सीमा पर तैनात जवानों का जीवन अनिश्चितताओं से घिरा होता है। उन्हें अपनी जिंदगी और मौत को लेकर कुछ भी पता नहीं होता है। यही वज़ह है कि ज़िन्दगी की अनिश्चितताओं को देखते हुए सेना के जवानों में स्पर्म फ्रीज कराने के ट्रेंड में आश्चर्यजनक वृद्धि देखने को मिली है।

देश के प्रतिष्ठित दैनिक हिंदी अखबार दैनिक भास्कर ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि पिछले तीन सालों में इस आंकड़े में तीन गुना वृद्धि हुई है। देश के चार प्रमुख शहरों पटना, जयपुर, रायपुर और अहमदाबाद के भास्कर रिपोर्टरों ने अपने-अपने शहरों से रिपोर्ट भेजकर इस बात की पुष्टि की है।

दरअसल, सेना के जवान अपने घर से दूर देश की सीमा पर या फिर दूर दराज के जंगलों में सुरक्षा में लगे होते हैं। कब जवानों के शरीर को दुश्मनों की गोली अपना शिकार बना ले, यह कहा नहीं जा सकता है। यही वज़ह है कि देश की अलग-अलग जगहों पर मिलिट्री हॉस्पिटल व प्राइवेट हॉस्पिटलों में भी स्पर्म फ्रीज करवाने के लिए सेंटर बनाए गए हैं जहां सैनिकों से पैसे नहीं लिए जाते हैं।

गुजरात में भी इस ट्रेंड में इज़ाफ़ा हुआ

2013 से 2018 के दौरान गुजरात में सैनिकों द्वारा स्पर्म फ्रीज कराने के मामले में तीन गुना वृद्धि हुई है। अहमदाबाद के एक स्पर्म बैंक के डॉ हिमांशु बातीसी के मुताबिक 2013-2015 की अवधि में 25 से 30 सैनिकों ने स्पर्म फ्रीज करवाया। जबकि 2016-2018 के दौरान यह आंकड़ा बढ़कर 130-140 तक पहुंच गया। इसी तरह राज्य के अक्षर आईवीएफ , रोजमेरी हॉस्पिटल में 2013 से 2015 में दो तीन सैनिकों ने स्पर्म फ्रीज करवाए जबकि 2016 से 2018 में यह आंकड़ा 25 के करीब पहुंच गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स – गूगल

बिहार में उरी हमले के बाद स्पर्म फ्रीज करना मुफ़्त में शुरू

गुजरात के तरह ही स्पर्म फ्रीज के मामले में बिहार में भी इज़ाफ़ा देखने को मिल रहा है। जानकारी के मुताबिक बिहार के सृजन बांझपन केंद्र में भी स्पर्म फ्रीज करवाने के लिए पांच सैनिक आए। इस बांझपन केंद्र में काम करने वाले डॉ हिमांशु राय का कहना है कि यहां सैनिकों को स्पर्म फ्रीज कराने और इससे जुड़ी सलाह फ्री में दी जाती है। बांझपन केंद्र के संचालको का कहना है कि उरी हमले के बाद सैनिकों के लिए इस सुविधा को शुरू किया गया है।

प्रतीकात्मक तस्वीर, सोर्स – गूगल

राजस्थान में भी अप्रत्याशित वृद्धि देखी गई

राजस्थान के शेखावटी क्षेत्र में स्पर्म फ्रीज कराने के ट्रेंड में भारी वृद्धि देखने को मिली है। जयपुर के एक फर्टिलिटी सेंटर के संचालक का कहना है कि राज्य के शेखावटी क्षेत्र जैसे सीकर, चुरू, झुंझनू जिलों में पिछले तीन साल में जहां 5-10 सैनिक स्पर्म फ्रीज करवाते थे। वहीं अब स्पर्म फ्रीज करवाने वालों का आंकड़ा 30 के पार हो गया है। साफ जाहिर है कि स्पर्म फ्रीज करवाने वाले सैनिकों की संख्या में भारी वृद्धि हो रही है।

छत्तीसगढ़ में पत्नी की मौत के बाद सैनिक फर्टिलिटी से पैदा करेगा बच्चा

रायपुर से एक किस्सा सामने आया है। दरअसल, रायपुर के एक आईवीएफ सेंटर प्रबंधन के सामने विकट स्थिति पैदा हो गई है। ख़बरों के मुताबिक सैनिक ने अपना स्पर्म और अपनी पत्नी का ओवल सुरक्षित रखवा दिया था। इसे सुरक्षित रखने के लिए एक साल का अनुबंध किया गया था, लेकिन दो साल तक वो नहीं आया। प्रबंधन ने जब उनसे संपर्क किया तो सैनिक द्वारा कहा गया कि वो जल्द ही उसका उपयोग करेंगे। बाद में उसने अपनी पत्नी को गर्भधारण के लिए भरती कराया। पर तभी स्वाइन फ्लू की चपेट में आने से सैनिक की पत्नी की मौत हो गई। अब सैनिक इस बात पर अड़ा है कि वो अपनी पहली पत्नी के ही ओवाल को दूसरी पत्नी के गर्भ के लिए यूज करेगा। उसकी दूसरी शादी अभी तक नहीं हो पाई है, ऐसे में उसके पहली पत्नी का ओवल और सैनिक का स्पर्म संभाल कर रख पाना अस्पताल के लिए एक बड़ी चुनौती है।

कई देशों में स्पर्म और महिलाओं के एग्स सुरक्षित रखे जाते हैं

जानकारी के लिए आपको बता दें कि कई विकसित देशों में वहां रहने वाले पुरूषों के स्पर्म और महिलाओं के एग्स को फ्रीज करने की सुविधा होती है। अमेरिका जैसे देश में लोगों को यह सुविधा सरकार के द्वारा फ्री में उप्लब्ध कराई जाती है। ऐसा इसलिए होता है ताकि किसी भी नागरिक के साथ अनहोनी होने पर उसका वंश आगे सफलता पूर्वक बढ़ता रहे।

Facebook Comments

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here