो। वह एक रिफ्यूजी के तौर पर वहां 5 साल तक रह सकता है।

यही नहीं यदि 5 साल बाद भी उस व्यक्ति को लगता है कि उसके देश में हालात अच्छे नहीं हुए हैं तो वह इस अवधि को और भी बढ़वा सकता है।

उस प्रक्रिया के बारे में जानिए.

यदि आप अपने देश से भागकर ब्रिटेन में रहना चाहते हैं तो इसके लिए ब्रिटेन में एक बेहद आसान प्रक्रिया भी रखी गई है। ब्रिटेन में रिफ्यूजी के तौर पर रहने के लिए महज माइग्रेंट डिपार्टमेंट में आवेदन करना होता है। ज्यादातर मामले में इसे 6 महीने के भीतर ही स्वीकृति मिल जाती है। कई बार यदि कोई कानूनी दांवपेच हो तो एक साल का वक्त भी लग सकता है। लेकिन इस काम को और भी आसान बनाने के लिए अब फास्ट ट्रैक डिपार्टमेंट बनाया गया है। जिसमें सिर्फ 22 दिनों के भीतर ही प्रक्रिया शुरू हो जाती है।

आपको बता दें कि इस ब्रिटेन में ठहरने वालों को ब्रिटेन सरकार काफी फायदे देती है। यहां पर रिफ्यूजी के रहने का सरकार पूरा इंतजाम करती है। इसके अलावा उसकी आर्थिक मदद भी की जाती है। अगर यहां कोई इंसान अकेला रिफ्यूजी के तौर पर रहता है तो उसे हर हफ्ते 3364 रूपए दिए जाते है जबकि सिंगल पेरेंट्स को 6,728 रुपये और कपल को 13,365 रुपये मिलते हैं। इसी कानून के तहत नीरव और दूसरे सभी भगोड़े ब्रिटेन में रह रहे हैं।

नीरव और माल्या के आलावा भी कई भगोड़े ब्रिटेन भागे हैं.

बसे पहले तो आपको यहां पर ये बता दें कि ब्रिटेन में सिर्फ विजय माल्या और नीरव मोदी छुपे नहीं बैठे हैं बल्कि और भी कई डिफॉल्टर हैं जो यहां पर आराम से अपने दिन काट रहे हैं। भारत इन्हें लाने का पूरा प्रयास कर रहा है। काफी पैसा भी खर्च कर रहा है लेकिन रिजल्ट के रूप में कुछ हाथ में नहीं आ रहा हैं। नीरव के अलावा विजय माल्या, म्यूजिक डायरेक्टर नदीम शैफी, टाइगर हनीफ, संजीव चावला, रवि शंकरन, लॉर्ड सुधीर चौधरी, राजकुमार पटेल, राजेश कपूर, अब्दुल शकूर जैसे लोगों ने भी यहां पनाह ली हुई थी। विजय माल्या और ललित मोदी तो आज भी यहां रह रहे हैं।

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