अनुच्छेद 370 हटने के बाद से ही भारतीय मीडिया और अंतर्राष्ट्रीय मीडिया दो भागों में बंट गया है जहां, भारतीय मीडिया के द्वारा कश्मीर घाटी की स्थिति को सामान्य और शांतीपूर्ण बताया जा रहा है वहीं, अंतर्राष्ट्रीय मीडीया ने घाटी में विरोध प्रदर्शन को रिपोर्ट किया है. दरअसल, धारा 370 के हटने के बाद से ही कश्मीर का कनेक्शन देश के बाकी हिस्सों से टूट गया था. कम्यूनिकेशन के तमाम साधन बंद कर दिए गए थे. मीडिया की एंट्री पर पूरी तरह से रोक लगा दिया गया था. 30,000 के करीब पैरा मिल्ट्री फोर्सेज़ और 8000 हज़ार सीआरपीएफ के जवान तैनात किए गए थे. साथ ही वहां की दो सबसे बड़ी पार्टियां पी़डीपी और नेशनल कांफ्रेंस के नेताओं को हिरासत में ले लिया गया था. ताकि किसी भी भयावह स्थिति पर काबू पाया जा सके लेकिन, बीते कुछ दिनों से कश्मीर से छिटपुट ख़बरें बाहर आने लगी हैं.

इन खबरोंं में ये दावा किया जा रहा था कि धारा 370 हटने के बाद भी कश्मीर में सब सामान्य है. एनएसए प्रमुख अजीत डोभाल का कश्मीरियों के साथ बिरयानी खाने का वीडियों भी खूब वायरल हुआ था. हालांकि अंतर्राष्ट्रीय मीडिया की इससे अलग राय है. दरअसल, अलजज़ीरा, न्यूयॉर्क टाइम्स, वाशिंगटन पोस्ट और समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने दावा किया है कि अनुच्छेद 370 को लेकर श्रीनगर में शुक्रवार को विरोध प्रदर्शन हुए हैं. इतना ही नहीं प्रदर्शनकारियों को काबू करने के लिए सुरक्षाबलों ने आंसू गैस के गोले दागे और हवा में गोलिया चलाई हैं. इन रिपोर्टों में कुछ लोगों के घायल होंने का दावा भी किया गया है.

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प्रतीकात्मक तस्वीर, फोटो सोर्स: गूगल

रिपोर्ट्स में ये दावा भी किया जा रहा है कि घाटी में विदेशी पत्रकारों और संचार सेवाओं पर पाबंदी जारी है. दरअसल, तमाम तरह के पाबंदियों के बाद भी सैटेलाइट सेवा को बहाल रखा गया है. साथ ही कश्मीर से बाहर रहने वाले लोगों को अपने परिवार वालों से बात करने के लिए दो हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए गए हैं.

तो हो सकता है अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने भी इसका सहारा लिया हो. वैसे भी चाहे राष्ट्रीय मीडिया हो या अंतर्राष्ट्रीय मीडिया सबके अपने-अपने स्थानीय रिपोर्टर जरूर होते हैं. ये ख़बर भी उनके द्वारा ही सामने आई है. इसका सबसे बड़ा सबूत है, बीबीसी द्वारा महबूबा मुफ्ती की बेटी सना का सेटलाइट फोन के द्वारा इंटरव्यू लेना. इस इंटरव्यू में उन्होंने कश्मीर को लेकर चिंता जाहिर की थी. अब बाकी के अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने भी इसी तरह कश्मीर के हालात पर अपनी रिपोर्ट प्रकाशित की है. इसने भारतीय मीडिया की पोल खोल कर रख दी है जो ये कहते नहीं थकते हैं कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद भी कश्मीर घाटी में सब सामान्य है.

 कतर के समाचार समूह अलजज़ीरा , फोटो सोर्स: गूगल
कतर के समाचार समूह अलजज़ीरा , फोटो सोर्स: गूगल

अलजज़ीरा का क्या कहना है?

कतर के समाचार समूह अलजज़ीरा ने दावा किया है कि उसके पास शुक्रवार को हुए विरोध प्रदर्शन की एक्सक्लूसिव वीडियो फुटेज’ है. अलजज़ीरा ने अपनी रिपोर्ट में यह भी कहा है कि शुक्रवार को नमाज़ के बाद धारा 144 को अनदेखा करते हुए हज़ारों की संख्या में लोग श्रीनगर के मध्य हिस्से की तरफ बढ़ने लगे.

प्रदर्शनकारियों में से कुछ ने काले झंडे थामे हुए थे और कुछ ने अपने हाथ में तख्तियां ली हुई थीं. जिन पर ‘वि वांट फ्रीडम’ और ‘अनुच्छेद 370 को हटाया जाना मंज़ूर नहीं’ जैसे नारे लिखे हुए थे.

अल जज़ीरा की भारतीय प्रजेंटर प्रियंका गुप्ता ने स्थानीय सूत्र के हवाले से दावा किया है कि ‘शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों को पीछे हटाने के लिए पुलिस ने हवा में गोलियां चलाईं, आंसू गैस के गोले दागे और पैलेट गन भी चलाए हैं.’

समाचार एजेंसी रॉयटर्स और वाशिंगटन पोस्ट का क्या कहना है?

समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने एक पुलिस अधिकारी के हवाले से बताया है कि विरोध प्रदर्शन में 10 हज़ार लोगों ने हिस्सा लिया था. ये सभी प्रदर्शनकारी श्रीनगर के दक्षिणी हिस्से में जुटे थे और उन्हें आइवा ब्रिज पर वापस भेजा गया. वहीं रॉयटर्स ने चश्मदीदों के हवाले से बताया है कि कुछ महिलाएं और बच्चे पानी में कूद गए. इतना ही नहीं पुलीस ने कई लोगों पर फायरिंग भी की है.

’वाशिंगटन पोस्ट’ ने भी चश्मदीदों के हवाले से बताया है कि सुरक्षा बलों ने जब प्रदर्शनकारियों को वापस लौटने को कहा तो लौटने की बजाय वो सड़क पर ही बैठ गए और इसके बाद फायरिंग शुरू हो गई. इस फायरिंग में कम से कम 8 लोग घायल हुए हैं.

न्यूयॉर्क टाइम्स का क्या कहना था?

न्यूयॉर्क टाइम्स में जेफरी जेटलमैन के लिखे लेख में कश्मीर के वर्तमान हालात को लेकर कई और बाते सामने आई हैं. इसमें जेफरी लिखते हैं कि प्रतिबंधों के बाद भी कश्मीर में विरोध प्रदर्शन हुआ. शुक्रवार को अशांति बनी रही. गोलियों की आवाज़ सुनी गई. शुक्रवार तक विदेशी पत्रकारों के बिना अनुमति कश्मीर में दाखिल होने पर रोक थी.

न्यूयॉर्क टाइम्स के इस आलेख मे कई तस्वीरें प्रकाशित की हैं. जिसको लेकर जेफरी ने लिखा है ये वो पहली तस्वीर है जो भारतीय फोटोग्राफर्स ने ली है. वो संचार पर लगे रोक और मीलों तक लगे कंटीले तारों के बाद भी ये तस्वीरे कैद करने और उन्हें प्रकाशित करने के लिए काम कर रहे हैं.

कश्मीर घाटी में प्रदर्शन के बाद की स्थिति, फोटो सोर्स: न्यूयॉर्क टाइम्स
कश्मीर घाटी से आईं प्रदर्शन की तस्वीरें, फोटो सोर्स: न्यूयॉर्क टाइम्स

हालांकि स्थानीय पत्रकार मोहित कांधार ने बताया है कि पांच दिनों के बाद स्कूल खुल गए हैं. इसके अलावा उन्होंने अधिकारियों के हवाले से बताया है कि घाटी से भी किसी बड़ी घटना की रिपोर्ट रविवार को सामने नहीं है.

अब सवाल ये उठता है कि सच कौन बोल रहा है, भारतीय मीडिया या अंतर्राष्ट्रीय मीडिया? क्योंकि आम जनता का कश्मिरियों से कोई खासा संपर्क हो नहीं रहा है. जो ख़बरें लोगों तक पहुंच रही हैं वो मीडिया द्वारा ही पहुंच रहीं हैं. भारतीय मीडिया जिस तरह से सरकार के हाथ की कठपूतली बना हुआ है यह किसी से छिपा नहीं है. वैसे भी भारतीय मीडिया ने आज तक कश्मीर की वास्तविक समस्याओं को लेकर कोई बात नहीं की है. तो इस हालात में ये उम्मीद करना बेईमानी होगा कि अब वो कश्मीर से जुड़ी कोई वास्तविक जानकारी हमारे सामने रखेंगे. ऐसी स्थिति में अंतर्राष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स ही एक मात्र जरिया है जिससे हम कश्मीर के वास्तविक हालात को जान सकते हैं.

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