आधुनिक पनडुब्बियों और युद्धपोतो से लैस होती भारतीय नौ सेना अब अपने जवानों को युद्ध कौशल और बचाव अभियान के लिए तेजी से तैयार कर रही है. इसी क्रम में दुनिया की 7 वें नंबर की सबसे मजबूत भारतीय नौ सेना ने अब एक और नया कीर्तिमान रच दिया है. दरसअल भारतीय नौ सेना ने समंदर के अंदर हादसे का शिकार हुई पनडुब्बी में फंसे अपने जवानों को सुरक्षित निकालने की क्षमता हासिल कर ली है.

फोटो सोर्स – गूगल

अभी तक भारतीय नौ सेना, भारत-अमेरिका के बीच हुये समझौते के चलते इस तरह से दुर्घटनाग्रस्त पनडुब्बियों से राहत-बचाव कार्य के लिए अमेरीकन नेवी पर निर्भर रहा करती थी. पर अब इस तरह के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए बिना अमेरिकी मदद के इंतजार किए भारतीय नौ सेना खुद से राहत बचाव मिशन चला सकती है.

इक्नॉमिक टाइम्स में छपी खबर के अनुसार भारतीय नौ सेना ने विशाखापत्तनम के पास हिन्द महासागर में दुर्घटना का शिकार हुई पनडुब्बी से राहत-बचाव कार्य का सफल परीक्षण किया गया. इसमे रेस्क्यू ऑपरेशन में पहली बार डीप सबमर्सेज रेस्क्यू व्हिकल (डीएसआरवी) का इस्तेमाल किया गया था. इस मशीन को एक शिप के जरिये समुंदर के अंदर 100 मीटर तक ले जाया गया. जिसकी मदद से दुर्घटनाग्रस्त पनडुब्बी में फंसे 30 जवानों को सुरक्षित निकाला गया. इस ऑपरेशन के लिए नौ सेना ने सिंधु ध्वज पनडुब्बी को हादसे का शिकार हुई सबमरीन के रूप में प्रयोग किया.

फोटो सोर्स – गूगल

भारतीय नौ सेना ने ब्रिटिश की एक कंपनी से पनडुब्बी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए इस्तेमाल होने वाली दो ‘डीएसआरवी’ मशीन खरीदी है. जिसमें से एक को भारतीय समुद्री सीमा के पूर्वी तट पर तैनात किया जाएगा जबकि दूसरी, भारत के पश्चिमी तट पर तैनात होगी.

रेस्क्यू व्हीकल डीएसआरवी, फोटो सोर्स – गूगल

पनडुब्बी से सफल रेस्क्यू ऑपरेशन चलाने की क्षमता हासिल करने वाला भारत दुनिया का सातवाँ देश बन गया है.

इस क्षमता के हासिल करने से पहले पनडुब्बी रेस्क्यू ऑपरेशन कैसे चलाती थी भारतीय नौ सेना?

भारत-अमरीका समझौते के चलते अभी तक इस तरह के ऑपरेशन में अमेरीकन नेवी हमारी मदद करने आती थी. लेकिन अमेरिका से भारत मदद पहुंचाने में 48 घंटे लग जाया करते थे. क्योंकि मदद के समय रेस्क्यू ऑपरेशन व्हीकल को लिफ्ट करके हवाई मार्ग से अमेरिका से भारत लाया जाता था. इसके बाद इस व्हीकल को भारत के किसी पोर्ट पर उतारा जाता था फिर वहाँ से उसे शिप के जरिए घटना स्थल तक ले जाता था. इस काम में लगभग पूरे दो दिन जाया करते थे. मदद देरी से पहुँचने के कारण कई बार काफी जान-माल का नुकसान हो चुका होता था.

रेस्क्यू व्हीकल डीएसआरवी, फोटो सोर्स – गूगल

इसी तरह एक हादसा 2013 में भारतीय नौ सेना की सिंधु रक्षक पनडुब्बी के साथ हुआ था. जिसमें 17 जवान शहीद हुये थे. जिसमें समय से मदद न पहुँचने पर पनडुब्बी में फंसे जवानों को बचाया नही जा सका था. जिसके बाद भारतीय नौ सेना ने ये फैसला लिया कि अब वह खुद को पनडुब्बी रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए तैयार करेगी. जिसके तहत भारतीय नौ सेना ने पहला पनडुब्बी रेस्क्यू ऑपरेशन का परीक्षण 2018 में किया था.

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